सीकर की सफलता पर सवाल, क्या नीट 2026 के पेपर लीक खुलासे से ढह जाएगा तिलस्म?
Jinesh Jain | May 18, 2026, 14:45 IST
Photograph: (the sootr)
क्या राजस्थान के कोचिंग हब सीकर में कामयाबी का तिलस्म नीट पेपर लीक के बाद ढह जाएगा या आगे भी बरकरार रहेगा। नीट पेपर लीक का खुलासा होने से यहां की सफलता सवालों में है। कैसे यहां रातोंरात कोचिंग इंडस्ट्री 3000 करोड़ रुपए की हो गई? इस पर पढ़िए खास रिपोर्ट:
राजस्थान में शिक्षा का काशी कहे जाने वाला सीकर शहर आज अपनी ही चमत्कारी कामयाबी के बोझ तले सुलग रहा है। साल 2024 के नीट (NEET) इम्तिहान में कोटा और दिल्ली जैसे दिग्गजों को पछाड़कर 30.22 फीसदी की अकल्पनीय सफलता दर हासिल करने वाले इस तीन हजार करोड़ के कोचिंग हब पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
नीट 2026 के पेपर लीक मामले में हुई हालिया गिरफ्तारियों के तार सीकर से जुड़ने के बाद यह बहस तेज हो गई है कि दो साल पहले का वह नतीजा कोई शैक्षणिक चमत्कार था या फिर पेपर लीक के संगठित तंत्र का करिश्मा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऑनलाइन मोड में होने वाली जेईई (JEE) परीक्षा में शून्य पर सिमटने वाला सीकर ऑफलाइन मोड वाली नीट परीक्षा में आखिर देश के शिखर पर कैसे पहुंच जाता है?
यह साल 2024 की गर्मियों का दौर था। नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के नतीजे स्क्रीन पर फ्लैश हो रहे थे। देश के कोने-कोने से आए आंकड़ों के बीच राजस्थान का कस्बा नुमा शहर सीकर अचानक पूरे देश की सुर्खियों में आ गया।
शेखावाटी की तपती धरती पर कामयाबी की एक ऐसी इबारत लिखी गई थी, जिसने बरसों से देश के कोचिंग कैपिटल रहे कोटा और देश की राजधानी दिल्ली तक को सकते में डाल दिया था।
आंकड़े किसी परिकल्पना जैसे थे।
सीकर सेंटर पर परीक्षा देने बैठे कुल 27,216 छात्रों में से 149 सूरमाओं ने 700 से ज्यादा अंक हासिल कर इतिहास रच दिया था।
इतना ही नहीं, 2,037 छात्रों ने 650+ और 4,297 छात्रों ने 600+ अंकों की सीढ़ी चढ़कर पूरे देश को चौंकाया। जब 500 से अधिक अंक लाने वाले छात्रों की अंतिम गिनती हुई तो वह संख्या 8,225 पर जाकर रुकी।
यानी सीकर में परीक्षा देने बैठे हर 100 छात्रों में से 30 से ज्यादा छात्र (30.22%) 500 से अधिक अंकों के साथ दौड़ में सबसे आगे खड़े थे। 30.22 फीसदी की यह सफलता दर एक राष्ट्रीय कीर्तिमान थी।
इस अनोखी सफलता की गूंज तब और गहरी हो गई, जब इसकी तुलना देश के दूसरे बड़े महानगरों और स्थापित कोचिंग सेंटरों से की गई।
शहर / सेंटर कुल सम्मिलित छात्र 500+ अंक लाने वाले छात्र सफलता की दर (%)
सीकर 27,216 8,225 30.22%
कोटा 27,118 5,436 20.05%
जयपुर 55,124 9,109 16.52%
बेंगलुरु 29,126 4,049 13.90%
दिल्ली 66,090 7,855 11.89%
5 बड़े शहर (मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, भोपाल, जम्मू) 1,08,139 8,799 8.14%
जहां 66 हजार से अधिक छात्रों वाली देश की राजधानी दिल्ली महज 11.89% की सफलता दर पर सिमट गई, वहीं देश भर के मेधावियों की पहली पसंद माना जाने वाला कोटा 20.05% पर रुक गया। मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, भोपाल और जम्मू जैसे पांच बड़े शहरों को मिला दिया जाए तो वहां के 1.08 लाख से ज्यादा छात्रों में से केवल 8,799 छात्र ही 500 का आंकड़ा पार कर पाए-यानी महज 8.14% की सफलता दर।
