हॉस्टल की दोस्ती ने मिलकर फतह किया JEE एडवांस्ड 2026, हासिल की AIR-1 और AIR-2

Jageshwar prasad | Jun 01, 2026, 14:34 IST
Photograph: (the sootr)
कोटा में साथ रहने वाले शुभम कुमार और कबीर छिल्लर ने JEE एडवांस्ड 2026 में ऑल इंडिया रैंक-1 और रैंक-2 हासिल की। शुभम ने 330 और कबीर ने 329 अंक प्राप्त किए। दोनों ने शाम को बैडमिंटन खेलकर तनाव दूर किया।

News In Short

  • कोटा के दो दोस्त शुभम कुमार और कबीर छिल्लर बने JEE एडवांस्ड 2026 टॉपर।
  • शुभम कुमार ने AIR-1 और कबीर छिल्लर ने AIR-2 हासिल की।
  • शुभम ने 330 अंक लेकर टॉप किया, कबीर महज एक अंक से पीछे रह गए।
  • कोचिंग के दौरान दोनों शाम को बैडमिंटन खेलकर तनाव दूर करते थे।

News In Detail

अक्सर जब देश की सबसे प्रतिष्ठित और मुश्किल परीक्षाओं में से एक JEE एडवांस्ड का परिणाम आता है, तो चारों तरफ सिर्फ नंबर्स, कट-ऑफ और कोचिंग सेंटर्स के दावों का शोर होता है। लेकिन साल 2026 के नतीजों के साथ राजस्थान के कोटा से जो कहानी सामने आई है, वह केवल नंबरों की नहीं है। यह कहानी है- अटूट अनुशासन, एक-दूसरे को आगे बढ़ाने वाली सच्ची दोस्ती और खुद को साबित करने के जुनून की।



आधी रात को रचा गया इतिहास

IIT रुड़की द्वारा देर रात 1:00 बजे जब JEE एडवांस्ड 2026 के परिणाम पोर्टल पर लाइव हुए, तो कोटा के एक हॉस्टल में जश्न का सैलाब आ गया। साथ रहने वाले, साथ नोट्स शेयर करने वाले और हर शाम खेल के मैदान पर एक-दूसरे को टक्कर देने वाले दो दोस्तों ने देश की टॉप-2 रैंक पर अपना कब्जा जमा लिया था।



बिहार के गया के रहने वाले शुभम कुमार ने 360 में से 330 अंक हासिल कर देश में पहला स्थान (AIR-1) पाया। वहीं उनके सबसे पक्के दोस्त, गुरुग्राम के कबीर छिल्लर महज 1 नंबर के अंतर से पीछे रहे और 329 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-2 बने।



इसमें तीसरा स्थान यानी AIR-3 सीकर के जतिन चाहर को मिला, जिन्होंने 319 अंक हासिल किए। खास बात यह है कि शीर्ष पर रहने वाले इन तीनों ही सितारों ने कोटा की धरती पर रहकर ही अपनी तैयारी को मुकम्मल किया था।



चौथी और सातवीं मंजिल की वो अनोखी जुगलबंदी

हॉस्टल की चौथी मंजिल पर रहने वाले शुभम और सातवीं मंजिल पर रहने वाले कबीर की यह ऐतिहासिक कामयाबी किसी बंद कमरे की मैराथन पढ़ाई का नतीजा नहीं है। शुभम और कबीर का एक सख्त नियम था- दिनभर की पढ़ाई के बाद शाम को बैडमिंटन कोर्ट पर उतरना। दोनों का मानना है कि इस खेल ने न सिर्फ उनका तनाव दूर किया, बल्कि उनके दिमाग को रीचार्ज करने में बूस्टर का काम किया।



अब इन दोनों दोस्तों की राहें आगे भी जुदा नहीं होने वाली हैं। दोनों का अगला साझा लक्ष्य IIT बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना है।



शुभम का स्मार्ट-वर्क और अनोखी लाइफस्टाइल

JEE MAINS 2026 में AIR-6 हासिल करने वाले शुभम कुमार पिछले दो सालों से कोटा में थे। उनकी सफलता की सबसे बड़ी खासियत उनका टाइम-मैनेजमेंट रहा। शुभम कभी 15-16 घंटे की थका देने वाली पढ़ाई में विश्वास नहीं रखते थे। वे रोजाना केवल 6 घंटे पढ़ते थे, लेकिन उस दौरान उनका फोकस 100% होता था।



