कलेक्टर के सामने ही गिरा तिरंगा, ध्वजारोहण पर हुई शर्मसार करने वाली घटना
समझें क्या है पूरा मामला
- करौली और सवाई माधोपुर में ध्वजारोहण के दौरान बड़ी चूक।
- दोनों जिलों में अधिकारियों के सामने तिरंगा पोल से गिरा।
- घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए।
- स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों पर प्रशासनिक लापरवाही के सवाल उठे।
- ध्वज व्यवस्था में जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग उठी।
स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर जहां पूरा राजस्थान आजादी के जश्न में डूबा नजर आया, वहीं करौली और सवाई माधोपुर जिलों से प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करने वाली दो अप्रत्याशित घटनाएं सामने आईं। दोनों ही जगह आधिकारिक ध्वजारोहण समारोह के दौरान राष्ट्रीय ध्वज पोल से छूटकर नीचे आ गिरा। इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय पर्व की तैयारियों और जमीनी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं।
करौली में जिला कलेक्टर के सामने हुई चूक
करौली जिला मुख्यालय स्थित त्रिलोक चंद माथुर स्टेडियम में जिला स्तरीय मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया जा रहा था। मंच पर जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा ध्वजारोहण के लिए पहुंचे थे।
ध्वजारोहण के समय जब तिरंगे की डोरी खींची गई, तो ध्वज की गांठ नहीं खुल सकी। दबाव बढ़ने के कारण तिरंगा पोल से टूटकर सीधे नीचे आ गिरा। घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद प्रशासनिक अमले और कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई। इसे आयोजन से जुड़े कार्मिकों की सीधी लापरवाही माना जा रहा है।
सवाई माधोपुर में कार्यवाहक कलेक्टर के सामने घटना
सवाई माधोपुर जिला कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान भी ऐसी ही घटना घटी। यहां जिला कलेक्टर कानाराम सीरवी की अनुपस्थिति में कार्यवाहक कलेक्टर गौरव बुडानिया ध्वजारोहण कर रहे थे।
कार्यवाहक कलेक्टर जैसे ही ध्वज फहराने की प्रक्रिया पूरी करने वाले थे, ठीक उसी पल तिरंगा पोल से अचानक नीचे गिर गया। इस अनपेक्षित घटनाक्रम से कार्यवाहक कलेक्टर सहित वहां मौजूद सभी अधिकारी और कर्मचारी क्षण भर के लिए पूरी तरह असहज और हैरान रह गए।
कलेक्ट्रेट परिसर जैसे मुख्य प्रशासनिक केंद्र में ध्वजारोहण से पहले निरीक्षण और री-चेकिंग न होने को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय और गौरवपूर्ण अवसर पर दोनों जिलों से सामने आई इन घटनाओं के बाद स्थानीय निवासियों और सोशल मीडिया यूजर्स में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि जब पूरे देश में आजादी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है, तब इस तरह की लापरवाही बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
ध्वजारोहण से पहले पोल, रस्सी और ध्वज की गांठ की जांच करना संबंधित आयोजन टीम की प्राथमिक जिम्मेदारी मानी जाती है। ऐसे में लोग अब यह सवाल उठा रहे हैं कि इन दोनों मामलों में जिम्मेदार कार्मिकों पर क्या कार्रवाई की जाएगी और भविष्य के लिए क्या सबक लिए जाएंगे।
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