आमिर खान जिस प्लेटफॉर्म को करते थे प्रमोट; उससे मिले फेक प्रोडक्ट, अब नोटिस जारी
समझें क्या है पूरा मामला
- कोटा कंज्यूमर फोरम ने आमिर खान को भेजा नोटिस।
- नोटिस में 18 सितंबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश।
- 7 साल पुराना है मामला, पुलिस लगा चुकी है FR।
- खान के साथ ई-कॉमर्स कंपनी के संस्थापकों को भी कोटा बुलाया।
- ई-कॉमर्स साइट से मंगाए बेल्ट-वॉलेट, जो नकली निकले थे।
कोटा जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान को नोटिस भेजा है। यह नोटिस एक ई-कॉमर्स शॉपिंग वेबसाइट को भी भेजा गया है। मामला 2019 में ऑनलाइन मंगाए गए नकली प्रोडक्ट से जुड़ा है।
आमिर खान को 18 सितंबर 2026 को कोटा में पेश होने का आदेश दिया गया है। यह मामला उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के तहत दर्ज किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
परिवादी इंद्र मोहन सिंह हनी ने 2019 में एक ऑनलाइन ई-कॉमर्स वेबसाइट से एक नामी कंपनी के बेल्ट और वॉलेट मंगवाए थे । प्रोडक्ट मिलने के बाद उन्हें ये नकली लगे। उन्होंने कंपनी के कोटा स्थित अधिकृत शोरूम में जाकर इनकी जांच करवाई, जहां इन्हें नकली बताया गया।
इसके बाद उन्होंने गुमानपुरा थाने में मुकदमा दर्ज करवाया, लेकिन पुलिस ने बाद में FR (Final Report) लगा दी। इसके बाद पीड़ित ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
आयोग ने क्या किया?
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने ई-कॉमर्स शॉपिंग कंपनी के संस्थापक कुणाल बहल, रोहित बंसल और तत्कालीन ब्रांड एंबेसडर आमिर खान को पार्टी बनाया है।
सभी को 18 सितंबर 2026 को कोटा में आयोग के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। परिवादी के एडवोकेट अशफाक अंसारी और रिपु दमन सिंह ने इस बात की पुष्टि की है।
कानूनी पहलू क्या हैं?
यह मामला उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है। परिवादी ने आयोग में धारा 35 के तहत संशोधित परिवाद पेश किया है। इसमें नकली प्रोडक्ट की सप्लाई और भ्रामक विज्ञापन के जरिए उपभोक्ताओं को गुमराह करने का आरोप है।
ब्रांड एंबेसडर के तौर पर आमिर खान पर यह जिम्मेदारी है कि वे प्रोडक्ट की प्रामाणिकता सुनिश्चित करें। उपभोक्ता आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है और सभी पक्षों को तलब किया है।
आगे क्या होगा?
अब 18 सितंबर 2026 को आयोग में सुनवाई होगी। आमिर खान, ई-कॉमर्स कंपनी के संस्थापक और अन्य संबंधित पक्षों को इस तारीख को कोटा आयोग के समक्ष पेश होना होगा। अगर वे पेश नहीं होते हैं तो आयोग एकतरफा कार्यवाही कर सकता है। मामले में आगे की दिशा इसी सुनवाई के बाद तय होगी।
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