जयपुर मुहाना मंडी में सचिव पर गंभीर आरोप, पत्नी और बेटे के नाम वाले भूखंडों का आवंटन भी निरस्त

Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 18, 2026, 11:30 IST
मंडी सचिव पर गंभीर आरोप
जयपुर की मुहाना मंडी के सचिव मनोहर लाल गुप्ता पर पत्नी और बेटे से जुड़ी फर्मों को लाभ पहुंचाने और पद के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। शर्तें पूरी नहीं होने पर 2021 में 18 भूखंडों का आवंटन निरस्त हुआ, लेकिन व्यापारियों का आरोप है कि कब्जा वापस लेने की कार्रवाई नहीं की गई। क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक की जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी कार्रवाई का इंतजार है।

जयपुर की मुहाना मंडी के सचिव मनोहर लाल गुप्ता एक बार फिर विवादों में हैं। मंडी में भूखंड आवंटन से जुड़े मामले में उन पर अपने परिवार के सदस्यों को फायदा पहुंचाने और पद का दुरुपयोग करने के आरोप लगे हैं। मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि जिन 18 कृषि प्रसंस्करण इकाइयों के भूखंडों का आवंटन निरस्त किया गया था, उनमें दो भूखंड सचिव के बेटे और पत्नी से जुड़ी फर्मों के नाम पर हैं। आरोप है कि आवंटन निरस्त होने के बावजूद इन भूखंडों का कब्जा वापस नहीं लिया गया।



23 भूखंड आवंटित, 18 का आवंटन निरस्त

कृषि विपणन विभाग की कृषि प्रसंस्करण एवं कृषि व्यवसाय प्रोत्साहन नीति-2010 के तहत मंडी यार्ड में 23 कृषि प्रसंस्करण इकाइयों के लिए भूखंड आवंटित किए गए थे। आवंटन की शर्तों का पालन नहीं होने पर तत्कालीन मंडी प्रशासक आशु चौधरी ने 9 जून 2021 को इनमें से 18 भूखंडों का आवंटन निरस्त कर दिया था।



इनमें भूखंड संख्या ए-10-ए भी शामिल है, जो आयुष ट्रेड विजन प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित किया गया था। इस कंपनी में मंडी सचिव के बेटे उदित मनोहर निदेशक हैं। कंपनी को फल-सब्जियों के जूस, डिहाइड्रेशन और मुरब्बा बनाने की यूनिट लगानी थी। लेकिन वर्ष 2020 तक यूनिट नहीं लगने पर कृषि विपणन विभाग ने कई नोटिस जारी किए। इसके बाद भूखंड का आवंटन निरस्त कर दिया गया।



पत्नी की फर्म का भूखंड भी निरस्त

इसी नीति के तहत मैसर्स साग भाजी फूड्स को भूखंड संख्या डी-5 आवंटित किया गया था। इस फर्म में सचिव की पत्नी स्नेहलता गुप्ता साझेदार हैं। 16 दिसंबर 2020 को यूनिट नहीं लगाने पर फर्म को आरोप पत्र दिया गया था। वहीं, 15 फरवरी 2021 को जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि फर्म ने व्यावसायिक निर्माण शुरू नहीं किया। इसके बाद 9 जून 2021 को इस भूखंड का आवंटन भी निरस्त कर दिया गया।



दो साल बाद भी नहीं मिला कब्जा

नियमों के मुताबिक, आवंटन निरस्त होने के बाद मंडी समिति को भूखंडों का कब्जा वापस लेना था। इसके लिए बिजली कनेक्शन काटने को डिस्कॉम प्रबंधन से संपर्क करने और कर्ज देने वाले बैंकों को सूचना देने जैसी कार्रवाई की जानी थी। व्यापारियों का आरोप है कि मंडी प्रशासन ने इस दिशा में जरूरी कदम नहीं उठाए। आवंटियों ने विभाग के निदेशक के समक्ष अपील भी की, लेकिन इन अपीलों पर कोई स्थगन आदेश नहीं होने के बावजूद भूखंडों का कब्जा वापस नहीं लिया गया।



वसूली और व्यापारियों को परेशान करने के भी आरोप

मंडी व्यापारियों ने सचिव पर पद का दुरुपयोग करने और अपने रिश्तेदार रमेश कूलवाल के जरिए कथित तौर पर चौथ वसूली कराने के आरोप भी लगाए हैं। इसके अलावा, सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ब्रह्म सिंह को मंडी यार्ड के सी-ब्लॉक का प्रभारी बनाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। व्यापारियों का आरोप है कि उनके जरिए भी उन्हें परेशान किया जाता है।



जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई का इंतजार

शिकायतों के आधार पर राज्य सरकार ने 2 मार्च 2023 को मनोहर लाल गुप्ता को एपीओ किया था। हालांकि, उन्होंने ट्रिब्यूनल से स्थगन आदेश हासिल कर लिया और 22 मार्च 2023 से दोबारा सचिव का पद संभाल लिया।



हाल ही में क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक, जयपुर महिपाल सिंह ने मामले की जांच कर रिपोर्ट कृषि विपणन विभाग को सौंप दी। रिपोर्ट में सचिव के परिजनों के नाम पर भूखंड होने की बात भी सामने आई है। इसके बावजूद रिपोर्ट सौंपे जाने के एक महीने बाद तक कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि विभाग इन आरोपों और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे क्या कदम उठाता है।



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