करोड़ों की बोलियों के दौर में जैन संत का सादगी से चातुर्मास, जीता श्रद्धालुओं का दिल

Ashish Bhardwaj | Aug 01, 2026, 14:21 IST
जैन मुनि अभिनंदन सागर
करोड़ों की बोलियों के दौर में दिगंबर जैन मुनि अभिनंदन सागर राजस्थान के अलवर में सादगी से चातुर्मास कर रहे हैं। चातुर्मास स्थल पर ​न कोई टेंट लगा है और न ही कोई बैनर दिखता है।

ऐसे समझें पूरा मामला

  • करोड़ों की बोलियों के दौर में जैन संत अभिनंदन सागर का सादगी से चातुर्मास।
  • उनकी सादगी श्रद्धालुओं को चौंका रही है, क्योंकि यहां कोई चकाचौंध नहीं दिख रही।
  • आज चातुर्मास में कलश स्थापना की लाखों-करोड़ों की बोलियां देखने को मिलती है।
  • अभिनंदन सागर दिल्ली से विहार करके आए हैं, आचार्य विनीत सागर के शिष्य हैं।

सुनील जैन@अलवर



आज का दौर वह है, जहां धार्मिक आयोजनों की भव्यता बड़े-बड़े टेंट, जगमगाती लाइटों और कलश स्थापना के नाम पर करोड़ों की बोलियों से तय होती है। ऐसे में राजस्थान के अलवर में एक दिगंबर जैन ने सादगी से अपना चातुर्मास शुरू किया है।


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इन दिनों अलवर में ढाई पैड़ी के अहिंसा स्थल मंदिर में दिगम्बर जैन मुनि अभिनंदन सागर महाराज का चातुर्मास चल रहा है। लेकिन यह चातुर्मास किसी भव्य आयोजन की वजह से नहीं, बल्कि अपनी सादगी और आडंबरहीनता के कारण पूरे क्षेत्र में श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।



​न कोई टेंट, न बैनर, न ही करोड़ों की बोलियां

आज के समय में चातुर्मास में कलश स्थापना और पाद प्रक्षालन (गुरु चरणों के प्रक्षालन) के लिए लाखों-करोड़ों की बोलियां देखने को मिलती है। मुनिश्री अभिनंदन सागर के इस चातुर्मास में ​कोई पोस्टर या बैनर नहीं दिख रहा है।



मुनि के चातुर्मास के लिए न विशाल टेंट लगाए गए और न ही महंगी सजावट की गई। कलश स्थापना से लेकर पाद प्रक्षालन जैसी धार्मिक क्रिया के लिए एक रुपए की भी बोली नहीं लगाई गई। हर श्रद्धालु को समान भाव से भक्ति करने का अवसर मिल रहा है।


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मुनि अभिनंदन सागर ने कहा कि चातुर्मास केवल धर्म साधना व आत्मकल्याण का माध्यम है। इसमें किसी भी प्रकार का दिखावा या आडंबर नहीं होना चाहिए।



​गुरु परंपरा और अलवर से गहरा नाता

​अहिंसा स्थल जैन मंदिर के प्रबंधक बच्चू सिंह जैन ने बताया कि मुनि अभिनंदन सागर महाराज चातुर्मास के लिए दिल्ली से विहार कर अलवर पहुंचे हैं। वे आचार्य विनीत सागर जी के शिष्य हैं।



मुनिश्री के दादागुरु आचार्य ज्ञान सागर महाराज के सानिध्य में लगभग 13 वर्ष पूर्व इसी अहिंसा स्थल मंदिर का पंचकल्याणक महोत्सव हुआ था। अब वर्षों बाद उनके शिष्य यहां आए हैं।



​श्रद्धालुओं का उमड़ रहा सैलाब

जैन समाज के हरीश जैन के अनुसार चकाचौंध न होने के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं है।



प्रतिदिन अलवर और इसके आसपास से भी बड़ी संख्या में भक्त केवल मुनिश्री के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। ​चातुर्मास के दौरान मंदिर में रोजाना मुनिश्री के प्रवचन, शंका समाधान और जिनवाणी वाचन


हो रहे हैं।



​इसके अलावा प्रतिदिन श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा और नित्य नियम पूजन जैसे अनुष्ठान मुनिश्री के सानिध्य में हो रहे हैं।



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