गांव के बच्चों को दिखाई अंतरिक्ष की राह: राजस्थान के शिक्षक दिव्येंदु सेन को राष्ट्रीय सम्मान
शिक्षक की भूमिका सिर्फ किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं होती। कई बार एक शिक्षक की कोशिश बच्चों के सपनों की सीमा ही बदल देती। शिक्षक दिवस पर राजस्थान के झालावाड़ से ऐसी ही कहानी सामने आई है। यहां सरकारी स्कूल के शिक्षक दिव्येंदु सेन ने गांव के बच्चों को विज्ञान और अंतरिक्ष से इस तरह जोड़ा कि उनके विद्यार्थियों ने एस्टेरॉयड की खोज से जुड़े अंतरराष्ट्रीय अभियान में अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी।
झालावाड़ जिले के पचपहाड़ स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में बायोलॉजी पढ़ाने वाले दिव्येंदु सेन का चयन इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए किया गया। शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देशभर के चयनित शिक्षकों को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में सम्मानित करेंगी। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक वर्ष 2026 के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए देशभर से 48 स्कूली शिक्षकों का चयन किया गया है। इनमें राजस्थान से दिव्येंदु सेन भी शामिल हैं।
गांव के बच्चे बने 'एस्टेरॉयड हंटर्स'
दिव्येंदु सेन की कहानी को खास उनका बच्चों को विज्ञान से जोड़ने का तरीका बनाता है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को NASA समर्थित International Astronomical Search Collaboration के अभियान से जोड़ा। इसके जरिए विद्यार्थी वास्तविक खगोलीय डेटा का अध्ययन कर संभावित एस्टेरॉयड की पहचान करते हैं।
उनके विद्यार्थियों ने अब तक 12 एस्टेरॉयड कैंडिडेट की पहचान की है। इनमें से चार को प्रोविजनल डिस्कवरी के रूप में मान्यता मिली है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये बच्चे किसी बड़े शहर के अत्याधुनिक स्कूल में नहीं, बल्कि ग्रामीण राजस्थान के सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। कई विद्यार्थियों के सामने कंप्यूटर, लैपटॉप और बेहतर इंटरनेट जैसी सुविधाओं की सीमाएं भी रही हैं।
नंबर से ज्यादा बच्चों की जिज्ञासा पर भरोसा
दिव्येंदु सेन की शिक्षण पद्धति की खासियत यह है कि वे किसी वैज्ञानिक गतिविधि में बच्चे को शामिल करने से पहले उसके परीक्षा के नंबर को सबसे बड़ा पैमाना नहीं मानते। उनका जोर बच्चे की जिज्ञासा और सीखने की इच्छा पर रहता है।
यही सोच ग्रामीण बच्चों को उस दुनिया तक लेकर गई, जिसे आमतौर पर बड़े शहरों और महंगे स्कूलों से जोड़कर देखा जाता है। उनका मानना है कि गांवों के बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं है। उन्हें अवसर, सही दिशा और मार्गदर्शन मिले तो वे भी विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
विद्यार्थियों द्वारा पहचाने गए एस्टेरॉयड कैंडिडेट में से एक को झालावाड़ में पिछले वर्ष हुए स्कूल हादसे में जान गंवाने वाले सात बच्चों की स्मृति से जोड़ने की योजना भी है। प्रस्तावित नाम में सातों बच्चों की स्मृति को समाहित करने का विचार है। अगर भविष्य में निर्धारित प्रक्रिया पूरी होती है तो यह बच्चों की याद को विज्ञान की दुनिया से जोड़ने वाला भावुक अध्याय बन सकता है।
सिर्फ अंतरिक्ष नहीं, क्लासरूम में भी तकनीक का प्रयोग
दिव्येंदु सेन ने विद्यार्थियों को केवल एस्ट्रोनॉमी तक सीमित नहीं रखा। स्कूल में शैक्षणिक सामग्री को विद्यार्थियों की आवाज में ऑडियो फॉर्मेट में तैयार करने जैसे प्रयोग भी किए गए हैं।
इसके अलावा वर्चुअल साइंस लैब और डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से बच्चों को ऐसे प्रयोग समझाने की कोशिश की गई, जिनके लिए सामान्य परिस्थितियों में स्कूल में पर्याप्त लैब संसाधनों की जरूरत पड़ती। वे राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस से भी जुड़े हैं और विद्यार्थियों को विज्ञान प्रतियोगिताओं तथा प्रतिभा खोज कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करते रहे हैं।
आज देश के 48 शिक्षकों का सम्मान
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार इस बार राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए 27 राज्यों, सात केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के 6 संगठनों से कुल 48 स्कूली शिक्षकों को चुना गया है। इनमें 26 पुरुष और 22 महिला शिक्षक हैं।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार का उद्देश्य उन शिक्षकों के योगदान को पहचान देना है जिन्होंने अपने प्रयासों से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करने का काम किया, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन पर भी सकारात्मक प्रभाव डाला।
राजस्थान के दिव्येंदु सेन की कहानी भी इसी की मिसाल है। एक ग्रामीण सरकारी स्कूल में रहते हुए बच्चों को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ना बताता है कि संसाधनों की सीमाओं के बावजूद शिक्षक की पहल बच्चों के लिए संभावनाओं का दायरा कितना बड़ा कर सकती है।
FAQ
- दिव्येंदु सेन कौन हैं?
दिव्येंदु सेन झालावाड़ के सरकारी स्कूल में बायोलॉजी पढ़ाने वाले शिक्षक हैं। उन्हें इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया है। - दिव्येंदु सेन के विद्यार्थियों ने क्या उपलब्धि हासिल की है?
उनके विद्यार्थियों ने NASA समर्थित अभियान में 12 एस्टेरॉयड कैंडिडेट खोजे हैं। इनमें से चार को प्रोविजनल डिस्कवरी की मान्यता मिली है। - राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार कब और कहां दिया जाएगा?
यह पुरस्कार 5 सितंबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में दिया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शिक्षकों को सम्मानित करेंगी।
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