खजाने को स्कूटी पर ले गए थे, सिक्के बेचकर की बेटी की शादी, खरीदे ट्रैक्टर-जेसीबी

Jageshwar prasad | Aug 10, 2026, 12:55 IST
200 साल पुरानी हवेली में मिला खजाना, चांदी के 1500 सिक्के और 66 किलो सिल्लियां
जयपुर की 200 साल पुरानी हवेली तोड़ते समय मिले खजाने को ठेकेदार और मजदूरों ने आपस में बांट लिया था। बंटवारे को लेकर हुए विवाद के बाद मामला खुला और पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • जयपुर की 200 साल पुरानी हवेली में मिला करोड़ों का खजाना।
  • खजाने में चांदी की 66 किलो की 2 सिल्लियां और 1500 सिक्के थे।
  • खजाने को स्कूटी पर लादकर ले गए थे मजदूर और ठेकेदार।
  • राज न खुले इसलिए जामडोली के जंगल में गाड़ा माल।
  • आपसी बंटवारे में हुई बेईमानी तो फूटा भांडा, 5 आरोपी गिरफ्तार।

जयपुर के त्रिपोलिया बाजार में 200 साल पुरानी हवेली तोड़ते समय मजदूरों को करोड़ों का खजाना मिला था। हवेली तोड़ने का काम शुरू होने के 10वें दिन चांदी की 2 बड़ी सिल्लियां और 1500 चांदी के सिक्के मिले थे।



ठेकेदार और मजदूरों ने मिलकर यह खजाना आपस में बांट लिया। एक मजदूर ने अपने हिस्से के सिक्के बेचकर बेटी की शादी कर दी, तो ठेकेदार ने ट्रैक्टर और जेसीबी खरीद ली। बंटवारे को लेकर हुए विवाद के बाद मामला खुला और पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।



कैसे मिला खजाना?

राहुल सेठी की 200 साल पुरानी हवेली का 450 वर्गगज हिस्सा जर्जर हो चुका था। नगर निगम के नोटिस के बाद उन्होंने हवेली तोड़ने का ठेका महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू को 4 लाख रुपए में दिया। नवंबर 2025 में काम शुरू हुआ।



करीब 10 दिन बाद मजदूरों को चांदी की बड़ी सिल्ली मिली। खुदाई जारी रखने पर एक और सिल्ली और बड़ी संख्या में चांदी के सिक्के मिले। कुल मिलाकर 66 किलो चांदी (दो सिल्लियां) और 1500 सिक्के निकले।



चांदी की 66 किलो की 2 सिल्लियां

खजाने को कैसे छुपाया?

मजदूरों और ठेकेदार ने मिलकर खजाना आपस में बांटने का प्लान बनाया। उन्होंने तय किया कि किसी को शक न हो, इसलिए रोजाना काम करते रहेंगे। शाम को अंधेरा होने पर वे खजाने को स्कूटी पर रखकर जामडोली के जंगल में ले गए।



वहां पांचों ने 300-300 सिक्के बांट लिए। दोनों चांदी की सिल्लियों (31 किलो और 35 किलो) को जंगल में गड्ढा खोदकर दबा दिया, क्योंकि उन्हें 2-3 साल बाद बांटने का फैसला किया था।



200 साल पुरानी हवेली में मिला खजाना, चांदी के 1500 सिक्के और 66 किलो सिल्लियां


खजाना कैसे खर्च हुआ?

ठेकेदार महेश मल्होत्रा: उसने एक मजदूर (अनुज) के 300 सिक्के अपने पास रखकर उसे 50 हजार रुपए दिए। बाकी सिक्के बेचकर 4.50 लाख रुपए में 2 ट्रैक्टर खरीदे और कुछ पैसे देकर सेकंड-हैंड जेसीबी का एग्रीमेंट कर लिया।



मजदूर जगदीश: उसने अपने सिक्के बेचकर करीब 20 लाख रुपए खर्च किए। इनमें से 9 लाख रुपए सिक्कों से मिले थे, जिससे उसने होमगार्ड में तैनात अपनी बेटी की शादी कर दी।



मजदूर रजनी: उसने अपने सिक्के बेचकर अपने लिए गहने बनवा लिए।



खजाने का राज कैसे खुला?

बंटवारे को लेकर आपस में विवाद हो गया। मजदूर अनुज को पता चला कि ठेकेदार छोटू ने उसके और अन्य साथियों के सिक्के बेचकर लाखों रुपए कमाए हैं। जब अनुज ने अपने हिस्से के और पैसे मांगे तो छोटू ने कहा कि हवेली मालिक को खजाने के बारे में पता चल गया है, इसलिए सब कुछ वापस करना पड़ेगा।



इस पर अनुज ने सीधे हवेली मालिक राहुल सेठी से संपर्क किया और पूरी बात बता दी। करीब 10 महीने बाद यह राज खुल गया। इसके बाद मालिक ने माणक चौक थाने में मामला दर्ज करवाया।



पुलिस ने क्या कार्रवाई की?

पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है जिसमें महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू (ठेकेदार), जगदीश राजोरिया (मजदूर), ओमप्रकाश खींची उर्फ पप्पू (मजदूर), अनुज अरोड़ा (मजदूर) और रजनी मल्होत्रा (मजदूर) शामिल हैं।



पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 66 किलो 400 ग्राम चांदी बरामद की है। अब पुलिस चांदी के सिक्के खरीदने वालों की तलाश कर रही है, क्योंकि आरोपियों ने सिक्के जयपुर से बाहर बेचे हैं। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश कर दोबारा रिमांड पर लिया जाएगा।



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