पिछड़ रहा जयपुर एयरपोर्ट, पैसेंजर्स और फ्लाइट्स की संख्या में आई गिरावट, जानिए क्या हैं कारण
News In Short
- जयपुर एयरपोर्ट अब लखनऊ और गुवाहाटी जैसे शहरों से पिछड़ रहा है।
- जयपुर एयरपोर्ट पर हर सप्ताह 377 उड़ानें संचालित, जबकि लखनऊ में यह संख्या 408 और गुवाहाटी में 414 है।
- जयपुर एयरपोर्ट पर यात्रियों से यूडीएफ (UDF) शुल्क अधिक लिया जा रहा है, जिससे यात्रा महंगी हो रही है।
- विशेषज्ञों के अनुसार जयपुर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी और सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता है।
- अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो जयपुर एयरपोर्ट देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स से पीछे रह जाएगा।
News In Detail
राजस्थान की राजधानी जयपुर का एयरपोर्ट कनेक्टिविटी में देश के अन्य प्रमुख हवाई अड्डों से काफी पीछे नजर आने लगा है। एक समय था जब जयपुर एयरपोर्ट तेजी से एयर ट्रैफिक और यात्री संख्या में इजाफा हो रहा था। लेकिन आज वह लखनऊ और गुवाहाटी जैसे शहरों से भी पीछे रह गया है। यह स्थिति जयपुर एयरपोर्ट के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
गिर रही है फ्लाइट्स की संख्या
वर्तमान में जयपुर एयरपोर्ट पर औसतन हर सप्ताह 377 उड़ानें संचालित हो रही हैं। वहीं लखनऊ एयरपोर्ट पर 408 साप्ताहिक फ्लाइट संचालित हो रही है। इसके अलावा गुवाहाटी एयरपोर्ट 414 फ्लाइट्स के साथ और भी बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। भुवनेश्वर एयरपोर्ट भी 325 फ्लाइट्स के साथ तेजी से जयपुर के करीब पहुंच रहा है, जिससे प्रतिस्पर्धा और भी कड़ी हो गई है।
एवीएशन एक्सपर्ट की चिंता
एविएशन एक्सपर्ट और एवन हेलीकॉप्टर के डायरेक्टर सोहन सिंह नाथावत का कहना है कि जयपुर जैसा प्रमुख पर्यटन स्थल इस स्थिति में नहीं रह सकता। राजस्थान में पर्यटन, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए मजबूत एयर कनेक्टिविटी की आवश्यकता है लेकिन फ्लाइट्स की संख्या और यात्री संख्या में गिरावट यह संकेत दे रही है कि जयपुर एयरपोर्ट अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पा रहा है।
पीछे रहने के कारण
जयपुर एयरपोर्ट के पिछड़ने के कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है सीमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानें, नई रूट कनेक्टिविटी की कमी और आधुनिक विस्तार योजनाओं का अभाव। दूसरी ओर लखनऊ और गुवाहाटी जैसे एयरपोर्ट लगातार नए रूट्स जोड़कर बेहतर सुविधाएं विकसित कर रहे हैं और एयरलाइंस के साथ बेहतर तालमेल बना रहे हैं। इससे वे तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
सख्त कदम उठाने की आवश्यकता
अगर समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो जयपुर एयरपोर्ट का देश के प्रमुख एयरपोर्ट की दौड़ में पीछे रहना तय है। इसलिए एयरपोर्ट अथॉरिटी और राजस्थान सरकार को मिलकर कनेक्टिविटी बढ़ाने, नई फ्लाइट्स जोड़ने और सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान केंद्रित करना होगा, ताकि जयपुर अपनी संभावनाओं को फिर से पा सके।
यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) का अतिरिक्त बोझ
एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलर्टी एथॉरिटी ऑफ इंडिया के अनुसार के यूडीएफ के अतिरिक्त बोझ के कारण जयपुर एयरपोर्ट पर यात्रा करना अब महंगा हो गया है। एयरपोर्ट विकास के नाम पर यात्रियों से भारी यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) वसूली जा रही है। जयपुर एयरपोर्ट पर घरेलू उड़ानों में प्रति यात्री 1156 रुपये UDF लिया जा रहा है, जबकि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और अहमदाबाद जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर इतनी अधिक राशि नहीं ली जाती।
UDF की तुलना में महंगाई
इतना ही नहीं, जयपुर एयरपोर्ट पर आने वाले यात्रियों से भी 496 रुपये UDF लिया जा रहा है, जबकि देश के अधिकांश एयरपोर्ट्स पर इस प्रकार की फीस नहीं ली जाती। इस अतिरिक्त बोझ के कारण जयपुर से हवाई यात्रा अन्य शहरों की तुलना में महंगी हो रही है, जो यात्री संख्या को प्रभावित कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महंगी यात्रा की वजह से यात्री अन्य ऑप्शन चुन रहे हैं, जिसका सीधा असर उड़ानों के संचालन और जयपुर एयरपोर्ट की प्रतिस्पर्धा पर पड़ रहा है।
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