इन महाकाय शहरों के मुकाबले सीकर का यह प्रदर्शन किसी ईश्वरीय वरदान या किसी अकल्पनीय जादू की तरह देखा जाने लगा।
सीकर के पिपराली रोड और नवलगढ़ रोड पर 2020 तक कम ही बसावट थी। लेकिन कोराना काल के बाद अब यहां बड़ी-बड़ी इमारतों में कोचिंग संस्थान और हॉस्टल चल रहे हैं। बताते हैं कि यहां 1990 के दशक के अंतिम सालों में एक स्थानीय शख्स़ ने कुछ स्टूडेंट्स को पढ़ाते हुए कोचिंग की शुरुआत की थी। इसके बाद पिछले 10 साल में लगातार कोचिंग संस्थानों का बढ़ना शुरू होता गया। कोचिंग संस्थानों में बच्चों को टॉपर बनाने की होड़ मच गई।
दो साल पहले मिली इस अभूतपूर्व सफलता ने सीकर की कोचिंग इंडस्ट्री को रातों-रात एक नया आसमान दे दिया। जो सीकर कभी कोटा के साए में धीरे-धीरे पैर पसार रहा था, वहां अचानक पैसों की बारिश होने लगी।
बड़े-बड़े होर्डिंग्स, चमचमाती इमारतें और देश भर से आने वाले लाखों छात्रों के भरोसे ने यहां पढ़ाई के कारोबार को अनुमानत: तीन हजार करोड़ रुपये के सालाना साम्राज्य में तब्दील कर दिया। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे एक सुलगता हुआ सच भी था। सवाल 2024 में भी उठे थे।
मेधावियों के एक ही सेंटर से थोक में निकलने पर उंगलियां उठी थीं। सीकर के नीट परीक्षा सेंटर मंगलचंद डिडवानिया विद्या मंदिर से 600 में से 150 बच्चों का सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सलेक्शन हो गया। हालांकि, इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। जांच एजेंसी ने सीकर के 20 से अधिक ऐसे सेंटरों को अपनी रडार पर लिया है, जहां सफलता दर अप्रत्याशित रही है।
तब सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इन आशंकाओं पर इस तरह राख डाल दी कि भीतर सुलगती चिंगारी को नजरअंदाज करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। हताश और मजबूर होकर लाखों छात्र फिर से किताबों में सिर खपाने लगे।
उस दौर में भी चर्चाएं आम थीं। सीकर के इस अकूत कोचिंग साम्राज्य को अदृश्य और बेहद मजबूत हाथों का संरक्षण हासिल है। बीते सालों में वैवाहिक रिश्तों के सहारे सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे रसूख ने सीकर के एक बड़े कोचिंग संस्थान के लिए ऐसा सुरक्षा कवच तैयार कर लिया था, जो हर संकट को वक्त रहते साधने का हुनर रखता है।
इतिहास खुद को दोहराता है, लेकिन इस बार वह अपने साथ सबूत भी लाया था। साल 2026 में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए हुई नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) की परीक्षा के बाद जब जांच एजेंसियों ने पेपर लीक गैंग के गिरेबान पर हाथ डाला तो इस बार कड़ियां सीधे सीकर से जाकर जुड़ गईं। गिरफ्तारियों का दौर शुरू हुआ, बंद कमरों में कड़ाई से पूछताछ हुई, तो दो साल पहले की उस चमत्कारी सफलता के चेहरे से भी नकाब सरकने लगा।
