सर्राफा बाजार में अनोखा प्रदर्शन, सुनारों ने दुकानों पर बेची झालमुड़ी
News In Short
- जैसलमेर के सुनारों ने झालमुड़ी बेचकर प्रधानमंत्री की अपील का किया विरोध।
- दुकानदारों ने दुकानों पर लगाए आज सोना नहीं, झालमुड़ी मिलेगी के पोस्टर।
- व्यापारियों का दावा, प्रधानमंत्री की अपील, बढ़ते दामऔर वैट के कारण बाजार ठप।
- दुकानदारों का कहना है कि अब पुश्तैनी धंधा बदलने की नौबत आ गई है।
News In Detail
जैसलमेर के ऐतिहासिक और आमतौर पर चमक-दमक से भरे रहने वाले सर्राफा बाजार से विरोध की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन गई है। अपनी कला और सोने के आभूषणों के लिए मशहूर यहां के सुनार शनिवार को एक अलग ही रूप में नजर आए।
सोने के काउंटरों पर सजी झालमुड़ी
दुकानों के काउंटरों पर कागज के दोने और झालमुड़ी के डिब्बे रखे दिखाई दिए। सर्राफा व्यापारी अमृत सोनी के नेतृत्व में कुछ दुकानदारों ने अपने शोरूम के बाहर बड़े-बड़े पोस्टर चिपका दिए, जिन पर आज सोना नहीं, झालमुड़ी मिलेगी लिखा था।
व्यापारियों ने दुकान पर आने वाले नियमित ग्राहकों और राहगीरों को बकायदा झालमुड़ी परोसकर अपना दर्द बयां किया। उनका कहना है कि यह किसी राजनीतिक दल के खिलाफ गुस्सा नहीं है, बल्कि यह एक मध्यमवर्गीय और पुश्तैनी व्यापारी की वह पीड़ा है जिसे सरकार तक पहुंचाना जरूरी हो गया था।
आखिर क्यों खाली पड़े हैं शोरूम?
व्यापारियों ने खाली पड़े शोरूम के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारणों को जिम्मेदार ठहराया है:
सरकारी अपील का असर: व्यापारियों का आरोप है कि सर्वोच्च स्तर से देशवासियों को सोने में निवेश कम करने या सोना न खरीदने की जो अपील की गई, उससे आम उपभोक्ता की मानसिकता बदल गई है और लोग सराफा बाजार आने से कतरा रहे हैं।
आसमान छूती कीमतें: सोने के भाव रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं, जिससे यह धातु मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों की पहुंच से पूरी तरह बाहर हो चुकी है।
टैक्स का भारी बोझ: वैट और अन्य करों की दरों के कारण आभूषण मेकिंग चार्ज और कुल कीमत बहुत ज्यादा बढ़ गई है, जिससे व्यापार की रफ्तार थम गई है।
कारीगरों और मजदूरों के पेट पर लात
बाजार के अन्य व्यापारियों ने भावुक होते हुए कहा कि वे पीढ़ियों से इस काम में लगे हैं और यही उनकी एकमात्र पहचान है। सर्राफा संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, यह बाजार सिर्फ चंद अमीर दुकानदारों का नहीं है, बल्कि इसके पीछे हजारों छोटे सोने के कारीगर, पॉलिश करने वाले मजदूर और छोटे कामगार जुड़े हैं। यदि शोरूम इसी तरह खाली रहे और बिक्री ठप रही, तो इन दैनिक मजदूरों के परिवारों के सामने सीधे तौर पर आजीविका और रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
इस पूरे मामले पर बाजार में आए ग्राहकों की राय भी बंटी हुई नजर आई। कुछ लोगों ने माना कि महंगाई के कारण उन्होंने शादियों की खरीदारी फिलहाल टाल दी है, जबकि कइयों ने व्यापारियों के इस रचनात्मक विरोध प्रदर्शन को सही ठहराते हुए उनके प्रति अपनी सहानुभूति व्यक्त की।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
जैसलमेर के सर्राफा व्यापारियों ने झालमुड़ी बेचकर विरोध क्यों जताया?
व्यापारी सोने-चांदी की लगातार गिरती बिक्री, आसमान छूते भावों और सरकारी अपीलों के कारण बाजार में आई भारी मंदी से परेशान हैं। इसी आर्थिक तंगी की ओर ध्यान खींचने के लिए उन्होंने यह अनोखा कदम उठाया।
सुनारों के अनुसार सोने का बाजार मंदा होने के मुख्य कारण क्या हैं?
सुनारों के अनुसार, सोने की अत्यधिक ऊंची कीमतें, वैट (कर) का बोझ और देश के शीर्ष स्तर से आम जनता को सोना न खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने वाली अपीलें इसके मुख्य कारण हैं।
इस मंदी से व्यापार के अलावा और किस वर्ग पर असर पड़ रहा है?
सर्राफा संघ के अनुसार, इस मंदी का सबसे बुरा असर आभूषण बनाने वाले स्थानीय कारीगरों, छोटे कामगारों और दैनिक मजदूरी करने वाले लेबर्स पर पड़ रहा है, जिनकी रोजी-रोटी इसी धंधे से चलती है।
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