जयपुर धमाकों के गुनहगारों को राहत नहीं, उम्रकैद पर रोक लगाने से कोर्ट का इनकार
News In Short
- 2008 जयपुर ब्लास्ट मामले में आतंकियों को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत।
- आतंकियों के आजीवन कारावास की काट रहे है सजा।
- जयपुर बम धमाकों में 71 लोगों की मौत और 185 लोग घायल हुए थे।
- आतंकियों ने पहले बम धमाकों के मामलों में बरी होने का दिया हवाला।
- मामले की सुनवाई के दौरान सरकार ने मेल और अन्य साक्ष्य किए पेश।
News In Detail
2008 में जयपुर में हुए 8 सीरियल बम धमाकों की जांच से जुड़े मामले में बड़ी खबर आई है। इस मामले में आरोपित आतंकियों मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद की राजस्थान हाई कोर्ट में दायर स्टे एप्लीकेशन खारिज हो गई है। इसका मतलब यह है कि दोनों आतंकियों को फिलहाल राहत नहीं मिली है और उन्हें जेल में रहना पड़ेगा।
हाईकोर्ट का निर्णय
हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति इंद्रजीत सिंह और न्यायमूर्ति भुवन गोयल की बेंच ने इन दोनों आतंकियों की राहत की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि इन्हें अभी कोई राहत नहीं दी जा सकती। इस निर्णय के बाद आतंकियों को जेल में ही रहना पड़ेगा।
पहले क्या हुआ था?
2008 में 13 मई को जयपुर में हुए 8 सीरियल बम धमाकों में 71 लोगों की मौत हो गई थी और 185 लोग घायल हुए थे। इन धमाकों ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया था। 9वां बम चांदपोल बाजार के गेस्ट हाउस के पास मिला था, लेकिन फटने से 15 मिनट पहले इसे डिफ्यूज कर दिया गया था।
आतंकियों का बचाव: आरोप और तथ्य
आतंकियों ने अपनी ओर से दलील दी कि वे पहले भी 8 बम धमाके के मामलों में बरी हो चुके हैं। उनका कहना था कि जिन तथ्यों और सबूतों के आधार पर उन्हें पहले बरी किया गया था। उन्हीं के आधार पर इस मामले में भी उन्हें राहत मिलनी चाहिए थी। आतंकियों ने कहा कि लंबी समयावधि के बाद उनके खिलाफ फिर से आरोपों को प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
सरकार की तरफ से प्रस्तुत किए गए अतिरिक्त साक्ष्य
राजस्थान सरकार की ओर से पैरवी करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी, अधिवक्ता अमन अग्रवाल और नेहा गोयल ने कहा कि आतंकियों का मुख्य उद्देश्य आतंक फैलाना था। इन दोनों ने ब्लास्ट की जिम्मेदारी दो न्यूज चैनलों को मेल करके ली थी। इसके साथ ही सरकार ने इस केस से जुड़े अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिसमें मेल को रिकवर करने समेत अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल थे। इन साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने इन दोनों आतंकियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
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