अस्पताल में इलाज के साथ खाना भी सवालों में, कैंटीनों पर खाद्य सुरक्षा टीमों की छापेमारी
समझें क्या है पूरा मामला
- अस्पतालों की कैंटीन अब जांच के घेरे में।
- पहले ही दिन मिलीं बड़ी गड़बड़ियां।
- 159 खाद्य नमूने भेजे गए जांच के लिए।
- 1500 किलो खाद्य सामग्री मौके पर नष्ट।
- 90 कैंटीन को मिले सुधार नोटिस।
अस्पताल में मरीज बीमारी से लड़ने पहुंचता है, लेकिन उसके खाने की गुणवत्ता भी अब जांच के घेरे में है। राजस्थान में अस्पतालों की कैंटीन और उनके आसपास बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने के लिए शुरू हुए विशेष अभियान के पहले ही दिन बड़ी संख्या में गड़बड़ियां सामने आईं।
प्रदेशभर में 100 से ज्यादा सरकारी और निजी अस्पतालों की कैंटीन व रेस्टोरेंट और अस्पतालों के आसपास मौजूद 172 से ज्यादा खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की गई। 159 खाद्य नमूने जांच के लिए भेजे गए, करीब 1500 किलो खाद्य सामग्री मौके पर नष्ट कराई गई और 90 कैंटीन व खाद्य प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस दिए गए।
जयपुर में अस्पतालों की कैंटीन से दाल, तेल और पनीर के नमूने
जयपुर में खाद्य सुरक्षा टीमों ने कई बड़े अस्पतालों की कैंटीन और आसपास के खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की। प्रताप नगर स्थित आरयूएचएस अस्पताल की कैंटीन से चना दाल और रिफाइंड सोयाबीन तेल के नमूने लिए गए।
इसके बाद सीतापुरा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल की कैंटीन में मरीजों और उनके परिजनों के लिए तैयार हो रही सब्जी की ग्रेवी और पनीर का नमूना लिया गया। वहीं प्रताप नगर स्थित नारायणा अस्पताल से पनीर का नमूना लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया।
खाद्य सुरक्षा टीमों ने अस्पतालों में सिर्फ खाद्य पदार्थों के नमूने ही नहीं लिए, बल्कि रसोई की सफाई, खाद्य सामग्री के भंडारण, कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता, पेयजल और कच्चे-पके भोजन को रखने की व्यवस्था भी जांची।
यूनिवर्सिटी की मैस में पैकेट पर तारीख ही गायब
भोजन की गुणवत्ता को लेकर मिली शिकायत के बाद एक निजी यूनिवर्सिटी की मैस की रसोई भी जांच के घेरे में आई। निरीक्षण के दौरान कुछ खाद्य पदार्थों के पैकेट पर पैकिंग डेट और एक्सपायरी डेट अंकित नहीं मिली।
रसोई की सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई। गुणवत्ता पर संदेह होने पर टीम ने पनीर का नमूना जांच के लिए लिया और सफाई व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए।
अस्पताल के बाहर भी करीब दो दर्जन ढाबे और फूड स्टॉल जांचे
जयपुर द्वितीय की टीम ने अस्पतालों के बाहर संचालित करीब दो दर्जन ढाबों और फूड स्टॉल्स का भी निरीक्षण किया। संचालकों को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता बनाए रखने, सफाई रखने और तेल को बार-बार गर्म करके इस्तेमाल नहीं करने के निर्देश दिए गए।
30 सितंबर तक चलेगा अभियान
शुद्ध आहार-मिलावट पर वार अभियान के तहत यह विशेष निरीक्षण और नमूनीकरण अभियान 24 से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा।
विभाग के मुताबिक अस्पतालों के अंदर और आसपास मरीजों व तीमारदारों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षित भंडारण पर विशेष नजर रखी जा रही है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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