अब वही लोग, जो दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खामोश हो गए थे, जांच एजेंसियों की हर हलचल पर निगाहें टिकाए बैठे हैं। हालांकि वाकिफकारों को आज भी इस बात का पूरा अहसास है कि तीन हजार करोड़ की इस इंडस्ट्री के कारोबारी हित और सत्ता से जुड़े वैवाहिक रसूख इतने कमजोर नहीं हैं कि एक झटके में ढह जाएं। संकटों को मैनेज करने का खेल पर्दे के पीछे अब भी जारी है।
लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प और हैरान कर देने वाला पहलू वह तकनीकी विरोधाभास है, जिसका जवाब आज तक सीकर का कोई भी धुरंधर संस्थान नहीं दे पाया है।
सवाल सीधा सा है, अगर सीकर की माटी और वहां के कोचिंग संस्थानों में वाकई कोई ऐसा नायाब हुनर है जो देश के सबसे कड़े इम्तिहानों को चुटकियों में क्रैक करा सकता है, तो वह हुनर सिर्फ ऑफलाइन परीक्षाओं तक ही क्यों सीमित है?
JEE (इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा): यह परीक्षा पूरी तरह से ऑनलाइन (कंप्यूटर बेस्ड) मोड पर होती है। इस परीक्षा के नतीजों में सीकर की सफलता का ग्राफ शून्य बट्टे सन्नाटा यानी बेहद साधारण नजर आता है। ऑनलाइन के इस चक्रव्यूह को भेदने में सीकर का तंत्र हमेशा हांफता हुआ दिखता है।
NEET (मेडिकल प्रवेश परीक्षा): यह परीक्षा अब तक ऑफलाइन मोड पर पेन-पेपर के जरिए होती रही है। इसी ऑफलाइन मोड में सीकर पूरे देश के शिखर पर बैठकर सबको चौंका देता है।
एक शिक्षाविद् कहते हैं, एक ही शहर, वही कोचिंग संस्थान, लगभग वही इंफ्रास्ट्रक्चर—लेकिन परीक्षा का माध्यम बदलते ही नतीजों का आसमान से जमीन पर आ जाना किसी बड़े घालमेल की तरफ इशारा करता है।
अब जब पेपर लीक का यह पूरा तंत्र बेनकाब हो चुका है और सरकार पर चौतरफा दबाव है, तब यह फैसला लिया जा चुका है कि अगली बार से मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) को भी पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत यानी ऑनलाइन प्रणाली से कराया जाएगा।
यह फैसला सीकर की फलती-फूलती कोचिंग इंडस्ट्री के लिए किसी वजूद के संकट जैसा है। असली परीक्षा अब शुरू होगी। सवाल यही है कि जब मानवीय हस्तक्षेप के रास्ते बंद हो जाएंगे, जब ओएमआर शीट के बंडल और परीक्षा केंद्रों की सील बंद लिफाफों का दौर खत्म हो जाएगा।
ऐसे में सीकर की सफलता का यह सिलसिला इसी तरह जारी रहेगा? या फिर ऑनलाइन मोड आते ही मेडिकल का यह शिखर भी इंजीनियरिंग की तरह शून्य की तरफ बढ़ जाएगा?
फिलहाल सीकर की इस अभूतपूर्व कामयाबी पर लगे दाग ने देश के लाखों ईमानदार छात्रों के भरोसे को बुरी तरह छलनी कर दिया है।
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फिर हजारों छात्र लौट रहे कोटा, कोचिंग संस्थानों के लिए यह आपदा में अवसर जैसा, जानें पूरी कहानी
नीट 2026 के पेपर लीक मामले में हुई हालिया गिरफ्तारियों के तार सीकर से जुड़ने के बाद यह बहस तेज हो गई है कि दो साल पहले का वह नतीजा कोई शैक्षणिक चमत्कार था या फिर पेपर लीक के संगठित तंत्र का करिश्मा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऑनलाइन मोड में होने वाली जेईई (JEE) परीक्षा में शून्य पर सिमटने वाला सीकर ऑफलाइन मोड वाली नीट परीक्षा में आखिर देश के शिखर पर कैसे पहुंच जाता है?