बिना किसी अलार्म के सुबह 6:30 बजे उठना और रात को ठीक 10:30 बजे सो जाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। उन्होंने खुद को सुख-सुविधाओं का आदी नहीं बनने दिया। तपती गर्मी में भी एसी (AC) का इस्तेमाल इसलिए नहीं किया ताकि परीक्षा हॉल की किसी भी परिस्थिति के लिए उनका शरीर और दिमाग तैयार रहे।



शुभम ने अपनी तैयारी के दौरान सोशल मीडिया और सिनेमा से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। भारी खाने की जगह वे स्प्राउट्स (अंकुरित मूंग) और फलों को तरजीह देते थे। उनके भीतर आत्मविश्वास का स्तर यह था कि वे अपनी रफ कॉपियों के कवर पर पहले से ही JEE Advanced Topper लिख दिया करते थे। उनके इस अनुशासित सफर में उनके व्यवसायी पिता शिवकुमार और मां कंचन देवी का पूरा सपोर्ट रहा।



कबीर का बड़ा दिल, दोस्त जीता तो मलाल कैसा?

कबीर छिल्लर, जिन्होंने इससे पहले JEE मेन 2026 में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की थी, एडवांस्ड में एक नंबर से चूकने के बाद भी बेहद खुश हैं। उनकी आंखों में अपने दोस्त शुभम की जीत की सच्ची चमक साफ देखी जा सकती है।



कबीर कहते हैं कि शुभम ने इन दो सालों में बेहिसाब मेहनत की है, वह इस शीर्ष पायदान का पूरी तरह हकदार है। उनका मानना है कि अगर कोई और उन्हें पीछे छोड़ता तो शायद थोड़ी कसक होती, लेकिन जब आपका अपना सबसे पक्का दोस्त टॉप करता है, तो वो खुशी शब्दों से परे होती है।



इंजीनियरिंग कबीर के खून में है; उनके पिता अमोल छिल्लर खुद IIT खड़गपुर के पूर्व छात्र और सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि मां प्रियंका एक शिक्षिका हैं। इसके अलावा, कबीर खुद नेशनल लेवल के खिलाड़ी रह चुके हैं, जिसने उन्हें दबाव के क्षणों में शांत रहना और खेल भावना का सम्मान करना सिखाया।



भविष्य के एस्पिरेंट्स के लिए टॉपर्स का संदेश

देश के इन शीर्ष सितारों ने आने वाली पीढ़ी के छात्रों को एक बहुत ही गहरा और व्यावहारिक संदेश दिया है। कबीर छिल्लर का कहना है कि तैयारी के दौरान कभी भी अपने दिमाग पर रैंक या नंबर्स का बोझ नहीं डालना चाहिए।



जब आप केवल परिणाम की चिंता करते हैं, तो आप सीखने की प्रक्रिया का आनंद लेना भूल जाते हैं और यही तनाव का कारण बनता है। सफलता का असली राज तैयारी के इस सफर को जीने और उसका आनंद लेने में छिपा है।



दूसरी ओर, शुभम कुमार ने अपनी रणनीति साझा करते हुए सलाह दी है कि छात्रों को रटने की पुरानी पद्धति को पूरी तरह त्याग देना चाहिए। विज्ञान और गणित जैसे विषयों में सफलता तभी मिलती है जब आप किसी फॉर्मूले के पीछे छिपे लॉजिक और कोर कॉन्सेप्ट की गहराई तक पहुंचते हैं।



शुभम ने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य, भरपूर नींद और खेलकूद भी उतने ही अनिवार्य हैं, क्योंकि एक स्वस्थ और शांत दिमाग ही कठिन से कठिन चुनौतियों को हल करने में सक्षम होता है।



अक्सर कोटा को एक तनावपूर्ण और दबाव से भरे कोचिंग हब के रूप में देखा जाता है। लेकिन शुभम और कबीर की इस दास्तान ने यह साबित कर दिया है कि यदि आपके पास सही नजरिया, कड़ा अनुशासन और एक ऐसा दोस्त हो जो आपको हर दिन बेहतर बनने के लिए प्रेरित करे, तो आप तनाव को पीछे छोड़कर इतिहास रच सकते हैं। कागजों पर भले ही दोनों के बीच एक नंबर का फासला हो, लेकिन कामयाबी के फलक पर ये दोनों दोस्त बराबर के चमकदार सितारे हैं।



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