जयपुर ग्रामीण सीट पर आयोग की अर्जी खारिज, लोकसभा चुनाव का है मामला

Mukesh Sharma | Jul 29, 2026, 14:32 IST
चुनाव आयोग को प्रार्थना पत्र
जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट के चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका में राजस्थान हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग का प्रार्थना पत्र खारिज किया। डाक मतपत्रों की संख्या में अंतर मुख्य विवाद है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • जयपुर ग्रामीण चुनाव याचिका पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
  • चुनाव आयोग को पक्षकार बनाए रखने का आदेश
  • जीत अंतर और कैंसिल वोटों पर उठा विवाद
  • राव राजेंद्र सिंह की जीत को दी गई चुनौती
  • े 1615 वोटों के अंतर पर कोर्ट ने जताई चिंता

जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट के नतीजों को चुनौती देने वाली याचिका पर राजस्थान हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। चुनाव आयोग ने खुद को पक्षकार से हटाने की मांग की थी। कोर्ट ने यह मांग खारिज कर दी। जस्टिस विनोद कुमार भारवानी ने कहा कि जीत का अंतर कैंसिल वोटों से कम है। इसलिए आयोग का पक्षकार बने रहना जरूरी है।



हाईकोर्ट ने क्या कहा

जस्टिस विनोद कुमार भारवानी ने चुनाव आयोग के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अनिल चौपड़ा और विजयी प्रत्याशी राव राजेंद्र सिंह के बीच जीत का अंतर सिर्फ 1615 वोटों का है।



कोर्ट के मुताबिक परिणाम वाले दिन रिटर्निंग ऑफिसर ने बताया था कि निरस्त डाक मतपत्रों की संख्या 1225 है। लेकिन आरटीआई से मिली जानकारी में यह संख्या 2738 बताई गई। दोनों जानकारी एक ही दिन की और चुनाव आयोग की ओर से ही दी गई थी।



विवाद की जड़ क्या है

निरस्त डाक मतपत्रों की संख्या में यह अंतर ही पूरे विवाद की जड़ है। जीत का अंतर इस अंतर से भी कम है। यही वजह है कि कोर्ट ने चुनाव आयोग को आवश्यक पक्षकार माना।



कोर्ट ने साफ कहा कि इस स्थिति में आयोग को मामले से अलग नहीं किया जा सकता। दोनों आंकड़ों में विसंगति की जिम्मेदारी आयोग की ही बनती है।



चुनाव आयोग की दलील

चुनाव आयोग ने अपनी याचिका में कहा था कि पीपल्स रिप्रजेंटेशन एक्ट-1951 के तहत उन्हें पक्षकार नहीं बनाया जा सकता। आयोग का कहना था कि विवाद सिर्फ दोनों प्रत्याशियों के बीच का है।



इसका विरोध कांग्रेस प्रत्याशी अनिल चौपड़ा के वकील संजय शर्मा ने किया। उनके अनुसार जीत का अंतर कैंसिल वोटों से कम होने के कारण आयोग का पक्षकार बने रहना जरूरी है। उनका कहना था कि विवाद का स्पष्टीकरण प्रत्याशियों को ही देना है, इसलिए यह तर्क आयोग पर भी लागू होता है।



चुनाव परिणाम के दिन क्या हुआ था

लोकसभा चुनाव के नतीजे 4 जून 2024 को घोषित हुए थे। उसी दिन कांग्रेस प्रत्याशी अनिल चौपड़ा ने परिणाम में धांधली का आरोप लगाया था। वे रिटर्निंग ऑफिसर के कमरे में धरने पर बैठ गए थे।



उनकी रिकाउंटिंग की मांग खारिज कर दी गई थी। केवल आंकड़ों को दोबारा जोड़ा गया था। राव राजेंद्र सिंह की जीत घोषित होने के बाद चौपड़ा मतगणना केंद्र से बाहर आए थे।



चौपड़ा ने क्या कहा था

बाहर आकर चौपड़ा ने अपने समर्थकों को संबोधित किया था। उनके अनुसार जनता के आशीर्वाद से उन्हें 6 लाख से ज्यादा वोट मिले थे। उन्होंने कहा था कि यह परिणाम उन्हें एक प्रतिशत भी स्वीकार नहीं है।



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