रेडियो कॉलर से होगी तेंदुओं की रियल-टाइम ट्रैकिंग, इंसानी बस्तियों में घुसपैठ पर लगेगा अंकुश

Ashish Bhardwaj | Mar 01, 2026, 11:29 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान की राजधानी जयपुर के झालाना रिजर्व में तेंदुओं को रेडियो कॉलर लगाया जाएगा। तेंदुओं के जंगल से आबादी क्षेत्र में आने के बाद वन विभाग ने यह निर्णय लिया है।

News In Short

  • जयपुर के झालाना लेपर्ड रिजर्व में तेंदुओं को रेडियो कॉलर लगाया जाएगा
  • तेंदुओं के जंगल से आबादी क्षेत्र में घुसने की घटनाओं के बाद लिया निर्णय।
  • रेडियो कॉलर से तेंदुओं की पल-पल की लोकेशन मिलेगी वन विभाग को।
  • जयपुर के झालाना रिजर्व में वर्तमान में करीब 40 तेंदुए हैं।
  • तेंदुओं को रेडियो कॉलर लगाने का प्रयोग राजस्थान में पहली बार होगा।

News In Detail

Jaipur: राजस्थान में जयपुर के झालाना लेपर्ड रिजर्व के तेंदुओं की गतिविधियों पर अब वन विभाग 'तीसरी आंख' से नजर रखेगा। घनी आबादी और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव को रोकने के लिए झालाना में तेंदुओं को रेडियो कॉलर से लैस किया जाएगा। इससे उनकी पल-पल की लोकेशन वन विभाग के कंट्रोल रूम में लाइव देखी जा सकेगी।



​इसलिए पड़ी रेडियो कॉलर की जरूरत

​झालाना लेपर्ड रिजर्व वर्तमान में करीब 40 लेपर्ड्स का घर है। यह जंगल चारों तरफ से रिहायशी इलाकों से घिरा हुआ है। पिछले कुछ समय से तेंदुओं के जंगल सीमा लांघकर आबादी क्षेत्रों में घुसने की घटनाएं बढ़ी हैं। पिछले एक साल में ऐसे लगभग एक दर्जन मामले सामने आए हैं, जिनसे स्थानीय निवासियों में दहशत का माहौल बना रहता है।


​इन्हीं चुनौतियों से निपटने और वन्यजीवों व इंसानों, दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के


लिए विभाग ने रेडियो कॉलर तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया है।



​कैसे काम करेगी यह तकनीक

​रेडियो कॉलर एक बेल्ट की तरह होता है, जिसे लेपर्ड के गले में बांधा जाता है। इसमें लगे GPS ट्रांसमीटर के जरिए:



​24 घंटे निगरानी: लेपर्ड की लोकेशन और उसकी गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा सकेगी।



​अर्ली वार्निंग सिस्टम: जैसे ही कोई रेडियो कॉलर वाला लेपर्ड जंगल की सीमा छोड़कर आबादी की ओर बढ़ेगा, सिस्टम अलर्ट जारी कर देगा।



​त्वरित रेस्क्यू: लोकेशन की सटीक जानकारी होने से वन विभाग की फील्ड टीम समय रहते मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू या भीड़ नियंत्रण की कार्रवाई कर सकेगी।



​प्रदेश में पहली बार अनूठी पहल

वन अधिकारियों के अनुसार राजस्थान में लेपर्ड्स के संरक्षण और प्रबंधन के लिए रेडियो कॉलर का प्रयोग पहली बार किया जा रहा है। इस महीने इस प्रोजेक्ट का ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा। स़ूत्रों का कहना है कि झालाना में सबसे पहले उस लेपर्ड को रेडियो कॉलर पहनाया जाएगा, जिसकी आबादी क्षेत्र में घुसपैठ करने की प्रवृत्ति सबसे अधिक है। यह प्रयोग सफल रहता है तो इसे प्रदेश के अन्य संवेदनशील वन क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा।



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