जेल में गूंजे मंगल गीत, सजा मंडप, विवाह बंधन में बंधे दो बंदी
समझें क्या है पूरा मामला
- जोधपुर की ओपन जेल में बंदी मूलाराम ने सीमा से शादी की।
- राजस्थान हाई कोर्ट की विशेष अनुमति से यह विवाह संभव हुआ।
- दोनों बंदियों ने जेल में वैदिक मंत्रों के बीच सात फेरे लिए।
- जेल प्रशासन ने इस विवाह की सुरक्षा और व्यवस्थाएं संभालीं।
मुकेश सोनी@जोधपुर
राजस्थान में जोधपुर की मंडोर ओपन जेल बुधवार को शादी के मंडप में बदल गई। यहां उम्रकैद की सजा काट रहे बंदी मूलाराम और सीमा वैदिक मंत्रों के बीच विवाह बंधन में बंधे।
यह पूरा आयोजन राजस्थान हाई कोर्ट की विशेष अनुमति से संभव हुआ। जेल प्रशासन ने सुरक्षा के साथ-साथ सारी रस्में भी पूरी करवाईं। इस शादी ने सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की एक नई मिसाल पेश की।
हाई कोर्ट की खास अनुमति
यह विवाह आम जेल की दिनचर्या से अलग था। राजस्थान हाई कोर्ट ने इसके लिए विशेष अनुमति दी थी। इस फैसले ने दोनों परिवारों की वर्षों पुरानी इच्छा पूरी कर दी। और जेल में शादी कर ली।
मूलाराम के अधिवक्ता कालूराम भाटी के सहायक स्वप्न चौहान ने इस बारे में जानकारी दी। उनके अनुसार हाई कोर्ट के संवेदनशील निर्णय के कारण ही यह शादी हो पाई। यह फैसला दिखाता है कि अदालतें भी इंसानी भावनाओं को समझती हैं।
आमतौर पर जेल को सिर्फ सजा की जगह माना जाता है। लेकिन इस घटना ने एक अलग संदेश दिया। जेल भी सुधार और नई शुरुआत का मौका दे सकती है।
शादी में क्या हुआ
समारोह में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रस्में पूरी हुईं। मूलाराम और सीमा ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ फेरे लिए। यह नजारा जेल परिसर में एक असामान्य लेकिन भावुक पल था।
दोनों परिवारों के सदस्य और रिश्तेदार बड़ी संख्या में पहुंचे। शुभचिंतकों ने भी नवदंपती को आशीर्वाद दिया। सभी ने नए जोड़े को सुखी वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दीं।
सीमा के परिवार से महाराष्ट्र से कोई भी इस शादी में शामिल होने नहीं आ पाया। ऐसे में जेल में बनी सीमा की एक सहेली के पिता राधाकिशन वागेला ने कन्यादान किया।
वागेला परिवार ने ही शादी के कार्ड छपवाए हैं। मंगलवार को मायरा और प्रीतिभोज का कार्यक्रम हुआ।
जेल प्रशासन की तैयारी
इस खास मौके को सफल बनाने के लिए जेल प्रशासन ने पहले से तैयारियां कीं। सुरक्षा से लेकर आयोजन तक, हर पहलू पर ध्यान दिया गया।
ओपन जेल प्रभारी हापू राम ने पूरी व्यवस्था की निगरानी की। उनकी देखरेख में सुरक्षा इंतजाम और शादी की तैयारियां पूरी हुईं।
सेंट्रल जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह शेखावत ने भी कार्यक्रम पर लगातार नजर रखी। उनकी मॉनिटरिंग से पूरा आयोजन बिना किसी बाधा के संपन्न हो सका।
सलाखों के पीछे बनी जोड़ी
मूलाराम और सीमा पिछले करीब डेढ़ साल से ओपन जेल में रह रहे हैं। इसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई और उन्होंने साथ मिलकर जीवन की नई शुरुआत करने का फैसला किया। मूलाराम का कहना है कि कहते हैं जोड़ियां ऊपर वाला बनाता है, लेकिन उनकी जोड़ी यहां आकर बनी है।
मूलाराम ने कहा, हम भी समाज की मुख्य धारा से जुड़ना चाहते हैं। अच्छा आचरण होने की वजह से उम्मीद है कि राजस्थान सरकार आगे हमारी सजा माफ करेगी और हम एक सामान्य जीवन जी सकेंगे।
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