जयपुर में 6.80 करोड़ का 'बॉस स्कैम': 4 गिरफ्तार, पुलिस ने कराए 3.50 करोड़ होल्ड

Saurabh Mishra | Sept 02, 2026, 19:43 IST
बॉस स्कैम
जयपुर में साइबर ठगों ने व्हाट्सएप हैक कर डायरेक्टर बनकर कंपनी से 6.80 करोड़ रुपए ठगे। पुलिस ने 4 आरोपी गिरफ्तार किए और 3.50 करोड़ रुपए होल्ड कराए।

समझें क्या है पूरा मामला

  • जयपुर में 6.80 करोड़ के बॉस स्कैम का हुआ पर्दाफाश।
  • व्हाट्सएप हैक कर निदेशक बनकर की करोड़ों की ठगी।
  • साइबर पुलिस ने रोके 3.50 करोड़ रुपये, 4 आरोपी गिरफ्तार।
  • सिंगापुर-हांगकांग तक फैले हैं इस साइबर गिरोह के तार।
  • 250 बैंक खातों में घुमाई गई ठगी की पूरी रकम।

जयपुर में साइबर ठगों ने एक निजी कंपनी से 6.80 करोड़ रुपए की ठगी की। ठगों ने कंपनी के अकाउंटेंट का कंप्यूटर हैक कर व्हाट्सएप एक्सेस किया। इसके बाद कंपनी का डायरेक्टर बनकर फर्जी मैसेज भेजे और रकम ट्रांसफर करवाई। राजस्थान पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर 3.50 करोड़ रुपए की रकम होल्ड कराई है।



राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर थाना पुलिस ने व्हाट्सऐप के जरिए हुई इस बड़ी ठगी का खुलासा किया है। यह कार्रवाई डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के निर्देशों पर चल रहे अभियान के तहत हुई। आरोपियों ने डायरेक्टर का नाम और फोटो इस्तेमाल कर अकाउंटेंट को झांसे में लिया था।



कैसे हुआ जयपुर में 'बॉस स्कैम'

राजस्थान के एडीजी साइबर अपराध विजय कुमार सिंह के मुताबिक, 25 अगस्त 2026 को जयपुर की एक निजी कंपनी के अकाउंटेंट ने सेंट्रल साइबर अपराध पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक 24 अगस्त को साइबर अपराधियों ने कंपनी के कंप्यूटर में मौजूद तकनीकी खामी का फायदा उठाकर व्हाट्सऐप तक पहुंच बनाई।



इसके बाद ठगों ने कंपनी के डायरेक्टर के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर खाताधिकारी को मैसेज भेजे। खुद को निदेशक बताते हुए उन्होंने तुरंत आरटीजीएस से भुगतान करने के निर्देश दिए।



ठगों ने अकाउंटेंट की पुरानी बातचीत की नकल की तैयार

साइबर फ्रॉड से जुड़े इस मामले की जांच मेंसामने आया कि ठगों ने अकाउंटेंट के कंप्यूटर को निशाना बनाया। उन्होंने व्हाट्सऐप की संपर्क सूची से असली डायरेक्टर का नंबर हटाकर अपना नंबर उसी नाम और फोटो के साथ जोड़ दिया।



इसके बाद डायरेक्टर और अकाउंटेंट की पुरानी बातचीत की नकल तैयार की गई। इससे अकाउंटेंट को लगा कि वह वाकई कंपनी के डायरेक्टर से बात कर रहा। ठगों के निर्देश पर कंपनी के खाते से कुल 6 करोड़ 80 लाख रुपए तीन बैंक खातों में भेज दिए गए।



साइबर पुलिस ने 3.50 करोड़ होल्ड कराए

घटना की जानकारी मिलते ही केंद्रीय साइबर अपराध पुलिस और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 की टीम हरकत में आई। दोनों टीमों ने बैंकिंग लेन-देन पर तुरंत कार्रवाई शुरू की। पुलिस के संयुक्त कोशिशों से ठगी की रकम में से करीब 3.50 करोड़ रुपए अलग-अलग खातों में रुकवाए गए। इन्हें वापस दिलाने की कार्रवाई अभी जारी है।



कैसे छिपाते थे ठगी की रकम?

