नगर निगम चुनाव में 80% से ज्यादा पुराने चेहरे हटाए, 9 पार्षदों ने बदल ली अपनी पार्टी
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर निकाय चुनाव में नए चेहरों पर दांव।
- 250 पुराने पार्षदों में सिर्फ 43 को टिकट।
- भाजपा-कांग्रेस ने 207 पुराने चेहरे बदले।
- परिसीमन और नाराजगी बनी टिकट कटने की वजह।
- दोनों दलों ने युवा चेहरों को दी जगह।
राजस्थान के जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 के लिए टिकट वितरण और नामांकन पूरा होने के साथ ही यह साफ हो गया है कि इस बार मुकाबला ज्यादातर नए चेहरों के दम पर लड़ा जाएगा। साल 2020 के चुनाव में जीतने वाले 250 पार्षदों में से इस बार रिकॉर्ड 82.8 प्रतिशत यानी 207 पार्षदों को चुनावी मैदान से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों ने अपनी सूची में जीते हुए पुराने चेहरों के बजाय नए उम्मीदवारों पर सबसे बड़ा भरोसा जताया है।
250 में से सिर्फ 43 को मिला दोबारा टिकट
2020 में जयपुर ग्रेटर और हेरिटेज नगर निगम के सभी 250 विजेताओं में से इस बार सिर्फ 43 पुराने विजेता ही दोबारा टिकट हासिल कर सके हैं। इनमें से 28 भाजपा और 15 कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। यानी पांच साल पहले जीतकर आए पार्षदों में से करीब 83 फीसदी चेहरे इस बार दोनों प्रमुख दलों की सूची में नजर नहीं आ रहे।
भाजपा-कांग्रेस दोनों का रुख लगभग समान
भाजपा के 139 विजेता पार्षदों में से इस बार सिर्फ 24 को टिकट मिला, यानी करीब 82.7 प्रतिशत पुराने विजेताओं का टिकट कट गया। वहीं कांग्रेस के 88 विजेताओं में से भी सिर्फ 16 को दोबारा मौका मिला, यानी करीब 81.8 प्रतिशत टिकट कटे। इस तरह टिकट काटने के मामले में दोनों प्रमुख दलों का रुख लगभग एक जैसा रहा। 2020 में निर्दलीय जीतने वाले 23 पार्षदों में से भी सिर्फ तीन को इस बार भाजपा-कांग्रेस का टिकट मिल सका।
इन आंकड़ों के मुताबिक कुल 250 पुराने विजेताओं में से सिर्फ 17.2 प्रतिशत ही इस बार दोबारा टिकट हासिल कर सके हैं।
9 पार्षदों ने बदल ली अपनी पार्टी
पुराने विजेताओं में कुछ ऐसे चेहरे भी हैं, जो इस बार दूसरे दल के टिकट पर मैदान में हैं। इनमें से 4 कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए हैं, जबकि 2 भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए हैं। इसके अलावा 2020 में निर्दलीय जीतने वाले 3 पार्षदों में से 2 भाजपा और 1 कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। इस तरह कुल मिलाकर 9 पुराने विजेता इस बार अपनी पुरानी पार्टी या पहचान बदलकर मैदान में हैं।
आखिर क्यों कटे इतने पुराने टिकट
इतनी बड़ी संख्या में टिकट कटने के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। सबसे बड़ी वजह वार्डों का परिसीमन और पुनर्गठन है। जयपुर ग्रेटर और हेरिटेज नगर निगम को मिलाकर वार्डों की संख्या 250 से घटाकर 150 कर दी गई है, जिससे पुराने और नए वार्ड नंबरों के साथ-साथ उनके भौगोलिक समीकरण भी पूरी तरह बदल गए हैं। कई पुराने पार्षदों के मजबूत वोट बैंक वाले इलाके दूसरे वार्डों में चले गए, जिससे उनकी दावेदारी कमजोर पड़ गई।
जनता की नाराजगी और कार्यकर्ताओं का दबाव भी वजह
पांच साल के कार्यकाल के बाद स्थानीय स्तर पर पार्षदों के खिलाफ जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी का जोखिम भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। इसी वजह से दोनों प्रमुख दलों ने साफ और नई छवि पेश करने के लिए पुराने चेहरों की जगह नए उम्मीदवारों पर भरोसा जताया। इसके अलावा संगठन के भीतर लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं को मौका देने का भी भारी दबाव था। टिकट न बदलने की सूरत में अंदरूनी बगावत का खतरा भी बना हुआ था।
ये खबर भी पढे़:-
राजस्थान हाई कोर्ट: छत्तीसगढ़ के जस्टिस संजय के. अग्रवाल होंगे नए सीजे
बैंक अधिकारी बनकर OTP, पैन और CVV चुराने वाला साइबर सिंडिकेट ध्वस्त, 64 गिरफ्तार
जयपुर निकाय चुनाव 2026: कांग्रेस ने जारी की सभी 150 वार्डों की सूची; जानें प्रत्याशी
नाथद्वारा में AAP का बड़ा दांव, किन्नर समुदाय से उतारा उम्मीदवार