लिपिक भर्ती 2013 में बड़ा फर्जीवाड़ा, 18 अभ्यर्थियों पर होगी एफआईआर
समझें क्या है पूरा मामला
- लिपिक भर्ती 2013 में 18 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में गड़बड़ी मिली।
- जांच रिपोर्ट में अनुभव प्रमाणपत्रों की अवधि ओवरलैप पाई गई।
- सरकार ने अभ्यर्थियों पर FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए।
- फर्जी दस्तावेज मिलने पर नियुक्ति रद्द करने की सिफारिश।
- जिला परिषद अब 18 मामलों में आगे की कार्रवाई करेगी।
लिपिक भर्ती 2013 की राज्यस्तरीय जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इसमें 18 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में विसंगति पाई गई है। सरकार ने इन पर सीधे रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश जिला कलक्टर और जिला परिषद सीईओ (CEO – Chief Executive Officer) को दिए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार इनके अनुभव प्रमाणपत्रों की अवधि आपस में ओवरलैप कर रही है।
जांच रिपोर्ट में क्या मिला
जांच रिपोर्ट के पृष्ठ संख्या 70 पर दर्ज टिप्पणी में इन अभ्यर्थियों के शैक्षणिक और प्रशिक्षण संबंधी दस्तावेजों का जिक्र है। इसमें अनुभव प्रमाणपत्रों की अवधि में ओवरलैप पाया गया है।
जिला परिषद सीईओ सालुखे गौरव रविंद्र के अनुसार जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है। रिपोर्ट में जिन 18 अभ्यर्थियों के मामलों में यह विसंगति सामने आई, उनके नाम भी शामिल किए गए हैं।
पढ़ाई और नौकरी में मिला ओवरलैप
राज्यस्तरीय जांच दल के अनुसार इन अभ्यर्थियों की शैक्षणिक और प्रशैक्षणिक योग्यता के नियमित अध्ययन की अवधि, उनके अनुभव प्रमाणपत्र में दर्शाई सेवा अवधि से मेल खा रही है। यानी दोनों अवधियां आपस में ओवरलैप कर रही हैं।
जांच दल का कहना है कि संविदा नौकरी के दौरान ही इन अभ्यर्थियों ने दूसरे राज्यों से कंप्यूटर की डिग्री हासिल की। इसके बाद अनुभव का बोनस लाभ लेकर लिपिक पद पर नियुक्ति पाई।
रिपोर्ट के मुताबिक एक ही समयावधि में नियमित अध्ययन के साथ सेवा का दावा प्रथम दृष्टया संदेह पैदा करता है। ऐसे में दोनों में से किसी एक दस्तावेज की सत्यता पर सवाल खड़ा होता है।
नियुक्ति रद्द करने की सिफारिश
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यदि जांच में किसी अभ्यर्थी का अनुभव प्रमाण पत्र या शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी पाया जाता है, तो उसकी नियुक्ति रद्द करने की कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही संबंधित अभ्यर्थी और दस्तावेज जारी करने वाले संस्थान के खिलाफ फौजदारी मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई भी प्रस्तावित की गई है।
सीईओ को कार्रवाई के निर्देश अपेक्षित
राज्य स्तरीय जांच रिपोर्ट में आगे की कार्रवाई के लिए अलवर जिला परिषद सीईओ को आवश्यक निर्देश जारी किया जाना अपेक्षित बताया गया है।
अब यह देखना होगा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला परिषद स्तर पर इन 18 मामलों में दस्तावेजों की दोबारा जांच और आपराधिक कार्रवाई को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।
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