कृषि मंत्री का 3 फैक्ट्रियों पर छापा, मिला नकली पोटाश और अवैध बायो-स्टिमुलेंट
समझें क्या है पूरा मामला
- कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने जयपुर में तीन फर्टिलाइजर फैक्ट्रियों पर छापा मारा।
- नंदी फर्टिलाइजर्स में नमक के कचरे से नकली म्यूरेट ऑफ पोटाश बन रहा था।
- समृद्धि सर्विसेज और चित्तारी एग्री केयर में प्रतिबंधित बायो-स्टिमुलेंट मिले।
- 1,500 रुपए प्रति टन की सब्सिडी गलत तरीके से उठाने की भी आशंका।
- मंत्री ने दोषियों के खिलाफ FIR और राज्य में विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए।
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने जयपुर के वी.के.आई. इलाके में तीन फर्टिलाइजर फैक्ट्रियों पर औचक छापेमारी की। पहली सील फैक्ट्री नंदी फर्टिलाइजर्स में नमक के कचरे से नकली म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP – Muriate of Potash) बनाई जा रही थी।
दूसरी समृद्धि सर्विसेज में प्रतिबंधित बायो-स्टिमुलेंट की अवैध सप्लाई पकड़ी गई। तीसरी चित्तारी एग्री केयर में भी बिना लाइसेंस के खाद और अवैध उत्पाद मिले।
इसके साथ ही 1500 रुपए प्रति टन की सरकारी सब्सिडी में घोटाले की आशंका जताई गई है। मंत्री ने FIR दर्ज करने और विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
नमक के कचरे से पोटाश
सबसे बड़ा खुलासा नंदी फर्टिलाइजर्स में हुआ। यह फैक्ट्री पहले से सील थी। फिर भी उसे खुलवाकर कृषि मंत्री ने औचक निरीक्षण किया तो हैरान कर देने वाली बात सामने आई।
फैक्ट्री में म्यूरेट ऑफ पोटाश यानी MOP बनाया जा रहा था। लेकिन इसे बनाने में असली कच्चे माल की जगह नमक के अपशिष्ट यानी कचरे का इस्तेमाल हो रहा था।
कृषि मंत्री ने इसे किसानों के साथ बहुत बड़ा धोखा बताया। उन्होंने कहा कि यह किसानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
प्रतिबंधित बायो-स्टिमुलेंट की अवैध सप्लाई
रोड नंबर-7 स्थित समृद्धि सर्विसेज के सीएंडएफ (Carrying and Forwarding) गोदाम पर छापेमारी में बड़ा खुलासा हुआ। यहां बिना अनुमति के बायो-स्टिमुलेंट की सप्लाई हो रही थी जबकि राजस्थान में इसकी बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू है।
इसी तरह चित्तारी एग्री केयर कंपनी में भी बिना अनुमति के बायो-स्टिमुलेंट और अन्य अवैध कृषि उत्पाद पाए गए। यहां बिना लाइसेंस का तरल और किण्वित जैविक खाद भी बरामद हुआ।
कई उत्पादों पर निर्माण तिथि, एक्सपायरी तिथि और अन्य जरूरी जानकारियां उर्वरक नियंत्रण आदेश1985 के मानकों के अनुरूप नहीं थीं।
सब्सिडी घोटाले की आशंका
इस पूरे मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। अधिकारियों को आशंका है कि जो बिना लाइसेंस का जैविक खाद पकड़ा गया है, उस पर भारत सरकार की ओर से मिलने वाली 1500 रुपए प्रति टन की सब्सिडी गलत तरीके से उठाई गई है।
यानी एक तरफ नकली और घटिया खाद किसानों को बेची जा रही थी और दूसरी तरफ सरकारी सब्सिडी भी हड़पी जा रही थी। इस सब्सिडी घोटाले की गहन जांच की जा रही है।
FIR के निर्देश, प्रदेशव्यापी अभियान चलेगा
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अधिकारियों को तत्काल कई निर्देश दिए। संदिग्ध फर्टिलाइजर की बिक्री तुरंत बंद कराई जाए। उत्पादों के सैंपल जांच के लिए भेजे जाएं। दोषी कंपनियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
मंत्री ने प्रदेशभर में ऐसे अवैध गोदामों और इकाइयों की धरपकड़ के लिए विशेष जांच अभियान चलाने के भी निर्देश दिए।
किरोड़ी बोले - किसानों के साथ जीरो टॉलरेंस
डॉ. मीणा ने कहा कि नकली और घटिया कृषि उत्पाद किसानों की मेहनत, आय और भूमि की उर्वरता को भारी नुकसान पहुंचाते हैं।
राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्रवाई जारी रहेगी।
FAQ
- बायो-स्टिमुलेंट क्या हैं?
बायो-स्टिमुलेंट (जैव-उत्तेजक) ऐसे प्राकृतिक पदार्थ या सूक्ष्मजीव होते हैं जो पौधों की भीतरी ताकत बढ़ाते हैं। ये कोई खाद (पोषक तत्व) या कीटनाशक नहीं हैं, बल्कि पौधों के विकास की प्राकृतिक प्रक्रियाओं को तेज करके उन्हें मजबूत करते हैं। ये पौधों को सूखा, अत्यधिक गर्मी या ठंड जैसे पर्यावरणीय तनावों को सहने में मदद करते हैं।
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