पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल के खिलाफ JJM घोटाले में 17,500 पन्नों की चार्जशीट पेश
News In Short
- एसीबी ने पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल के खिलाफ 17,500 पन्नों की चार्जशीट पेश की।
- JJM घोटाले में फर्जी कार्य-पूर्णता प्रमाण पत्र के जरिए 960 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल किए गए।
- सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार हुए 57 दिन हो चुके थे, समय सीमा से पहले चार्जशीट दाखिल।
- इस मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी और बिचौलिए संजय बड़ाया न्यायिक हिरासत में हैं।
- विशेष अदालत 8 जून को इस मामले में सुनवाई करेगी।
News In Detail
राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन घोटाले मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने गुरुवार को सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल के खिलाफ अदालत में चालान पेश कर दिया है।
एसीबी की तरफ से कोर्ट में पेश की गई यह चार्जशीट करीब 17 हजार 500 पन्नों की है। सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार हुए करीब 57 दिन पूरे हो चुके और सुनवाई 8 जून को है, जिससे ठीक पहले जांच एजेंसी ने यह कदम उठाया है।
सुबोध अग्रवाल और घोटाले के तार
सुबोध अग्रवाल के खिलाफ एसीबी ने समय सीमा के भीतर चार्जशीट पेश कर अपनी कानूनी तैयारी मजबूत कर ली है। कानूनी प्रावधानों के तहत गिरफ्तारी के 60 दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल करना अनिवार्य होता है। जांच एजेंसी सुबोध अग्रवाल, पूर्व मंत्री महेश जोशी और बिचौलिए संजय बड़ाया के बीच की मिलीभगत और कमीशन के लेन-देन को घोटाले का मुख्य आधार मान रही है।
अधिकारियों का मानना है कि विभागीय तबादलों और नियुक्तियों में भी इन लोगों का दखल था, जिसने इस भ्रष्टाचार को और बढ़ावा दिया। फिलहाल इस मामले में महेश जोशी और संजय बड़ाया भी न्यायिक हिरासत में हैं।
फर्जी प्रमाण पत्र से हासिल किए टेंडर
जांच में पाया गया कि श्रीगणपति ट्यूबवेल और श्रीश्याम ट्यूबवेल जैसी कंपनियों ने फर्जी कार्य-पूर्णता प्रमाण पत्र का सहारा लेकर लगभग 960 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल किए थे। एसीबी की जांच में सामने आया है कि इन कंपनियों ने फर्जी दस्तावेजों के दम पर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया। बिचौलिए संजय बड़ाया को हाल ही में दिल्ली हवाई अड्डे से थाईलैंड से लौटने पर गिरफ्तार किया गया था।
हाईकोर्ट ने खारिज की थी जमानत याचिकाएं
हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट ने जल जीवन मिशन के टेंडरों से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले में न्यायिक अभिरक्षा में चल रहे चार आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। वहीं, आरोपी अरुण श्रीवास्तव को स्वास्थ्य कारणों के आधार पर सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने साफ किया था कि अभी जांच के कई चरण बाकी हैं और मामले को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
क्या है JJM घोटाला?
पूरा मामला जल जीवन मिशन के तहत 960 करोड़ रुपए के टेंडर घोटाले से जुड़ा हुआ है। यह मिशन हर घर नल से जल पहुंचाने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है।
एसीबी की जांच में पाया गया कि JJM के तहत जारी सरकारी टेंडरों में कुछ लोगों ने कथित अनुभव और कार्य निष्पादन प्रमाण पत्रों का गलत इस्तेमाल कर अवैध रूप से ठेके हासिल किए। यह पूरा मामला भ्रष्टाचार और सरकारी धन बर्बादी का एक गंभीर उदाहरण है।
8 जून को सुनवाई
विशेष अदालत अब 8 जून को इस मामले में सुनवाई करेगी, जिससे साफ होगा कि इस घोटाले की परतें और कितनी गहरी हैं। एसीबी ने अपनी चार्जशीट में सुबोध अग्रवाल के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश किए हैं।
FAQ
- जल जीवन मिशन क्या है?
जल जीवन मिशन (JJM) केंद्र सरकार की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण भारत के प्रत्येक घर तक 'हर घर नल से जल' पहुंचाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को लाल किले से इस मिशन की शुरुआत की थी। इस योजना का नोडल मंत्रालय जल शक्ति मंत्रालय है।मिशन के विस्तारित चरण (जल जीवन मिशन 2.0) के तहत अब ग्रामीण परिवारों को वर्ष 2028 तक नल से शुद्ध पेयजल सुनिश्चित कराने का लक्ष्य रखा गया है।
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