कांग्रेस में दो पूर्व विधायकों की री-जॉइनिंग पर ब्रेक, गुटों की सहमति का इंतजार
समझें क्या है पूरा मामला
- कांग्रेस में दो पूर्व विधायकों की घर वापसी, टिकट नहीं मिलने पर की थी बगावत
- खिलाड़ी लाल बैरवा और रामचंद्र सराधना की वापसी पर स्थानीय नेताओं का विरोध
- 4 महीने BJP में रहे, अब फिर कांग्रेस लौटने की तैयारी, पार्टी में अंदरूनी कलह
- विराटनगर और धौलपुर में नाराजगी, वापसी से पहले मनाने की कवायद
- अनुशासन समिति से मिली हरी झंडी, लेकिन अभी री-जॉइनिंग पर ब्रेक
राजस्थान कांग्रेस में एक बार फिर बड़ी सियासी हलचल है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट न मिलने पर बागी हो गए दो पूर्व विधायक - खिलाड़ी लाल बैरवा और रामचंद्र सराधना - अब पार्टी में वापसी करना चाहते हैं।
उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात की और फिर से पार्टी के लिए काम करने की इच्छा जताई। हालांकि, उनकी इस वापसी का स्थानीय स्तर पर विरोध हो रहा है, जिसके चलते री-जॉइनिंग पर अभी रोक लग गई है।
क्या है दोनों नेताओं की कहानी?
खिलाड़ी लाल बैरवा: 2023 के चुनाव में टिकट न मिलने पर नाराज होकर उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी। मार्च 2024 में वे भाजपा में शामिल हो गए, लेकिन मात्र 4 महीने बाद ही (जुलाई 2024) उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया, क्योंकि उनकी विचारधारा पार्टी से मेल नहीं खाती थी। लंबे राजनीतिक वनवास के बाद अब वे फिर से कांग्रेस लौटना चाहते हैं।
रामचंद्र सराधना: विराटनगर के पूर्व विधायक ने भी टिकट कटने के बाद कांग्रेस छोड़ दी थी। वे चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (ASP) में शामिल हो गए और वहां से चुनाव लड़ा। अब उन्होंने पुरानी गलतफहमियों को दूर कर फिर से कांग्रेस में लौटने का फैसला किया है।
वापसी में क्या रुकावटें हैं?
हालांकि अनुशासन समिति ने दोनों की वापसी को मंजूरी दे दी है, लेकिन पार्टी के भीतर विरोध बड़ी बाधा है।
रामचंद्र सराधना की वापसी का सबसे मुखर विरोध विराटनगर के कांग्रेस नेता इंद्राज गुर्जर और उनके समर्थक कर रहे हैं। वे पिछले चुनावी समीकरणों से असहज हैं।
खिलाड़ी लाल बैरवा की वापसी को लेकर धौलपुर/बसेड़ी क्षेत्र में कांग्रेस जिलाध्यक्ष संजय जाटव और उनके समर्थकों ने कड़ा ऐतराज जताया है।
अब क्या होगा?
कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व स्थानीय नेताओं की नाराजगी को समझता है। वह जानता है कि जिला स्तर के नेताओं को भरोसे में लिए बिना जल्दबाजी में री-जॉइनिंग से पार्टी में फूट पड़ सकती है। इसलिए फिलहाल स्थानीय गुटों को मनाने की कवायद शुरू कर दी गई है।
जब तक नाराज नेताओं की सहमति नहीं बनती, तब तक दोनों पूर्व विधायकों की आधिकारिक वापसी अधर में लटकी रहेगी।
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