जयपुर कोचिंग हब, अवैध टावर आवंटन पर अफसरों को मिला लीगल नोटिस
समझें क्या है पूरा मामला
- कोचिंग हब के 4 टावर पुलिस विभाग को देने पर मुख्य सचिव व अन्य शीर्ष अफसरों को अवमानना का नोटिस।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार मास्टर प्लान उल्लंघन अवैध है तथा कोचिंग हब का आवंटन न्यायिक निर्णय के अधीन रहेगा।
- 350 करोड़ का हब गोपालपुरा बाईपास के कोचिंग सेंटरों को शिफ्ट कर आवासीय ट्रैफिक कम करने के लिए बना था।
- जेडीए स्थानांतरण टाल रहा है,पुलिस विभाग को आवंटन रद्द नहीं करने पर अवमानना कार्रवाई की चेतावनी ।
कोचिंग हब के चार टॉवर को पुलिस विभाग को देने के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में पक्षकार 10-बी स्कीम विकास समिति की ओर से मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, यूडीएच के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक गुप्ता, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव भास्कर ए.सावंत, जेडीए आयुक्त सिद्वार्थ महाजन और राजस्थान हाउसिंग बोर्ड आयुक्त अरविंद पोसवाल को कानूनी नोटिस दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत है
नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के लोगनाथन बनाम तमिलनाडु राज्य मामले में 4 अगस्त 2026 को दिए गए आदेश का हवाला दिया है। नोटिस में बताया है कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि मास्टर प्लान और बिल्डिंग बाय-लॉज के विपरीत कोचिंग सेंटर चलाना अवैध है।
कोर्ट के अनुसार समर्पित कोचिंग हब के टावरों का अन्य संस्थाओं को किया गया आवंटन लंबित अदालती कार्यवाही के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा
योजना के उद्देश्य के विपरीत
नोटिस में 13 अगस्त 2026 की समाचार पत्रों की खबरों का हवाला देकर कहा है कि राजस्थान आवासन मंडल ने कोचिंग हब के चार टावरों को पुलिस विभाग को आवंटित कर दिया है या आवंटित करने की प्रक्रिया में है।
जबकि लगभग 350 करोड़ रुपये की लागत से बने कोचिंग हब का निर्माण गोपालपुरा बाईपास जैसे गैर-निर्धारित या व्यावसायिक क्षेत्रों में चल रहे कोचिंग संस्थानों को स्थानांतरित करने के उद्देश्य से किया गया था। इसका मूल उद्देश्य आवासीय क्षेत्रों में यातायात और भीड़भाड़ की समस्या को दूर करना है।
टालमटोल कर रहा है जेडीए
नोटिस में कहा है कि अधिकारी न्यायिक कार्यवाही को कमजोर करने और मास्टर प्लान के नियमों की अनदेखी करने की कोशिश कर रहे हैं। क्यों कि जेडीए छोटी-मोटी कमियों का हवाला देकर कोचिंग सेंटरों के स्थानांतरण को टाल रहा है।
नोटिस में मांग की गई है कि पुलिस विभाग या किसी अन्य गैर-शैक्षणिक संस्था को किए गए टावरों के आवंटन को तुरंत रद्द किया जाए और उनका कब्जा न सौंपा जाए। ऐसा न करने पर अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
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