जोबनेर कृषि कॉलेज में पोस्टर फाड़ने पर एक्शन, 3 छात्रों को दूसरे कॉलेजों में भेजा
समझें क्या है पूरा मामला
- जोबनेर एग्रीकल्चर कॉलेज में बैनर-पोस्टर फाड़ने पर तीन छात्रों को निकाला।
- यह कदम जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज प्रशासन ने उठाया।
- तीनों छात्रों को हिदायत के साथ अन्य कॉलेजों में स्थानांतरित किया गया है।
- एनएसयूआई ने कॉलेज प्रशासन के इस कदम को अनुचित ठहराया।
- एनएसयूआई का आरोप, इन छात्रों ने कॉलेज से आरएसएस के पोस्टर हटाए थे।
Jaipur: राजस्थान में श्री करण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय से जुड़े जोबनेर के एसकेएन कृषि कॉलेज में बैनर-पोस्टर फाड़ने पर बड़ी कार्रवाई की गई है।
महाविद्यालय प्रशासन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति की सिफारिशों के आधार पर बीएससी (ऑनर्स) कृषि तृतीय वर्ष के तीन छात्रों को सजा के रूप में अन्य कॉलेजों में कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला कॉलेज परिसर में स्थित भाभा हॉस्टल से जुड़ा है। 26 जुलाई 2026 को हॉस्टल परिसर में लगे पोस्टरों को फाड़ने, उन्हें नुकसान पहुंचाने और हॉस्टल के माहौल को बिगाड़ने का मामला सामने आया था। इस पूरी घटना का एक वीडियो क्लिप बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया था।
कॉलेज प्रशासन ने इस मामले में जांच समिति गठित की। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति ने छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाने की सिफारिश की। इसे विश्वविद्यालय के कुलपति ने अपनी मंजूरी दे दी है।
किन छात्रों पर हुई कार्रवाई?
कार्रवाई के तहत बीएससी (ऑनर्स) कृषि भाग-तृतीय के तीन छात्रों को अन्य कृषि कॉलेजों में स्थानांतरित किया गया है।
इनमें कृष्ण कुमार चौधरी को कोटपूतली, आशीष कुमावत को फतेहपुर और साहिल जोशी को पीथनापुरी के कृषि कॉलेजों में भेजा गया है।
इस एक्शन के साथ ही प्रशासन ने तीनों छात्रों को हिदायत दी है कि वे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को न दोहराएं। वर्तमान सेमेस्टर के लिए तीनों छात्रों को आचरण परिवीक्षा पर रखा गया है।
इन्हें अपने-अपने नए कॉलजों में डीन के समक्ष एक शपथ पत्र जमा कराना होगा।
क्या विश्वविद्यालय आरएसएस की शाखाएं बनेंगे?
उधर, एनएसयूआई के नेता निर्मल चौधरी ने आरोप लगाया है कि इन छात्रों का कसूर यह था कि इन्होंने आरएसएस के बैनर-पोस्टर हटाए थे। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब विश्वविद्यालय शिक्षा के केंद्र की जगह आरएसएस की शाखाएं बनेंगे।
चौधरी ने कहा कि यदि परिसर में किसी संगठन के बैनर हटाने पर छात्रों का भविष्य बर्बाद किया जाएगा तो यह स्पष्ट है कि सरकार शिक्षा संस्थानों को वैचारिक गुलामी की ओर धकेल रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन को तत्काल यह कार्रवाई वापस लेनी चाहिए, अन्यथा एनएसयूआई इस मामले में बड़ी लड़ाई लड़ेंगी।
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