जांच में सामने आया कि गिरोह ठगी की रकम सीधे अपने खातों में नहीं रखता था। इसके बजाय वे दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। ऐसे खाते उपलब्ध कराने वालों को कमीशन दिया जाता था।



रकम इन खातों में आने के बाद चेक, एटीएम, यूपीआई, नकद जमा मशीन और डिजिटल पर्स के जरिए कई स्तरों पर घुमाई जाती थी। इसके बाद रकम को यूएसडीटी जैसी क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजा जाता था।



साइबर ठग टेलीग्राम के जरिए करते थे बैंक अकाउंट की व्यवस्था

आरोपी टेलीग्राम के अलग-अलग समूहों के जरिए बैंक खाते, एटीएम, सिम और पासबुक की व्यवस्था करते थे। एक बैंक खाते की किट के लिए करीब 10 से 15 हजार रुपए दिए जाते थे। पहले जिन तीन बैंक खातों में रकम आई, वहां से आगे करीब 250 बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की गई। इस तरह रकम के असली स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई।



साइबर पुलिस ने चार आरोपियों को किया गिरफ्तार

पुलिस ने तकनीकी जांच और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें जयपुर निवासी मयंक कसौटिया और बृजमोहन द्रोण उर्फ लक्की शामिल हैं। इसके अलावा कुचामन-डीडवाना निवासी समानाराम और सीकर निवासी मोहित यादव उर्फ मोती को भी पकड़ा गया है।



जांच में सामने आया कि मयंक ने ठगी की रकम पाने के लिए अपना बैंक खाता दिया था। बृजमोहन बैंक खातों की व्यवस्था और रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलने का काम देखता था। समानाराम क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लोगों से संपर्क कराता था। वहीं मोहित यादव भी बैंक खातों की व्यवस्था और रकम की निकासी में शामिल था।



सिंगापुर-हांगकांग तक जुड़े ठगी के तार

जांच में इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी सामने आए हैं। बैंक लेन-देन से जुड़े आईपी एड्रेस की जांच में पता चला कि रकम म्यूल खातों में पहुंचने के बाद सिंगापुर और हांगकांग में बैठे मास्टरमाइंड ने इंटरनेट बैंकिंग के जरिए इसे आगे भेजा। इसके बाद रकम को कई स्तरों पर अलग-अलग खातों, क्यूआर कोड और डिजिटल माध्यमों से घुमाया गया।



250 से ज्यादा खातों की जांच जारी

पुलिस अब यह पता लगा रही है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में पहुंची और इन खातों के संचालक कौन हैं। साथ ही विदेश में बैठे मुख्य संचालकों से आरोपियों के संबंधों की भी जांच हो रही है।



व्हाट्सऐप बातचीत, कॉल विवरण, मोबाइल रिकॉर्ड और बैंकिंग लेन-देन की पूरी सीरीज का एनालिसिस किया जा रहा। यह कार्रवाई उप महानिरीक्षक पुलिस साइबर अपराध शांतनु कुमार सिंह की निगरानी में हुई।



FAQ

  1. जयपुर में बॉस स्कैम कैसे हुआ?
    साइबर ठगों ने कंपनी के अकाउंटेंट का कंप्यूटर हैक कर व्हाट्सएप एक्सेस किया। इसके बाद निदेशक के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर फर्जी संदेश भेजे। इसी तरीके से 6.80 करोड़ ट्रांसफर करवाए गए।
  2. जयपुर पुलिस ने कितनी रकम बचाई?
    पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर करीब 3.50 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में रुकवाए। इन्हें वापस दिलाने की प्रक्रिया अभी जारी है।
  3. इस मामले में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
    पुलिस ने अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें जयपुर, सीकर और डीडवाना के लोग शामिल हैं।

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