जेएलएन अस्पताल में 227 संविदा नर्सिंगकर्मी हटाए, परिसर में धरना प्रदर्शन
News In Short
- जेएलएन अस्पताल में 227 संविदा नर्सिंग कर्मियों को बिना सूचना के किया गया बर्खास्त।
- कर्मचारियों का आरोप- वित्तीय स्वीकृति मार्च 2027 तक होने के बावजूद सेवा समाप्त कर दी गई।
- राजमैश के तहत आए नर्सिंग स्टाफ के कारण संविदा कर्मियों को हटाया जाना बताया जा रहा है।
- अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन, अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी।
- कर्मचारियों ने कहा- पिछले 10 साल से नर्सिंग स्टाफ के पदों में नहीं हुई बढ़ोतरी।
News In Detail
अजमेर के जेएलएन अस्पताल परिसर में गुरुवार को संविदा नर्सिंग कर्मियों ने सेवा समाप्ति के आदेश के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया। करीब 227 संविदा नर्सिंग कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वे पिछले दो से तीन वर्षों से अस्पताल में लगातार सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन बिना पूर्व सूचना उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया। कर्मचारियों ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी दी है।
वित्तीय स्वीकृति मार्च 2027 तक होने का दावा
प्रदर्शन कर रहे नर्सिंग कर्मियों का कहना है कि उनकी वित्तीय स्वीकृति मार्च 2027 तक है। इसके बावजूद अचानक सेवा समाप्ति के आदेश जारी कर दिए गए। कर्मचारी इस बात को लेकर काफी नाराज हैं कि जब उनकी नियुक्ति की अवधि अभी खत्म नहीं हुई तो फिर उन्हें अचानक क्यों हटाया गया। उन्होंने इसे प्रशासन की मनमानी बताया है।
राजमैश के दायरे पर उठे सवाल
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि जेएलएन मेडिकल कॉलेज में राजमैश के तहत 323 नर्सिंग स्टाफ को पद आवंटित किए गए हैं, जबकि अजमेर मेडिकल कॉलेज राजमैश के दायरे में नहीं आता।
उनका कहना है कि राजमैश का यह नियम यहां लागू नहीं होता, फिर भी इसके नाम पर संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है। उन्होंने इस फैसले को कानूनन गलत बताया है।
227 परिवारों के सामने रोजगार का संकट
नर्सिंग ऑफिसर ने बताया कि संविदा कर्मचारी पिछले कई वर्षों से मॉर्निंग, इवनिंग और नाइट शिफ्ट में लगातार सेवाएं दे रहे हैं। अल्प वेतन में कार्य करने के बावजूद अचानक सेवाएं समाप्त कर देने से 227 परिवारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि या तो राजमैश के कर्मचारियों को अन्यत्र समायोजित किया जाए अथवा संविदा कर्मचारियों की सेवाएं निरंतर जारी रखी जाएं।
भविष्य की भर्ती में बोनस अंक का भी नुकसान
एक अन्य नर्सिंग ऑफिसर ने कहा कि कई कर्मचारी ऐसे हैं जिनकी सेवा अवधि पूरी होने पर भविष्य की भर्ती में बोनस अंक मिलने वाले थे। लेकिन सेवा समाप्ति से उनका यह लाभ भी प्रभावित होगा।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी केवल अपने कार्यकाल की निरंतरता चाहते हैं ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रह सके। बोनस अंक का लाभ उन कर्मचारियों को मिलता है जो लंबे समय तक संविदा पर सेवाएं देते हैं, लेकिन इस फैसले के बाद यह लाभ भी खत्म हो गया है।
पिछले 10 साल से नहीं बढ़े पद
प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों से जेएलएन मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग स्टाफ के स्वीकृत पदों में बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि कई नए विभाग शुरू हो चुके हैं। कर्मचारियों ने मांग की कि राजमैश के पद अलग से स्वीकृत किए जाएं और वर्तमान संविदा नर्सिंग स्टाफ को यथावत रखा जाए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। फिलहाल कर्मचारी धरने पर डटे हैं और प्रशासन से सकारात्मक जवाब का इंतजार कर रहे हैं। वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मामले की समीक्षा की जा रही है और जल्द ही उचित निर्णय लिया जाएगा।
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