जयपुर सिटी बसों के डीजल बिलों में गड़बड़ी, 6 कर्मचारी सस्पेंड, एमडी बोले- ठेकेदारों का मामला, निगरानी पर सवाल

Raghvendra Singh Rathore | Oct 19, 2026, 17:21 IST
जयपुर JCTSL डीजल बिल विवाद: 6 कर्मचारी सस्पेंड, एमडी नारायण सिंह का बयान
जयपुर के JCTSL सांगानेर डिपो में बसों के रिकॉर्ड में लापरवाही मिलने पर छह कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है। डीजल बिलों में गड़बड़ी के आरोप भी सामने आए हैं। द सूत्र से बातचीत में एमडी नारायण सिंह ने डीजल की व्यवस्था ठेकेदारों के जिम्मे बताई। डिपो मैनेजर ने उच्च स्तर से बात नहीं करने के निर्देश मिलने की जानकारी दी।

जयपुर में सिटी बसों के संचालन और डीजल के हिसाब को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (JCTSL) के सांगानेर डिपो में जांच के बाद छह कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है। डिपो मैनेजर को भी कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है।



जांच में सामने आया कि बसों के आने-जाने और खराब होने का रिकॉर्ड नियमित रूप से नहीं भरा जा रहा था। कुछ रिकॉर्ड पर जिम्मेदार अधिकारियों के प्रमाणित हस्ताक्षर भी नहीं थे। इसी बीच सांगानेर और टोडी डिपो की बसों में डीजल खत्म होने और बिल में दिखाई गई मात्रा से कम डीजल भरने के आरोप भी सामने आए हैं।



द सूत्र ने इस पूरे मामले में JCTSL के प्रबंध निदेशक नारायण सिंह और सांगानेर डिपो मैनेजर गिरिराज प्रसाद मंगल से बात की। दोनों अधिकारियों ने अपना पक्ष रखा है।



एमडी बोले- डीजल ठेकेदार भरते हैं, बिलों का मामला भी उन्हीं का

JCTSL के प्रबंध निदेशक नारायण सिंह ने द सूत्र से बातचीत में बताया कि सिटी बसों में डीजल भरने की व्यवस्था निजी ठेकेदारों के पास है। डीजल भरने और उसके बिलों से जुड़ा काम भी ठेकेदार ही देखते हैं। नारायण सिंह के अनुसार, डीजल के बिलों में जो अंतर सामने आया है, वह ठेकेदारों का आंतरिक मामला है। JCTSL प्रशासन की इसमें सीधी भूमिका नहीं है।



उन्होंने बताया कि निजी एजेंसियों को बसों से जुड़े काम ठेके पर दिए गए हैं। बसों में डीजल ठेकेदार ही भरते हैं और JCTSL उन्हें बिलों के आधार पर भुगतान करता है। नारायण सिंह ने कहा कि JCTSL की जिम्मेदारी बसों के संचालन, साफ-सफाई और मेंटेनेंस की निगरानी से जुड़ी है।



डिपो मैनेजर को नोटिस क्यों? एमडी ने बताई वजह

सांगानेर डिपो मैनेजर को नोटिस देने के सवाल पर नारायण सिंह ने बताया कि इस मामले में किसी वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका सामने नहीं आई है। उनके अनुसार, डिपो में चल रहे कामों की निगरानी करना मैनेजर की जिम्मेदारी है। इसी जिम्मेदारी को लेकर उन्हें नोटिस दिया गया है।



ऐसे में सवाल यह भी है कि यदि डीजल भरने और उसके बिलों की जिम्मेदारी ठेकेदारों की है, तो डिपो स्तर पर डीजल की खपत और बसों के रिकॉर्ड की जांच किस तरह होती है।



डिपो मैनेजर बोले- ऊपर से बात नहीं करने के निर्देश

द सूत्र ने सांगानेर डिपो मैनेजर गिरिराज प्रसाद मंगल से भी संपर्क किया। उन्होंने बताया कि इस मामले में उन्हें उच्च स्तर से किसी से बातचीत नहीं करने के निर्देश मिले हैं।



छह कर्मचारियों पर कार्रवाई, जानिए किसे किया सस्पेंड

सांगानेर डिपो में जांच के बाद छह कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है। इनमें रूपचंद यादव, रघुबीर सिंह, रामवीर, शोभाराम, टीकमचंद लखकर और बजरंग शामिल हैं।



निलंबन के दौरान इन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता मिलेगा। इनका मुख्यालय बगराना डिपो तय किया गया है। जांच में बसों के आने-जाने का रजिस्टर और ब्रेकडाउन रजिस्टर नियमित रूप से नहीं भरे जाने की बात सामने आई थी। मूवमेंट रजिस्टर में प्रमाणित हस्ताक्षर नहीं मिलने पर भी सवाल उठे। इन खामियों को कर्मचारियों की ड्यूटी में लापरवाही माना गया है।



रास्ते में बंद हो रही थीं बसें, यात्रियों को परेशानी

सांगानेर और टोडी डिपो से चलने वाली बसों में डीजल खत्म होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इसके अलावा बसों के एसी और गियर में खराबी के कारण बीच रास्ते बंद होने की शिकायतें हैं। इससे यात्रियों को अपनी मंजिल तक पहुंचने में परेशानी होती है।



सवाल यह है कि बसों की नियमित जांच और डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय है। यदि बसों में पर्याप्त डीजल नहीं भरा जा रहा था, तो इसकी जानकारी समय रहते संबंधित अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची?



ठेकेदार भरते हैं डीजल, JCTSL करता है भुगतान, अब बिलों की जांच पर सवाल

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल डीजल के बिलों और भुगतान की व्यवस्था को लेकर है। JCTSL के एमडी के अनुसार, डीजल भरने और उससे जुड़े बिलों का काम निजी ठेकेदार करते हैं। वहीं, JCTSL उन्हें बिलों के आधार पर भुगतान करता है।



ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि भुगतान से पहले बिलों की जांच किस स्तर पर होती है। क्या बसों में भरे गए डीजल की मात्रा, तय रूट पर चली दूरी और वास्तविक खपत का मिलान किया जाता है?



अब सबसे बड़ा सवाल- ठेकेदारों के काम की निगरानी कौन करेगा?

सिटी बसों का संचालन आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ा है। बसों का बीच रास्ते बंद होना यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनता है। इस मामले में JCTSL ने रिकॉर्ड में लापरवाही मिलने पर कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। वहीं, प्रबंध निदेशक ने डीजल के बिलों को ठेकेदारों का आंतरिक मामला बताया है।



अब यह देखना जरूरी होगा कि ठेकेदारों के काम की निगरानी कैसे होती है और बिलों में किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर उसकी जांच और जिम्मेदारी तय करने की क्या व्यवस्था है। इसके लिए डीजल सप्लाई का रिकॉर्ड, ठेके की शर्तें और भुगतान से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।



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