70 दिन डायलिसिस के बाद बोलीं प्रसूताएं, किडनी ट्रांसप्लांट करो नहीं तो इलाज बंद
समझें क्या है पूरा मामला
- किडनी फेल पांच प्रसूताओं ने सरकार को दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम।
- डायलिसिस से तंग आकर बोलीं- किडनी ट्रांसप्लांट कराओ या जहर दे दो।
- कोटा अस्पताल में 70 दिन से डायलिसिस पर, सरकार से लगाई गुहार।
- परिजनों का आरोप, नकली दवाओं और लापरवाही से किडनी फेल।
- प्रसूताएं बोलीं- डायलिसिस ही नहीं करवाएंगी, अस्पताल में ही दम तोड़ेंगी।
राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज में 5 प्रसूताओं की किडनी फेल हुई थी। 70 दिन से डायलिसिस पर। परिजनों की 48 घंटे में किडनी ट्रांसप्लांट की मांग, कलेक्टर को ज्ञापन दिया।
कोटा मेडिकल कॉलेज में 70 दिन से भर्ती पांच प्रसूताओं के परिवारों ने सरकार से न्याय की गुहार लगाई है। मई में सिजेरियन ऑपरेशन डिलीवरी के बाद इन महिलाओं की दोनों किडनियां फेल हो गई थीं। अब वे हर दो से तीन दिन में डायलिसिस के सहारे जी रही हैं।
परिजनों का आरोप है कि यह अस्पताल की लापरवाही और कथित नकली दवाओं की वजह से हुआ। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन देकर 48 घंटे में किडनी ट्रांसप्लांट की मांग की है।
कौन हैं ये पांच महिलाएं?
4 मई से 8 मई 2026 के बीच कोटा के सरकारी अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के लिए भर्ती हुई पांच महिलाओं को अब भी अस्पताल में ही रहना पड़ रहा है।
अस्पताल में वर्तमान में रागिनी मीणा, आरती चौबदार, पिंकी, सुशीला और धन्नी सुमन भर्ती हैं। इन सभी की दोनों किडनियां पूरी तरह फेल हो चुकी हैं। जीवन भर डायलिसिस पर रहना होगा।
70 दिन, हर दो दिन डायलिसिस का दर्द
धन्नी सुमन के पति मोहनलाल ने बताया कि 4 मई को पत्नी को डिलीवरी के लिए भर्ती किया था। सीजेरियन के बाद किडनी फेल हो गई।
आज 70 दिन हो गए हैं अस्पताल में। हर दो से तीन दिन में डायलिसिस हो रही है। लगातार डायलिसिस से असहनीय शारीरिक और मानसिक पीड़ा हो रही है।
रागिनी के भाई विकास ने कहा कि डायलिसिस पर जीवन भर रहना एक बोझ बन गया है। यह सजा हम क्यों भुगतें, लापरवाही हमारी नहीं थी।
परिजनों की मांग और 48 घंटे का अल्टीमेटम
परिजनों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट कहा है कि यदि 48 घंटे में किडनी ट्रांसप्लांट पर सरकार का कोई फैसला नहीं आता तो मरीज डायलिसिस करवाना बंद कर देंगी।
परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में लापरवाही हुई तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह इन महिलाओं का किडनी ट्रांसप्लांट कराए। परिवार आर्थिक संकट से भी जूझ रहे हैं।
अस्पताल प्रशासन और सरकार का पक्ष
इस खबर के लिखे जाने तक अस्पताल प्रशासन या राज्य सरकार की ओर से 48 घंटे के अल्टीमेटम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
FAQ
- किडनी फेल होने के बाद डायलिसिस और ट्रांसप्लांट में क्या फर्क है?
डायलिसिस एक मशीन से खून साफ करने की प्रक्रिया है जो हर दो से तीन दिन में करनी होती है। किडनी ट्रांसप्लांट में किसी डोनर की किडनी लगाई जाती है जिससे मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। - कोटा में सिजेरियन के बाद किडनी फेल का मामला क्या है?
मई 2026 में कोटा के सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी के बाद कई प्रसूताओं की किडनी फेल हो गई थी। इनमें से कुछ की मौत भी हुई। आरोप है कि नकली या घटिया ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल हुआ।
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