खुले नाले में गिरने से पूर्व प्रिंसिपल की मौत, एक्सएन, एएन और जेईएन निलंबित, ठेकेदार ब्लैकलिस्ट

Ashish Bhardwaj | May 22, 2026, 18:18 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के कोटा शहर में एक खुले नाले में पूर्व प्रिंसिपल की मौत के बाद विकास प्राधिकरण हरकत में आया है। कोटा विकास प्राधिकरण के तीन इंजीनियरों को निलंबित किया गया है। साथ ही ठेकेदार पर भी एक्शन किया गया है।

News In Short

  • कोटा में खुले नाले में पूर्व प्रिंसिपल की मौत पर जागा प्रशासन।
  • कोटा विकास प्राधिकरण के तीन इंजीनियरों को किया गया सस्पेंड।
  • ​दोषी कांट्रैक्टर (ठेकेदार) को 6 महीने के लिए किया ब्लैकलिस्ट।
  • ठेकेदार पर 17.23 लाख रुपए से अधिक का जुर्माना भी लगाया है।

News In Detail

Kota: राजस्थान में कोटा के बोरखेड़ा-थेकड़ा लिंक रोड पर खुले नाले में बाइक गिरने से एक रिटायर्ड प्रिंसिपल की मौत के बाद कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) जाग गया है। उसने इस हादसे में प्रथम दृष्टया गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद केडीए ने तीन इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है। साथ ही दोषी कांट्रैक्टर (ठेकेदार) को 6 महीने के लिए ब्लैकलिस्ट करते हुए उस पर 17.23 लाख रुपए से अधिक का जुर्माना लगाया है।



​जांच के बाद उठाया कदम

यह सख्त कदम शुक्रवार सुबह उपायुक्त प्रथम एवं निदेशक अभियांत्रिकी की संयुक्त जांच टीम के गठन और उसकी रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया।



प्राधिकरण के सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार घटना में कार्य के प्रति घोर लापरवाही बरतने के आरोप में अधिशाषी अभियंता (XEn) सागर मीणा, सहायक अभियंता (AEn) लाल चन्द्र मटोरिया और कनिष्ठ अभियंता (JEn) विनोद मण्डावत को सस्पेंड कर दिया गया। निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार इंजीनियर नरेन्द्र कुमार गुप्ता को 6 माह तक प्राधिकरण की सभी निविदाओं से ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया है।



अनुबंध की शर्त संख्या 40 (सुरक्षा मानकों की पालना न करना) का उल्लंघन करने पर ठेकेदार पर कुल कार्यादेश राशि का 10 प्रतिशत यानी 17,23,712 रुपये का जुर्माना (शास्ति) भी ठोंका गया है।



रातभर नाले में दबे रहे प्रिंसिपल

दरअसल, कोटा के सुभाष नगर द्वितीय निवासी रामेश्वर रावत (60 वर्ष) महज दो महीने पहले ही झाड़ गांव स्थित सरकारी स्कूल से प्रिंसिपल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। बुधवार को उन्होंने पहले अपने समाज की एक बैठक में हिस्सा लिया। इसके बाद अपने पुराने स्टाफ व परिचितों को रिटायरमेंट की खुशी में एक होटल में पार्टी दी थी। देर रात जब वह अपनी मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे, तभी गोकुल कॉलोनी के समीप सड़क किनारे एक खुले नाले में उनकी बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई।



नाले के खुले होने और वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण प्रिंसिपल रामेश्वर रावत बाइक सहित गहरे नाले में जा गिरे और पूरी रात उसी के नीचे दबे रह गए। उधर, घर न पहुंचने पर परिजनों ने रातभर उनके मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन वह लगातार स्विच ऑफ आता रहा, जिससे परिवार में चिंता फैल गई।



परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

गुरुवार सुबह करीब 10 बजे गोकुल कॉलोनी के स्थानीय निवासियों ने नाले के भीतर एक लावारिस मोटरसाइकिल पड़ी देखी। इसकी सूचना तुरंत बोरखेड़ा थाना पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंचे बोरखेड़ा थाने के एएसआई धर्मवीर सिंह और पुलिस टीम ने जब क्रेन व स्थानीय लोगों की मदद से बाइक को बाहर निकलवाया, तो उसके नीचे एक व्यक्ति दबा हुआ मिला।



पुलिस उन्हें एम्बुलेंस से एमबीएस (MBBS) अस्पताल लेकर पहुंची, जहां डॉक्टरों ने उन्हें देखते ही मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने बाइक के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर मृतक की पहचान रामेश्वर रावत के रूप में की और उनके परिजनों को सूचित किया। शव को फिलहाल एमबीएस अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया है।


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इस घटना के बाद मृतक के भतीजे मनीष रावत और अन्य परिजनों ने नगर प्रशासन तथा कोटा विकास प्राधिकरण के खिलाफ गहरा रोष व्यक्त करते हुए गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि शहर में जगह-जगह खुले पड़े नाले और उखड़ी हुई सड़कें आए दिन जानलेवा हादसों को निमंत्रण दे रही हैं, लेकिन बार-बार की शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहते हैं। यदि समय रहते नाले को कवर किया गया होता या वहां बैरिकेडिंग व रिफ्लेक्टर लगाए गए होते, तो आज एक हंसता-खेलता परिवार इस तरह तबाह नहीं होता।



​सुरक्षा मानकों की 100% पालना के निर्देश

इस हादसे से मचे हड़कंप के बाद कोटा विकास प्राधिकरण ने भविष्य के लिए कड़े तेवर अख्तियार कर लिए हैं। प्राधिकरण की ओर से शहर में चल रहे सभी विकास कार्यों में लगे समस्त अभियंताओं को सख्त पाबंद किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों का बारीकी से निरीक्षण करें।



प्राधिकरण ने कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय या जानलेवा घटना की पुनरावृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी निर्माण स्थलों और संवेदनशील क्षेत्रों में समय-समय पर जारी सुरक्षा संबंधी समस्त मानकों की शत-प्रतिशत (100%) पालना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए, अन्यथा संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ इससे भी अधिक कठोर कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।



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