कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व बनने की राह साफ, अंतिम नोटिफिकेशन का इंतजार

Jageshwar prasad | Aug 02, 2026, 14:03 IST
कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व बनने की राह साफ, अंतिम नोटिफिकेशन का इंतजार
कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व के गठन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की प्रक्रिया पूरी हो गई है और अब केवल राजस्थान सरकार के अंतिम नोटिफिकेशन का इंतजार है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व बनने की राह साफ।
  • अब सिर्फ अंतिम नोटिफिकेशन का इंतजार।
  • राजस्थान को मिलेगा चौथा टाइगर रिजर्व।
  • देश का 59वां और सबसे पश्चिमी टाइगर रिजर्व।
  • NTCA की प्रक्रिया पूरी, राज्य की अधिसूचना का इंतजार।

कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व के गठन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की प्रक्रिया पूरी हो गई है और अब केवल राज्य सरकार के अंतिम नोटिफिकेशन का इंतजार है।



अधिसूचना जारी होने पर कुंभलगढ़ देश का 59वां और राजस्थान का चौथा टाइगर रिजर्व बन जाएगा। यह देश के सबसे पश्चिमी छोर पर स्थित टाइगर रिजर्व भी होगा। करीब 600 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में अरावली की समृद्ध जैव विविधता है।



कुंभलगढ़ क्षेत्र की विशेषताएं

कुंभलगढ़ वन क्षेत्र राजसमंद, उदयपुर और पाली जिलों में फैला हुआ है। करीब 600 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में अरावली की समृद्ध जैव विविधता देखने को मिलती है।



यहां बाघों के साथ तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा, जंगली बिल्ली, लोमड़ी, सियार, चिंकारा, सांभर, नीलगाय और कई अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं। घने जंगल, पहाड़ियां और प्राकृतिक जल स्रोत इस क्षेत्र को वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास बनाते हैं।



संरक्षण को मिलेगी नई ताकत

विशेषज्ञों का मानना है कि टाइगर रिजर्व बनने से इस पूरे क्षेत्र में वन संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी। बाघों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा बेहतर होगी और वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।



इसके साथ ही अवैध शिकार और जंगलों में अतिक्रमण जैसी गतिविधियों पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। वन विभाग को संरक्षण कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन और योजनाओं का लाभ मिलेगा।



पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा

पर्यटन के लिहाज से भी यह परियोजना मेवाड़ के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। टाइगर रिजर्व बनने के बाद देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने की संभावना है।



इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। होटल, होम-स्टे, गाइड, सफारी, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यवसायों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।



कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व बनने की राह साफ, अंतिम नोटिफिकेशन का इंतजार


अब सिर्फ अंतिम नोटिफिकेशन का इंतजार

जानकार बताते हैं कि वर्ष 1953 तक कुंभलगढ़ क्षेत्र में बाघों की मौजूदगी दर्ज की जाती रही है। ऐसे में यदि यह क्षेत्र टाइगर रिजर्व घोषित होता है तो यह केवल बाघों की वापसी का प्रतीक नहीं होगा, बल्कि अरावली के जंगलों के संरक्षण और मेवाड़ के सतत विकास की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जाएगा।



अब सभी की नजरें राज्य सरकार की अंतिम अधिसूचना पर टिकी हैं, जिसके बाद इस परियोजना को आधिकारिक मंजूरी मिल जाएगी।



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