झुंझुनूं जिला परिषद चुनाव: भाजपा ने राजनीतिक परिवारों को दी तरजीह, पूर्व सांसदों की बहुओं को टिकट
Jageshwar prasad | Oct 17, 2026, 13:13 IST
भाजपा ने पूर्व सांसद और नेताओं के परिवारों की महिलाओं को टिकट दिया
भाजपा और कांग्रेस ने झुंझुनूं जिला परिषद चुनाव में कई राजनीतिक परिवारों की महिलाओं को टिकट दिया । टिकट वितरण से राजनीतिक संतुलन पर कई सवाल उठने लगे हैं। भाजपा ने पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार के परिवार को प्राथमिकता दी, जिसमें दो महिलाओं को टिकट मिला है। कांग्रेस ने भी कुछ पूर्व पदाधिकारियों की बेटियों को टिकट देकर सियासी समीकरण बनाने की कोशिश की ।
झुंझुनूं जिला परिषद (Jhunjhunu Zila Parishad) चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के टिकट वितरण (Ticket Distribution) ने नई चर्चा छेड़ दी है। इससे महिला प्रतिनिधित्व और राजनीतिक परिवारों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जिला प्रमुख का पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है। इसलिए टिकटों के चयन को सियासी गणित से जोड़कर देखा जा रहा है।
पार्टी की सूची में पूर्व सांसदों और विधायकों के परिवारों की महिलाओं को जगह मिली है। संगठन के पदाधिकारियों की पत्नी और बेटियों को भी टिकट दिया गया है। इससे यह साफ है कि प्रत्याशियों का चयन सिर्फ महिला आरक्षण तक सीमित नहीं है। इसके पीछे जिला प्रमुख पद की दावेदारी और पार्टी के भीतर राजनीतिक संतुलन के संकेत भी माने जा रहे हैं। हालांकि टिकट मिलने मात्र से जिला प्रमुख पद पर दावेदारी तय नहीं मानी जा सकती।
भाजपा ने पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार के परिवार को टिकट वितरण में तवज्जो दी है। उनकी पुत्रवधू और निवर्तमान जिला प्रमुख हर्षिनी कुलहरी को वार्ड पांच से टिकट मिला है। दूसरी पुत्रवधू अनामिका पूनिया को वार्ड छह से प्रत्याशी बनाया गया है।
हर्षिनी कुलहरी पहले जिला प्रमुख रह चुकी हैं। वर्तमान में वे भाजपा की जिलाध्यक्ष हैं। उनके चुनाव मैदान में उतरने को राजनीतिक अनुभव और जिला प्रमुख पद की संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। एक ही परिवार की दो महिलाओं को अलग-अलग वार्डों से टिकट मिलने से पार्टी के चयन पर चर्चा तेज हो गई है।
पूर्व युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष और किसान मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता सतीश गजराज की पत्नी मीनू गजराज को वार्ड 29 से प्रत्याशी बनाया गया है। वार्ड तीन से पार्षद राजेश बावल की पत्नी पूजा बावल को टिकट मिला है।
भाजपा की केंद्रीय समिति के सदस्य विश्वम्भर पूनिया की बेटी नेहा को 39 नंबर से प्रत्याशी बनाया गया है। सूरजगढ़ के पूर्व विधायक सुभाष पूनिया के भाई की पत्नी और पूर्व प्रधान सविता पूनिया को वार्ड 35 से उम्मीदवार बनाया गया है।
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व उप जिला प्रमुख बनवारीलाल सैनी को वार्ड 41 से टिकट दिया गया है। पार्टी में पांच बार जिला महामंत्री रहे सरजीत चौधरी की पत्नी और पूर्व जिला परिषद सदस्य सुमित्रा को वार्ड 40 से टिकट मिला है। निवर्तमान जिला परिषद सदस्य अजय भालोठिया की पत्नी निकिता को वार्ड 20 से टिकट दिया गया है। इन नामों से पार्टी ने राजनीतिक अनुभव और संगठन से जुड़े परिवारों को प्रतिनिधित्व दिया है।
पूर्व सांसद संतोष अहलावत की पुत्रवधू और पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी की बेटी दीक्षा अहलावत को वार्ड 18 से प्रत्याशी बनाया गया है। उनके नाम की घोषणा के बाद टिकट वितरण में राजनीतिक रिश्तों की भूमिका पर चर्चा बढ़ गई है।
दीक्षा का जुड़ाव दो राजनीतिक परिवारों से है। इसलिए उनकी उम्मीदवारी को स्थानीय सियासी समीकरणों के नजरिए से भी देखा जा रहा है। इससे पार्टी के अंदर संतुलन बनाने की कोशिश भी मानी जा रही है।
कांग्रेस ने भी कुछ पूर्व पदाधिकारियों और उनके परिवारों को टिकट दिया है। युवा कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रहे सुधींद्र मूंड की पत्नी रंजना कुमारी धींवा को जिला परिषद के 20 नंबर से टिकट मिला है।
युवा कांग्रेस से चुनाव लड़ने वाले दिनेश कुमार को 19 नंबर से टिकट मिला है। चिड़ावा के पूर्व प्रधान की पुत्रवधू विनीता रणवां को 39 नंबर से मौका मिला है। भाजपा से कांग्रेस में शामिल हुईं झुंझुनूं पंचायत समिति की पूर्व प्रधान सुशीला सीगड़ा को छह नंबर से टिकट दिया गया है। कांग्रेस के निवर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष खलील बुढ़ाना को 41 नंबर से टिकट मिला है।