शेखावाटी का वो जादुई साल
शेखावाटी की तपती धरती पर कामयाबी की एक ऐसी इबारत लिखी गई थी, जिसने बरसों से देश के कोचिंग कैपिटल रहे कोटा और देश की राजधानी दिल्ली तक को सकते में डाल दिया था।
आंकड़े किसी परिकल्पना जैसे थे।
सीकर सेंटर पर परीक्षा देने बैठे कुल 27,216 छात्रों में से 149 सूरमाओं ने 700 से ज्यादा अंक हासिल कर इतिहास रच दिया था।
इतना ही नहीं, 2,037 छात्रों ने 650+ और 4,297 छात्रों ने 600+ अंकों की सीढ़ी चढ़कर पूरे देश को चौंकाया। जब 500 से अधिक अंक लाने वाले छात्रों की अंतिम गिनती हुई तो वह संख्या 8,225 पर जाकर रुकी।
यानी सीकर में परीक्षा देने बैठे हर 100 छात्रों में से 30 से ज्यादा छात्र (30.22%) 500 से अधिक अंकों के साथ दौड़ में सबसे आगे खड़े थे। 30.22 फीसदी की यह सफलता दर एक राष्ट्रीय कीर्तिमान थी।
दिल्ली पस्त, कोटा पछाड़ और जयपुर पीछे
शहर / सेंटर कुल सम्मिलित छात्र 500+ अंक लाने वाले छात्र सफलता की दर (%)
सीकर 27,216 8,225 30.22%
कोटा 27,118 5,436 20.05%
जयपुर 55,124 9,109 16.52%
बेंगलुरु 29,126 4,049 13.90%
दिल्ली 66,090 7,855 11.89%
5 बड़े शहर (मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, भोपाल, जम्मू) 1,08,139 8,799 8.14%
जहां 66 हजार से अधिक छात्रों वाली देश की राजधानी दिल्ली महज 11.89% की सफलता दर पर सिमट गई, वहीं देश भर के मेधावियों की पहली पसंद माना जाने वाला कोटा 20.05% पर रुक गया। मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, भोपाल और जम्मू जैसे पांच बड़े शहरों को मिला दिया जाए तो वहां के 1.08 लाख से ज्यादा छात्रों में से केवल 8,799 छात्र ही 500 का आंकड़ा पार कर पाए-यानी महज 8.14% की सफलता दर।
इन महाकाय शहरों के मुकाबले सीकर का यह प्रदर्शन किसी ईश्वरीय वरदान या किसी अकल्पनीय जादू की तरह देखा जाने लगा।
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5 साल में खडे़ हो गए बड़े-बड़े कोचिंग संस्थान
तीन हजार करोड़ का साम्राज्य और रसूख की ढाल
बड़े-बड़े होर्डिंग्स, चमचमाती इमारतें और देश भर से आने वाले लाखों छात्रों के भरोसे ने यहां पढ़ाई के कारोबार को अनुमानत: तीन हजार करोड़ रुपये के सालाना साम्राज्य में तब्दील कर दिया। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे एक सुलगता हुआ सच भी था। सवाल 2024 में भी उठे थे।
मेधावियों के एक ही सेंटर से थोक में निकलने पर उंगलियां उठी थीं। सीकर के नीट परीक्षा सेंटर मंगलचंद डिडवानिया विद्या मंदिर से 600 में से 150 बच्चों का सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सलेक्शन हो गया। हालांकि, इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। जांच एजेंसी ने सीकर के 20 से अधिक ऐसे सेंटरों को अपनी रडार पर लिया है, जहां सफलता दर अप्रत्याशित रही है।
