इस्लामपुर का नाम बदलने पर छिड़ा विवाद, पूर्व मंत्री सड़क पर लेटे
समझें क्या है पूरा मामला
- झुंझुनू के इस्लामपुर गांव का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने पर विरोध।
- पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट तक निकाला मार्च।
- प्रदर्शन के दौरान गुढ़ा अचानक सड़क पर लेट गए, मचा हड़कंप।
- गुढ़ा ने कहा- मुस्लिम कोई बाहरी नहीं, वे हमारे भाई हैं।
- कलेक्टर ने कहा- दो दिन में दूसरे पक्ष से दस्तावेज मांगे गए हैं।
राजस्थान के झुंझुनू जिले के करीब 400 साल पुराने गांव इस्लामपुर का नाम बदलकर श्रीरामपुर किया जा रहा है। नाम परिवर्तन को लेकर विवाद छिड़ गया है जिसने सोमवार को बड़ा रूप ले लिया। पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने इस्लामपुर से झुंझुनू कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला।
गांव की ऐतिहासिक पहचान बचाने की मांग करते हुए ग्रामीणों ने जोरदार नारेबाजी की। जिला कलेक्टर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा गया। कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि नाम परिवर्तन के समर्थन में आए दूसरे पक्ष से दो दिन में दस्तावेज मांगे हैं और जनभावनाओं के खिलाफ कोई काम नहीं होगा।
विधायक ने भेजा नाम बदलने का प्रस्ताव
इस पूरे विवाद की शुरुआत ग्रामीणों के एक गुट की मांग पर हुई। स्थानीय विधायक राजेंद्र भांबू ने गांव का नाम इस्लामपुर से बदलकर श्रीरामपुर करने का प्रस्ताव भेजा।
इस प्रस्ताव का ग्रामीणों के दूसरे गुट ने तीखा विरोध किया। उनका कहना है कि 400 साल पुरानी ऐतिहासिक पहचान को बदला नहीं जाना चाहिए।
इस्लामपुर से कलेक्ट्रेट तक चले ग्रामीण
सोमवार को पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने इस्लामपुर गांव से झुंझुनू कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला। भीषण गर्मी और उमस के बावजूद ग्रामीणों का हौसला कम नहीं हुआ।
गांव के नाम परिवर्तन के विरोध में जोरदार नारे लगाते हुए ग्रामीणों का मार्च कलेक्ट्रेट तक पहुंचा। प्रशासन ने सावधानी के तौर पर मेडिकल टीम और एंबुलेंस मौके पर तैनात कर दीथी।
गुढ़ा सड़क पर लेट गए, मचा हड़कंप
प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट के सामने अचानक पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा सड़क पर लेट गए। इससे प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। प्रशासन ने तुरंत एंबुलेंस बुलाई। लेकिन गुढ़ा ने एंबुलेंस में बैठने से साफ इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम कोई बाहरी नहीं हैं, वे हमारे भाई हैं। गुढ़ा का यह बयान और सड़क पर लेटने की हरकत विरोध का केंद्र बन गई और माहौल गर्म हो गया।
कलेक्टर से मुलाकात, ज्ञापन सौंपा
प्रदर्शन के बाद पूर्व मंत्री गुढ़ा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि नाम परिवर्तन के समर्थन में आए दूसरे पक्ष से तथ्यात्मक साक्ष्य और दस्तावेज मांगे गए हैं।
दो दिन में जो दस्तावेज मिलेंगे, उनके आधार पर ही आगे का निर्णय होगा। कलेक्टर ने यह भी कहा कि प्रशासन सभी पक्षों की बात सुनकर निष्पक्ष निर्णय करेगा और जनभावनाओं के खिलाफ कोई काम नहीं किया जाएगा।
राजस्थान में नाम बदलने का चलन
यह पहला मामला नहीं है। राजस्थान में हाल के वर्षों में कई जगहों के नाम बदले गए हैं। हाल ही में मोहम्मदपुरा का नाम बदलकर मोहनपुरा किया गया था जिसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी हुआ।
इस्लामपुर का मामला इसलिए संवेदनशील है क्योंकि यह गांव 400 साल पुराना है और यहां दोनों समुदायों के लोग मिलकर रहते आए हैं। नरहड़ से आए अफगान पठानों में नागड़ कबीले के बहलोल खान ने अपने ससुर इस्लाम कुलीखां नारनौल के नाम पर इस इस्लामपुर गांव को बसाया था।
FAQ
- इस्लामपुर का नाम बदलने का विवाद क्या है?
झुंझुनू जिले के 400 साल पुराने इस्लामपुर गांव का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने का प्रस्ताव स्थानीय विधायक राजेंद्र भांबू ने ग्रामीणों के एक गुट की मांग पर भेजा। इसके विरोध में दूसरे गुट ने पूर्व मंत्री गुढ़ा के नेतृत्व में पैदल मार्च निकाला और ऐतिहासिक पहचान बचाने की मांग की। - कलेक्टर ने इस्लामपुर गांव मामले में क्या आश्वासन दिया?
कलेक्टर ने कहा कि नाम परिवर्तन के समर्थन में आए पक्ष से दो दिन में तथ्यात्मक दस्तावेज मांगे गए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर ही निर्णय होगा। प्रशासन सभी पक्षों की बात सुनकर निष्पक्ष निर्णय करेगा और जनभावनाओं के खिलाफ कोई काम नहीं होगा।
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