कोटा में गर्भवती महिलाओं की मौत का मामला: चार जांच कमेटियों ने दी क्लीनचिट, निलंबित तीन डॉक्टर हुए बहाल

Jageshwar prasad | Oct 03, 2026, 13:06 IST
कोटा में गर्भवती महिलाओं की मौत मामले में तीन डॉक्टर हुए बहाल
कोटा के अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की मौत के मामले में चार जांच कमेटियों ने डॉक्टरों को क्लीनचिट दी है। इस जांच के कारण निलंबित तीन डॉक्टरों को बहाल किया गया है। विपक्ष और जनता के आक्रोश के कारण राज्य सरकार ने कार्रवाई की थी। पीड़ित परिवार ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • कोटा गर्भवती महिलाओं की मौत मामले में डॉक्टर्स को राहत।
  • चार जांच कमेटियों ने डॉक्टर्स को दी क्लीनचिट।
  • निलंबित तीनों डॉक्टर हुए बहाल।
  • जांच में डॉक्टरों की कोई लापरवाही नहीं मिली।
  • पीड़ित परिवार बोला, जांच रिपोर्ट हो सार्वजनिक।

कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की मौत और किडनी फेल्योर के बहुचर्चित मामले में बड़ी राहत सामने आई है। इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए गठित चार अलग-अलग उच्चस्तरीय कमेटियों ने डॉक्टरों को पूरी तरह क्लीनचिट (Clean Chit) दे दी है।



जांच में सामने आया है कि इस दुखद घटनाक्रम में चिकित्सकों की ओर से कोई चिकित्सकीय लापरवाही नहीं बरती गई थी। कमेटियों की रिपोर्ट आने के तुरंत बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने निलंबित किए गए तीनों वरिष्ठ डॉक्टरों को बहाल कर दिया है।



क्या था पूरा मामला?

मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में मई महीने में भर्ती प्रसूताओं के किडनी फेल्योर के गंभीर मामले सामने आए थे। इसके बाद इसी तरह का मामला जेके लोन अस्पताल में भी आया था। इसके बाद कई प्रसूताओं की असमय मौत से भारी हंगामा मच गया था।



विपक्ष और जनता के भारी आक्रोश को देखते हुए राज्य सरकार ने चिकित्सकों और नर्सिंग कर्मियों पर कार्रवाई की थी। सरकार ने आनन-फानन में कदम उठाया। 9 मई को कोटा मेडिकल कॉलेज के तीन डॉक्टरों को निलंबित कर दिया गया था।



इनमें गायनी विभाग के प्रोफेसर डॉ. बीएल पाटीदार शामिल थे। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. खुशबू मीणा को भी निलंबित किया गया था। सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नवनीत कुमार पर भी कार्रवाई हुई थी।



चार कमेटियों ने की जांच



घटनाक्रम के बाद बनाई गई चार कमेटियों ने इन तीनों डॉक्टरों को क्लीनचिट दी है। इसके बाद मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट की जॉइंट सेक्रेटरी डॉ. ज्योति चौहान ने शुक्रवार को तीनों डॉक्टरों की बहाली के आदेश जारी कर दिए हैं।



डॉ. चौहान के मुताबिक राज्य सरकार ने 9 मई 2026 को कार्रवाई करते हुए तीनों डॉक्टरों को सस्पेंड किया था। इस मामले में मेडिकल कॉलेज कोटा ने अपने स्तर पर एक जांच कमेटी गठित की थी। इसके बाद सरकार ने मेडिकल कॉलेज जयपुर से भी कमेटी भेजी थी।



मामला काफी ज्यादा हाईलाइट होने पर ऑल इंडिया मेडिकल साइंसेज की टीम भी कोटा भेजी गई थी। इस टीम में दिल्ली के साथ-साथ जोधपुर और अन्य एम्स के डॉक्टर कोटा पहुंचे थे। इसके साथ ही नेशनल हेल्थ मिशन ने भी एडिशनल डायरेक्टर की अगुवाई में जांच कमेटी गठित की थी।



कमेटियों ने क्या पाया



मामले की जांच के लिए कोटा, जयपुर, जोधपुर और दिल्ली की चार कमेटियों ने क्लीयरेंस दी है। चारों कमेटियों ने दवाओं, उपचार की प्रक्रिया, संक्रमण के स्रोतों और केस हिस्ट्री की तकनीकी पड़ताल की।



इसके बाद स्पष्ट किया कि डॉक्टरों ने प्रोटोकॉल के तहत इलाज किया था। उनकी कोई व्यक्तिगत गलती नहीं थी। चिकित्सा शिक्षा विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. ज्योति चौहान ने आदेश जारी कर तीनों चिकित्सकों का निलंबन रद्द कर दिया।



तीनों को दोबारा कोटा मेडिकल कॉलेज में ही पदस्थापित कर दिया गया है। जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक और मेडिकल कॉलेज में गायनी की विभाग अध्यक्ष डॉक्टर निर्मला शर्मा ने जानकारी दी। उनके मुताबिक तीन डॉक्टरों को बहाल किया गया है। इनमें दो गायनी और एक सर्जरी के हैं। आदेश शुक्रवार को जारी हुए हैं। डॉक्टर शनिवार को ड्यूटी ज्वाइन करेंगे।



कितनी महिलाएं हुई थीं प्रभावित



कोटा (Kota)में शुरुआत में पांच प्रसूताओं में यह दिक्कत सामने आई थी। इसका खुलासा 5 मई 2026 को हुआ था। इसके बाद 12 महिलाओं को संक्रमित माना गया था। इनमें से चार प्रसूता और एक गर्भवती थी।



इनमें पायल, ज्योति, पिंकी महावर, प्रिया और शिरीन की मौत हो चुकी है। जबकि बाकी पांच रागिनी, धन्नी, सुशीला, चंद्रकला, किरण, पिंकी और आरती को अस्पताल से इलाज के बाद डिस्चार्ज किया गया। कोटा के मामले के बाद प्रदेश के अन्य जगह से भी प्रसूताओं की मौत की घटनाएं हुई हैं।



पीड़ित परिवार की मांग



इस घटनाक्रम में प्रसूता रागिनी की भी तबियत बिगड़ गई थी। वह वर्तमान में डायलिसिस पर है। उनकी किडनी काम नहीं कर रही है। सरकार ने ट्रांसप्लांट का आश्वासन दिया था।



रागिनी के पति लोकेश का कहना है कि सरकार को जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। डॉक्टर को क्लीन चिट दी गई है, फिर घटनाक्रम क्यों और कैसे हुआ। क्या-क्या कारण रहे, यह तो हमें पता चलना चाहिए।



उन्होंने कहा कि हमें कोई सहायता नहीं मिली है। केवल आश्वासन दिया गया है। किडनी ट्रांसप्लांट की बात कहने पर हमें ही किडनी डोनेट करने के लिए कहा जा रहा है। यह हमारे लिए बड़ी परेशानी है।



क्यों अहम है यह मामला?

प्रसूताओं की मौत (Maternal Death) का यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना था। इससे अस्पतालों की व्यवस्था पर सवाल उठे थे। स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे।



अब जांच कमेटियों ने डॉक्टरों को क्लीनचिट दी है। लेकिन पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं है। वे जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। इससे यह मामला और गहरा सकता है।

Tags:
  • कोटा
  • तीन डॉक्टर बहाल
  • कोटा मेडिकल कॉलेज
  • किडनी फेल्योर
  • Kota
  • maternal death
  • clean chit
  • गर्भवती महिलाओं की मौत