जवाई लेपर्ड सफारी में अब नहीं बनेंगे नए होटल-रिसोर्ट, हाईकोर्ट ने निर्माण और माइनिंग पर लगाई रोक
News In Short
- जवाई लेपर्ड एरिया में नए होटल और रिसोर्ट के लाइसेंस जारी करने पर हाई कोर्ट की पूर्ण रोक।
- कोर्ट ने कहा- धरती मनुष्य की जागीर नहीं, वन्यजीवों का संरक्षण हमारा मौलिक कर्तव्य है।
- राज्य सरकार को जवाई अभयारण्य बनाने की संभावना तलाशने के निर्देश दिए।
- अब GPS और रजिस्ट्रेशन के बिना नहीं चलेंगी सफारी जिप्सियां; नाइट सफारी पर बैन बरकरार।
- जवाई बांध के ओवरफ्लो जोन और मुख्य क्षेत्र में वाहनों के प्रवेश पर भी लगी पाबंदी।
News In Detail
Pali: राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने जवाई लेपर्ड सफारी क्षेत्र में पर्यावरण और तेंदुओं के प्राकृतिक आवास को बचाने के लिए बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अब जवाई लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व और उसके आसपास के सफारी क्षेत्र में किसी भी नए व्यावसायिक निर्माण, होटल, रिसोर्ट या खनन गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी।
संवैधानिक दायित्वों पर जोर
कोर्ट ने अपने फैसले की शुरुआत एक गहरे दार्शनिक विचार के साथ की -धरती मनुष्य की नहीं, मनुष्य धरती का है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद-21 (जीवन का अधिकार), 48A (पर्यावरण संरक्षण) और 51A(g) (वन्यजीवों के प्रति मौलिक कर्तव्य) का हवाला देते हुए कहा कि प्रदूषण मुक्त पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
फैसले की मुख्य बातें और पाबंदियां
निर्माण पर रोक: जवाई लेपर्ड सफारी क्षेत्र में नए होटल, रिसोर्ट और व्यावसायिक निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध। (केवल गांवों की आबादी के वैध निजी निर्माण को छूट)।
खनन पर पाबंदी: तेंदुओं के प्राकृतिक आवास वाली पहाड़ियों में चल रही खनन गतिविधियों पर रोक।
SOP लागू: वन विभाग द्वारा तैयार की गई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को तुरंत प्रभाव से लागू करने के निर्देश। इसमें सफारी वाहनों का रजिस्ट्रेशन, GPS मॉनिटरिंग और केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक सफारी की अनुमति जैसे नियम शामिल हैं।
अभयारण्य का दर्जा: कोर्ट ने राज्य सरकार और वन्यजीव बोर्ड को निर्देश दिया कि वे जवाई क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuary) घोषित करने की संभावनाओं पर विचार करें।
जवाई है 50-70 लेपर्ड्स का घर
याचिकाकर्ता अपूर्वा अग्रावत की जनहित याचिका में बताया गया कि जवाई क्षेत्र अपनी विशिष्ट ग्रेनाइट पहाड़ियों और गुफाओं के कारण तेंदुओं के लिए दुनिया के सबसे सघन और अनूठे आवासों में से एक है। वर्तमान में यहां 50 से 70 तेंदुए हैं। हालांकि, अनियंत्रित ईको-टूरिज्म और अवैध निर्माण इस संतुलन को बिगाड़ रहे थे।
अदालत ने जवाई बांध के मुख्य क्षेत्र और ओवरफ्लो जोन में पक्षियों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए वाहनों के प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया है। साथ ही नाइट सफारी पर पूरी तरह प्रतिबंध जारी रहेगा।
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