4 करोड़ का सिस्टम फिर भी कटला जला: बाजार बंद, व्यापारियों ने पूछा- टैक्स लेते तो सुरक्षा कहां?
5 पॉइंट में समझें पूरा मामला
- जयपुर में पुरोहित जी का कटला में लगी आग का मामला।
- शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व्यापारियों से मिले।
- चार करोड़ के फायर सिस्टम पर व्यापारियों ने उठाए सवाल।
- एक दिन पहले लगी आग में 20 से अधिक दुकानें जलकर खाक।
- सेठी कॉम्प्लेक्स में फायर एनओसी भी नहीं ली गई थी।
जयपुर के पुरोहित जी का कटला में आग बुझ चुकी है, लेकिन अब सवालों की आग भड़क रही। करीब 20 से 25 दुकानें पूरी तरह जलकर खाक हुईं। करोड़ों रुपए का सामान जलने की आशंका है। शुक्रवार को बाजार बंद रहा। जली दुकानें और बंद शटर हादसे की तस्वीर बता रहे थे।
व्यापारियों का गुस्सा फायर सेफ्टी और जयपुर नगर निगम के खिलाफ है। उनका सवाल है कि जब परकोटे में आग से निपटने के लिए करीब 4 करोड़ रुपए का फायर हाइड्रेंट सिस्टम बनाया गया था, तो गुरुवार को इसकी मदद क्यों नहीं मिली?
गहलोत बोले- फायर सिस्टम की कमी बड़ी लापरवाही, NOC की हो जांच
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पुरोहित जी का कटला पहुंचकर आग से प्रभावित व्यापारियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि पुराने बाजार में फायर फाइटिंग सिस्टम को पूरी तरह चालू और दुरुस्त रखना नगर निगम की जिम्मेदारी थी और इसमें कमी रहना बड़ी लापरवाही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार राजनीतिक दबाव में फायर NOC जारी कर दी जाती है और सरकार से आसपास की इमारतों की NOC की दोबारा निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। गहलोत ने SDRF और फायर टीम के राहत कार्य की सराहना करते हुए कहा कि बाजार खुला होता तो हादसा और गंभीर हो सकता था।
उन्होंने प्रभावित व्यापारियों को राहत दिलाने के लिए सरकार से बीमा कंपनियों के साथ समन्वय करने, नुकसान की निष्पक्ष जांच कराने और व्यापारियों की हरसंभव मदद करने की मांग भी की।
व्यापारी बोले- टैक्स देते, सुरक्षा कहां?
कटला बाजार अध्यक्ष प्रणव मेहंदीरत्ता ने द सूत्र से बातचीत में व्यापारियों की नाराजगी बताई। उन्होंने कहा कि व्यापारी स्मार्ट सिटी के लिए यूडी टैक्स दे रहे। दूसरे टैक्स और जीएसटी भी चुकाते। इसके बावजूद जरूरत के समय उन्हें मदद नहीं मिलती। व्यापारियों का सवाल है कि जब उनसे टैक्स लिया जाता, तो इतने बड़े कारोबारी बाजार में आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं? आग के बाद बाजार में यह सवाल सबसे ज्यादा सुनाई दिया।
कटला बाजार की 20 से ज्यादा दुकानें जलकर खाक हुईं
सेठी कॉम्प्लेक्स में गुरुवार सुबह करीब 7 बजे आग लगी थी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक आग ऊपरी हिस्से की किसी दुकान या गोदाम के आसपास से फैली। यहां कपड़े, प्लास्टिक, कॉस्मेटिक और लाख की चूड़ियों जैसे सामान का कारोबार होता है। ज्वलनशील सामान होने के कारण आग तेजी से आसपास की दुकानों तक पहुंच गई। हादसे में करीब 20 से 25 दुकानों को नुकसान हुआ है। राहत की बात रही कि सुबह बाजार पूरी तरह खुला नहीं था। इसलिए कोई जनहानि नहीं हुई।
सात घंटे चला आग बुझाने का काम
पुरोहित जी का कटला में आग पर काबू पाने में दमकल टीम को करीब सात घंटे लगे। सबसे बड़ी परेशानी बाजार की संकरी गलियां बनीं। दमकल की बड़ी गाड़ियां सीधे सेठी कॉम्प्लेक्स तक नहीं पहुंच सकीं। ऐसे में मुख्य रास्ते से लंबी पाइप बिछाकर घटनास्थल तक पानी पहुंचाया गया। निजी पानी के टैंकरों की भी मदद लेनी पड़ी। दमकलकर्मियों ने कॉम्प्लेक्स से पांच कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी सुरक्षित बाहर निकाले।
3.90 करोड़ के फायर हाईट्रेंड सिस्टम पर सवाल
इस अग्निकांड के बाद सबसे बड़ा सवाल परकोटे में लगाए गए फायर हाइड्रेंट सिस्टम पर उठ रहा। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक जयपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने 2020 में परकोटे और पुरोहित जी का कटला क्षेत्र के लिए फायर फाइटिंग सिस्टम का टेंडर निकाला था। एक साल में इसका काम पूरा हुआ था और 2023 में इसे हेरिटेज निगम को सौंप भी दिया गया था। इसे बनाने में करीब 4 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। इसके बावजूद चार साल बाद सिस्टम के पूरी तरह चालू और प्रभावी होने पर सवाल उठ रहे।
इस सिस्टम में करीब सात किलोमीटर लंबी पाइपलाइन है। करीब 2.10 लाख लीटर पानी रखने के लिए टैंक बनाए गए। अलग-अलग जगह हाइड्रेंट लगाए गए। पुरोहित जी का कटला में ही 14 हाइड्रेंट होने की बात सामने आई है। व्यापारियों ने कुछ जगह वाल्व और कपलिंग की हालत पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों की तकनीकी जांच जरूरी है।
जिस काम के लिए फायर सिस्टम बना, वही नहीं हुआ?
यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि फायर हाइड्रेंट सिस्टम परकोटे की संकरी गलियों को ध्यान में रखकर ही तैयार किया गया था। इन इलाकों में बड़ी दमकल गाड़ियों का पहुंचना मुश्किल है। ऐसे में हाइड्रेंट के जरिए आग लगने वाली जगह के पास ही पानी उपलब्ध कराने की योजना थी।
गुरुवार को आग लगी तो फिर वही पुरानी परेशानी सामने आई। दमकल की गाड़ियां कॉम्प्लेक्स तक नहीं पहुंचीं। फायर टीम को लंबी पाइप बिछाकर पानी पहुंचाना पड़ा। अब व्यापारी पूछ रहे हैं कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी जरूरत के समय सिस्टम का फायदा क्यों नहीं मिला?
फायर NOC की भी होगी जांच
सेठी कॉम्प्लेक्स की फायर एनओसी और वहां लगे सुरक्षा उपकरण भी जांच के दायरे में आ गए। माणक चौक थाना पुलिस के मुताबिक यह देखा जाएगा कि संबंधित प्रतिष्ठानों के पास जरूरी फायर एनओसी थी या नहीं। मौके पर मौजूद फायर सेफ्टी उपकरणों के काम नहीं करने की शिकायत भी सामने आई।
किशनपोल विधायक अमीन कागजी ने परकोटे में जारी फायर एनओसी की दोबारा जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि लंबे समय से फायर सेफ्टी सिस्टम का निरीक्षण नहीं हुआ। हालांकि इसकी पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही होगी।
सघन बाजार में छह साल में तीसरी बड़ी आग
पुरोहित जी का कटला में छह साल के भीतर यह तीसरी बड़ी आग बताई जा रही है। जुलाई 2020 में भी यहां आग लगी थी। इसके बाद अक्टूबर 2022 में दीपावली से पहले बाजार में बड़ा अग्निकांड हुआ। अब सितंबर 2026 में एक बार फिर आग ने व्यापारियों को भारी नुकसान पहुंचाया है। बार-बार हो रही घटनाओं के बाद अब सवाल यह भी है कि पिछली आग के बाद किए गए सुरक्षा सुधार जमीन पर कितने कारगर साबित हुए?
व्यापारियों ने रखीं चार बड़ी मांगें
जयपुर व्यापार महासंघ ने अब फायर सेफ्टी व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई है। व्यापारियों का कहना है कि स्थायी फायर हाइड्रेंट और फायर लाइन हमेशा चालू रहनी चाहिए। पानी का पर्याप्त प्रेशर होना चाहिए। संकरी गलियों के लिए छोटी दमकल गाड़ियां उपलब्ध कराई जाएं। बाजारों का नियमित फायर ऑडिट भी हो।
आग की वजह अभी साफ नहीं
आग लगने की असली वजह अभी सामने नहीं आई है। शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है। लेकिन जांच पूरी होने तक इसे आग की पक्की वजह नहीं माना जा सकता। व्यापारियों को करोड़ों रुपए का नुकसान होने की आशंका है। हालांकि नुकसान का अंतिम आधिकारिक आंकड़ा अभी नहीं आया है। त्योहारी सीजन से पहले दुकानों और गोदामों में बड़ी मात्रा में माल रखा था। व्यापारियों का कहना है कि इसी वजह से आर्थिक नुकसान काफी ज्यादा हो सकता है।
पुरोहित जी का कटला में लगी आग बुझ गई है, लेकिन प्रशासन के सामने तीन बड़े सवाल छोड़ गई है। करीब चार करोड़ रुपए का फायर सिस्टम जरूरत के समय प्रभावी क्यों नहीं रहा? इसके रखरखाव और नियमित जांच की जिम्मेदारी किसकी थी? इतने बड़े कारोबारी बाजार में फायर एनओसी और सुरक्षा उपकरणों की आखिरी प्रभावी जांच कब हुई थी?
व्यापारियों के लिए अब मामला सिर्फ जली दुकानों और आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं। वे व्यवस्था से जवाब मांग रहे हैं। उनका सवाल साफ है कि जब सरकार टैक्स लेती है तो मुसीबत के वक्त सुरक्षा और मदद की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
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