जयपुर में 310 अतिक्रमण पर कार्रवाई का रास्ता साफ, हाई कोर्ट ने तय की शर्तें

Saurabh Mishra | Aug 24, 2026, 20:29 IST
जयपुर में 310 अतिक्रमण हटाने के हाई कोर्ट के आदेश
जयपुर हाईकोर्ट ने 22 गोदाम रेलवे लाइन से बी-2 बाइपास तक 310 अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। जेडीए को चार महीने में कार्रवाई करनी होगी। प्रभावितों को 15 दिन का नोटिस मिलेगा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • जयपुर में 310 अतिक्रमण हटाने के हाई कोर्ट के आदेश।
  • 22 गोदाम से लेकर बी-2 बायपास तक चलेगी कार्रवाई।
  • जेडीए को 4 महीने के भीतर हटाने होंगे अतिक्रमण।
  • प्रभावितों को मिलेगा 15 दिन का नोटिस और सुनवाई का मौका।
  • हाई कोर्ट ने रेलवे के अतिक्रमण भी हटाने के निर्देश दिए।

जयपुर हाईकोर्ट ने सोमवार को अतिक्रमण को लेकर बड़ा आदेश दिया। 22 गोदाम रेलवे लाइन से बी-2 बायपास तक करीब 310 अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं। हाई कोर्ट ने इन्हें हटाने के निर्देश दिए। जयपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी को चार महीने में यह कार्रवाई पूरी करनी होगी। प्रभावितों को पहले 15 दिन का नोटिस दिया जाएगा।



जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने सोमवार को यह आदेश दिया। यह आदेश सीताराम देवंदा और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया।



राजस्थान हाई कोर्टने कहा कि जयपुर विकास प्राधिकरण (Jaipur Development Authority) चार महीने के भीतर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करे। साथ ही 25 नवंबर को जेडीए सचिव को पालना रिपोर्ट के साथ व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रभावित लोगों को 15 दिन के नोटिस के बाद सुनवाई का मौका दिया जाए।



सड़क की चौड़ाई तीन हिस्सों में तय

इससे पहले जेडीए ने कोर्ट में शपथ पत्र पेश किया था। इसमें बताया गया कि इस सड़क के तीन हिस्सों में अलग-अलग चौड़ाई तय की गई है। जेडीए की 62वीं बैठक में सड़क की आधिकारिक चौड़ाई साफ की गई थी।



22 गोदाम रेलवे स्टेशन से महेश नगर फाटक तक सड़क की चौड़ाई 40 फीट तय की गई है। महेश नगर फाटक से गोपालपुरा बायपास तक यह 60 फीट है। वहीं गोपालपुरा बायपास से बी-2 बायपास तक सड़क की चौड़ाई 80 फीट रखी गई।



रेलवे के अतिक्रमण भी हटेंगे

सुनवाई के दौरान मध्यस्थ के वकील ने कोर्ट को बताया कि रेलवे अधिकारियों ने भी इस सड़क के कुछ हिस्सों पर अतिक्रमण किया हुआ है। इस पर कोर्ट ने साफ निर्देश दिए कि निजी व्यक्तियों या किसी भी वैधानिक प्राधिकरण द्वारा किए गए सभी अतिक्रमण हटाए जाएं। यानी इस कार्रवाई से रेलवे भी अछूता नहीं रहेगा।



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