आरोपों के बीच किरोड़ी ने मारा एक और छापा, बोले- हाथी के पीछे...
समझें क्या है पूरा मामला
- कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने जयपुर बायो फर्टिलाइजर फैक्ट्री पर मारा छापा।
- दोनों गेट बंद पाए गए, मंत्री ने ताला तोड़कर अंदर निरीक्षण किया।
- 45 डिग्री में बनाई जा रही खाद में नियमों की अनदेखी मिली।
- पैकेट पर 24 महीने लिखा, असल में खाद केवल 6 महीने तक कारगर थी।
- लेबलिंग, भंडारण और गुणवत्ता में गड़बड़ी पर सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन।
Jaipur: राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने गुरुवार को जयपुर के कानोता में जयपुर बायो फर्टिलाइजर फैक्ट्री पर अचानक छापा मारा। वहां मंत्री ने खुद पर लगे भ्रष्टाचार और वसूली के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा- कहते हैं न, हाथी के पीछे...।
इससे पहले मंत्री किरोड़ी जब फैक्ट्री पहुंचे तो दोनों गेट पर ताला लगा था। मंत्री ताला तोड़कर अंदर पहुंचे तो वहां जैविक उर्वरक निर्माण, पैकेजिंग, लेबलिंग और भंडारण - हर जगह नियमों की अनदेखी मिली। नमूने जांच के लिए भेज दिए गए हैं।
भरी गर्मी में काम कर रहे थे मजदूर
मंत्री ने छापेमारी में पाया कि हीराबाला इंडस्ट्रियल एरिया स्थित इस फैक्ट्री में मजदूर भरी गर्मी में एक कोने के कमरे में काम कर रहे थे। पसीने से तरबतर मजदूरों के बीच मंत्री ने सीलबंद बोरों को खुलवाकर नमूने लिए। अधिकारियों को जरूरी निर्देश भी दिए।
सबसे बड़ी अनियमितता तापमान को लेकर सामने आई। जैविक उर्वरक बनाने के लिए करीब 20 डिग्री सेल्सियस तापमान जरूरी माना जाता है। लेकिन इस फैक्ट्री में 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में उर्वरक तैयार किया जा रहा था।
विशेषज्ञों के अनुसार इतने अधिक तापमान में उर्वरक में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं। इससे खाद की गुणवत्ता और असर दोनों कमजोर पड़ जाते हैं। किसान ऐसी खाद खरीदते हैं तो उन्हें फायदा नहीं मिलता।
गलत लिखी वैधता
जांच में एक और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। दानेदार जैविक उर्वरक की वैधता अवधि सामान्यतः 6 महीने होती है। लेकिन इस फैक्ट्री के उत्पादों पर 24 महीने तक उपयोग योग्य बताया गया था।
अधिकारियों के मुताबिक यह जानकारी किसानों को गुमराह करने वाली है। किसान लंबी एक्सपायरी देखकर उत्पाद खरीदता है, लेकिन खाद असर करना पहले ही बंद कर चुकी होती है।
लेबलिंग में भी मिली गड़बड़ी
निरीक्षण में पैकेजों पर भ्रामक और नियम विरुद्ध जानकारियां लिखी मिलीं। यह उर्वरक नियंत्रण आदेश (Fertilizer Control Order), 1985 की धारा-19 का उल्लंघन है। अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेज और नमूने जब्त कर लिए।
कच्चे माल के रख-रखाव में भी अव्यवस्था मिली। कई जगहों पर पहचान के लेबल तक नहीं लगे थे। इससे गुणवत्ता नियंत्रण की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए।
मंत्री बोले - धोखा बर्दाश्त नहीं
कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं होगा। जांच में दोषी पाए जाने वाले फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री पर लगे भ्रष्टाचार और वसूली के आरोपों पर उन्होंने कहा कि ये आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा - कहते हैं न, हाथी के पीछे...।
यह कोई पहला छापा नहीं
किरोड़ी लाल मीणा पिछले कुछ समय से पूरे प्रदेश में खाद और बीज की फैक्ट्रियों पर छापेमारी कर रहे हैं। इससे पहले सीकर के रीको एरिया में श्री बालाजी एग्रो इंडस्ट्रीज पर कार्रवाई हो चुकी है। जोधपुर में तीन फैक्ट्रियों और बोरानाडा स्थित बालाजी मूंगफली फैक्ट्री का भी निरीक्षण किया जा चुका है।
FAQ
- जैविक उर्वरक बनाने के लिए कितना तापमान जरूरी है?
जैविक उर्वरक निर्माण के लिए करीब 20 डिग्री सेल्सियस तापमान जरूरी माना जाता है। इससे ज्यादा तापमान में खाद में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं। जयपुर की इस फैक्ट्री में 45 डिग्री तापमान में खाद बनाई जा रही थी। - उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 की धारा-19 क्या कहती है?
यह धारा उर्वरक के पैकेट पर सही और स्पष्ट जानकारी देना अनिवार्य बनाती है। भ्रामक या गलत लेबलिंग इसका उल्लंघन मानी जाती है। दोषी पाए जाने पर फैक्ट्री संचालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। - किसान नकली जैविक खाद की पहचान कैसे करें?
पैकेट पर वैधता अवधि, निर्माण तारीख और लाइसेंस नंबर जरूर जांचें। सामान्यतः दानेदार जैविक उर्वरक की शेल्फ लाइफ 6 महीने होती है। सरकारी कृषि केंद्र या अधिकृत विक्रेता से ही खाद खरीदें।
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