जिला प्रमुख का पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है। इस कारण भाजपा के टिकट वितरण में महिला उम्मीदवारों के चयन को खास महत्व मिल रहा है। राजनीतिक परिवारों से जुड़ी महिलाओं को टिकट मिलने के बाद यह चर्चा भी है कि चुनाव जीतने वाली महिला प्रत्याशियों में से कौन जिला प्रमुख पद की दावेदार बन सकती है।
हालांकि जिला प्रमुख का चयन चुनाव परिणाम और पार्टी के भीतर बनने वाले समीकरणों पर निर्भर करेगा। फिलहाल टिकट वितरण ने जिला परिषद चुनाव के साथ-साथ जिला प्रमुख पद को लेकर भी राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है।
पंचायत चुनाव में महिला आरक्षण का बड़ा असर है। जिला प्रमुख का पद महिला के लिए आरक्षित होने से पार्टियों को महिला उम्मीदवार उतारने पड़ रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक परिवारों की महिलाओं को आगे किया जा रहा है।
इससे पार्टी के अंदर संतुलन बनाने की कोशिश हो रही है। साथ ही जिला प्रमुख पद की दावेदारी भी तय करने की कोशिश की जा रही है। अब देखना जरूरी है कि चुनाव में किसे जीत मिलती है और जिला प्रमुख कौन बनता है।
पार्टी की सूची में पूर्व सांसदों और विधायकों के परिवारों की महिलाओं को जगह मिली है। संगठन के पदाधिकारियों की पत्नी और बेटियों को भी टिकट दिया गया है। इससे यह साफ है कि प्रत्याशियों का चयन सिर्फ महिला आरक्षण तक सीमित नहीं है। इसके पीछे जिला प्रमुख पद की दावेदारी और पार्टी के भीतर राजनीतिक संतुलन के संकेत भी माने जा रहे हैं। हालांकि टिकट मिलने मात्र से जिला प्रमुख पद पर दावेदारी तय नहीं मानी जा सकती।
एक ही परिवार की दो बहुओं को टिकट
हर्षिनी कुलहरी पहले जिला प्रमुख रह चुकी हैं। वर्तमान में वे भाजपा की जिलाध्यक्ष हैं। उनके चुनाव मैदान में उतरने को राजनीतिक अनुभव और जिला प्रमुख पद की संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। एक ही परिवार की दो महिलाओं को अलग-अलग वार्डों से टिकट मिलने से पार्टी के चयन पर चर्चा तेज हो गई है।
कई नेताओं की पत्नियों और बेटियों को मौका
भाजपा की केंद्रीय समिति के सदस्य विश्वम्भर पूनिया की बेटी नेहा को 39 नंबर से प्रत्याशी बनाया गया है। सूरजगढ़ के पूर्व विधायक सुभाष पूनिया के भाई की पत्नी और पूर्व प्रधान सविता पूनिया को वार्ड 35 से उम्मीदवार बनाया गया है।
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व उप जिला प्रमुख बनवारीलाल सैनी को वार्ड 41 से टिकट दिया गया है। पार्टी में पांच बार जिला महामंत्री रहे सरजीत चौधरी की पत्नी और पूर्व जिला परिषद सदस्य सुमित्रा को वार्ड 40 से टिकट मिला है। निवर्तमान जिला परिषद सदस्य अजय भालोठिया की पत्नी निकिता को वार्ड 20 से टिकट दिया गया है। इन नामों से पार्टी ने राजनीतिक अनुभव और संगठन से जुड़े परिवारों को प्रतिनिधित्व दिया है।
दो राजनीतिक परिवारों से जुड़ा एक नाम
दीक्षा का जुड़ाव दो राजनीतिक परिवारों से है। इसलिए उनकी उम्मीदवारी को स्थानीय सियासी समीकरणों के नजरिए से भी देखा जा रहा है। इससे पार्टी के अंदर संतुलन बनाने की कोशिश भी मानी जा रही है।
कांग्रेस ने भी दिए कई राजनीतिक परिवारों को टिकट
युवा कांग्रेस से चुनाव लड़ने वाले दिनेश कुमार को 19 नंबर से टिकट मिला है। चिड़ावा के पूर्व प्रधान की पुत्रवधू विनीता रणवां को 39 नंबर से मौका मिला है। भाजपा से कांग्रेस में शामिल हुईं झुंझुनूं पंचायत समिति की पूर्व प्रधान सुशीला सीगड़ा को छह नंबर से टिकट दिया गया है। कांग्रेस के निवर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष खलील बुढ़ाना को 41 नंबर से टिकट मिला है।
महिला आरक्षण से बढ़ी चर्चा
हालांकि जिला प्रमुख का चयन चुनाव परिणाम और पार्टी के भीतर बनने वाले समीकरणों पर निर्भर करेगा। फिलहाल टिकट वितरण ने जिला परिषद चुनाव के साथ-साथ जिला प्रमुख पद को लेकर भी राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है।
आरक्षण के कारण राजनीतिक परिवारों ने महिलाओं को आगे किया
इससे पार्टी के अंदर संतुलन बनाने की कोशिश हो रही है। साथ ही जिला प्रमुख पद की दावेदारी भी तय करने की कोशिश की जा रही है। अब देखना जरूरी है कि चुनाव में किसे जीत मिलती है और जिला प्रमुख कौन बनता है।
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