केवलादेव में गोवर्धन ड्रेन से आएगा पानी, मगर फूड चेन पर गंभीर खतरा
समझें क्या है पूरा मामला
- विश्व धरोहर केवलादेव पार्क में गहराया जल संकट।
- पांचना से नहीं मिलेगा पानी, गोवर्धन ड्रेन पर निर्भरता।
- पांचना बांध 60% भरा, 90% नियम के चलते पानी नहीं।
- गोवर्धन ड्रेन के पानी से घना के इकोसिस्टम को खतरा।
- केवलादेव को 550 MCfT पानी की जरूरत।
भरतपुर का यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान इस बार पानी के संकट से जूझ रहा है। पांचना बांध इस साल मात्र 60 प्रतिशत ही भरा है। बांध के गेट 90 प्रतिशत से अधिक भराव पर ही खुलते हैं, इसलिए पार्क को वहां से पानी मिलने की उम्मीद कम है।
अब प्रबंधन ने गोवर्धन ड्रेन से पानी लाने का विकल्प चुना है। लेकिन इस ड्रेन के पानी की गुणवत्ता और उससे पार्क के नाजुक इकोसिस्टम पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर गंभीर चिंताएं हैं।
पांचना बांध से पानी क्यों नहीं मिलेगा?
रामसर साइटकेवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक चेतन कुमार बी. वी. ने बताया कि 16 अगस्त की स्थिति में पांचना बांध अपनी क्षमता का 60% ही भरा है। नियमानुसार, बांध के गेट 90% से अधिक भरने पर ही खोले जाते हैं। चूंकि बांध अभी उस स्तर पर नहीं है, इसलिए इस बार पांचना से पानी मिलना मुश्किल है।
गोवर्धन ड्रेन क्यों जरूरी है?
पार्क प्रबंधन के पास दो वैकल्पिक स्रोत हैं - गोवर्धन ड्रेन और चंबल पाइपलाइन। चंबल से सीमित मात्रा में पानी मिलता है और वह पेयजल आपूर्ति से जुड़ा है।
इसलिए, गोवर्धन ड्रेन इस बार पानी का मुख्य स्रोत बन सकता है। पार्क को पर्यटन सीजन के दौरान लगभग 550 MCfT पानी की जरूरत होती है। अच्छी बारिश के कारण इस साल 450 MCfT से काम चलने का अनुमान है।
गोवर्धन ड्रेन से क्या खतरा है?
नेचर गाइड रणधीर सिंह ने गोवर्धन ड्रेन के पानी को लेकर बड़ी चिंता जताई है। उन्होंने बताया ड्रेन के पानी के साथ बाहरी क्षेत्रों से रसायन और दूसरे हानिकारक तत्व बहकर आते हैं।
पांचना के पानी के साथ 57 प्रकार की मछलियां, कछुए, घोंघे और अन्य जलीय जीव पार्क तक पहुंचते थे। ये जीव पक्षियों के भोजन का आधार हैं।
ड्रेन के पानी में जलीय जीवों का अभाव है। इसके अलावा रासायनिक पानी से पार्क की वनस्पति और प्राकृतिक आवास में बदलाव आ सकता है, जो प्रवासी पक्षियों के लिए हानिकारक होगा।
क्या होगी आगे की योजना?
प्रबंधन गोवर्धन ड्रेन का पानी बिना जांच के पार्क में नहीं लेगा। विश्व धरोहर होने के नाते, पानी की गुणवत्ता की जांच कराना अनिवार्य है। अगले 15 दिनों में बारिश होने की उम्मीद है, जिससे प्राकृतिक जल की उपलब्धता बढ़ सकती है और बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम हो सकती है।
FAQ
- केवलादेव नेशनल पार्क में जल संकट का मुख्य कारण क्या है?
इस सीजन में कम बारिश होना और करौली के पांचना बांध से पानी न छोड़ा जाना जल संकट का मुख्य कारण है। - आपात स्थिति में केवलादेव नेशनल पार्क प्रशासन कहां से पानी की पूर्ति कर रहा है?
प्रशासन द्वारा धौलपुर की चंबल नदी से पानी लिया जा रहा है और वाटर टैंकरों से भी जल आपूर्ति की जा रही है। - चंबल का पानी पक्षियों और घना इकोसिस्टम के लिए पूरी तरह सही क्यों नहीं है?
चंबल के पानी में बीज और छोटी मछलियां (भोजन) नहीं होते, जो पांचना बांध के पानी में प्राकृतिक रूप से मौजूद रहते हैं और पक्षियों का मुख्य आहार हैं।
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