तब सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इन आशंकाओं पर इस तरह राख डाल दी कि भीतर सुलगती चिंगारी को नजरअंदाज करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। हताश और मजबूर होकर लाखों छात्र फिर से किताबों में सिर खपाने लगे।
उस दौर में भी चर्चाएं आम थीं। सीकर के इस अकूत कोचिंग साम्राज्य को अदृश्य और बेहद मजबूत हाथों का संरक्षण हासिल है। बीते सालों में वैवाहिक रिश्तों के सहारे सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे रसूख ने सीकर के एक बड़े कोचिंग संस्थान के लिए ऐसा सुरक्षा कवच तैयार कर लिया था, जो हर संकट को वक्त रहते साधने का हुनर रखता है।
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2026 का वो टूटता तिलस्म
अब वही लोग, जो दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खामोश हो गए थे, जांच एजेंसियों की हर हलचल पर निगाहें टिकाए बैठे हैं। हालांकि वाकिफकारों को आज भी इस बात का पूरा अहसास है कि तीन हजार करोड़ की इस इंडस्ट्री के कारोबारी हित और सत्ता से जुड़े वैवाहिक रसूख इतने कमजोर नहीं हैं कि एक झटके में ढह जाएं। संकटों को मैनेज करने का खेल पर्दे के पीछे अब भी जारी है।
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बड़ा सवाल -ऑनलाइन शून्य, ऑफलाइन शिखर
सवाल सीधा सा है, अगर सीकर की माटी और वहां के कोचिंग संस्थानों में वाकई कोई ऐसा नायाब हुनर है जो देश के सबसे कड़े इम्तिहानों को चुटकियों में क्रैक करा सकता है, तो वह हुनर सिर्फ ऑफलाइन परीक्षाओं तक ही क्यों सीमित है?
JEE (इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा): यह परीक्षा पूरी तरह से ऑनलाइन (कंप्यूटर बेस्ड) मोड पर होती है। इस परीक्षा के नतीजों में सीकर की सफलता का ग्राफ शून्य बट्टे सन्नाटा यानी बेहद साधारण नजर आता है। ऑनलाइन के इस चक्रव्यूह को भेदने में सीकर का तंत्र हमेशा हांफता हुआ दिखता है।
NEET (मेडिकल प्रवेश परीक्षा): यह परीक्षा अब तक ऑफलाइन मोड पर पेन-पेपर के जरिए होती रही है। इसी ऑफलाइन मोड में सीकर पूरे देश के शिखर पर बैठकर सबको चौंका देता है।
एक शिक्षाविद् कहते हैं, एक ही शहर, वही कोचिंग संस्थान, लगभग वही इंफ्रास्ट्रक्चर—लेकिन परीक्षा का माध्यम बदलते ही नतीजों का आसमान से जमीन पर आ जाना किसी बड़े घालमेल की तरफ इशारा करता है।
भविष्य के गर्भ में क्या?
यह फैसला सीकर की फलती-फूलती कोचिंग इंडस्ट्री के लिए किसी वजूद के संकट जैसा है। असली परीक्षा अब शुरू होगी। सवाल यही है कि जब मानवीय हस्तक्षेप के रास्ते बंद हो जाएंगे, जब ओएमआर शीट के बंडल और परीक्षा केंद्रों की सील बंद लिफाफों का दौर खत्म हो जाएगा।
ऐसे में सीकर की सफलता का यह सिलसिला इसी तरह जारी रहेगा? या फिर ऑनलाइन मोड आते ही मेडिकल का यह शिखर भी इंजीनियरिंग की तरह शून्य की तरफ बढ़ जाएगा?
फिलहाल सीकर की इस अभूतपूर्व कामयाबी पर लगे दाग ने देश के लाखों ईमानदार छात्रों के भरोसे को बुरी तरह छलनी कर दिया है।
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