शिक्षा मंत्री के पोते पढ़ रहे प्राइवेट स्कूलों में, सरकारी शिक्षकों को बता रहे निकम्मा
समझें क्या है पूरा मामला
- शिक्षा मंत्री मदन दिलावर अपने बयानों को लेकर एक बार फिर विवादों में।
- मंत्री ने कहा- जो सरकारी शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाते, वे निकम्मे हैं।
- अब देखिए मंत्रीजी की हकीकत, खुद के पोते कोटा के महंगे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे।
- शिक्षा मंत्री के बयान पर शिक्षक संगठनों ने जताई नाराजगी, माफी मांगने की मांग की।
- दिलावर बैकफुट पर आए, उन्होंने एक कार्यक्रम में अपने विवादित बयान पर सफाई दी।
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर अपने बयानों को लेकर फिर विवादों में हैं। इस बार मामला उनकी कथनी और करनी के बीच के बड़े अंतर से जुड़ा है।
शिक्षकों को नसीहत देने वाले शिक्षा मंत्री खुद अपने परिवार के बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ा रहे हैं। उनके पोते कोटा के बेहद महंगे प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह पूरा विवाद रविवार को टोंक में आयोजित एक सम्मान समारोह के बाद शुरू हुआ। इस समारोह में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सरकारी शिक्षकों पर बेहद तीखा हमला बोला था।
उन्होंने कहा था कि जो सरकारी शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाते हैं, वे निकम्मे हैं। फ्री की तनख्वाह उठा रहे हैं।
मंत्री जी के इस बयान के बाद शिक्षक वर्ग में गहरी नाराजगी रही। शिक्षक संगठनों के विरोध के एक दिन बाद दिलावर बैकफुट पर आ गए। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि उनके द्वारा दिया गया वह बयान प्रदेश के सभी शिक्षकों के लिए नहीं था, बल्कि कुछ गिने-चुने लोगों के लिए था।
अब देखिए मंत्रीजी के परिवार की हकीकत
मंत्री जी के दो बेटों के बच्चे कोटा के इन निजी संस्थानों में पढ़ रहे हैं:
वेदांत दिलावर (कक्षा 12वीं): शिक्षा मंत्री के बेटे दीपक के पुत्र वेदांत दिलावर कोटा के नामचीन दिशा डेल्फी पब्लिक स्कूल (DDPS) में कक्षा 12वीं के छात्र हैं।
जयवर्धन (कक्षा 1) और सार्थक (कक्षा 7वीं): मंत्री दिलावर के दूसरे बेटे पवन के दोनों पुत्र जयवर्धन और सार्थक कोटा के ही बंसल पब्लिक स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं।
मंत्री जी ने साधी चुप्पी, सवालों से बनाई दूरी
इस पूरे मामले पर पक्ष जानने के लिए जब शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने इस विषय पर बात करने से पूरी तरह दूरी बना ली।
उनके मोबाइल पर दो बार कॉल किया गया, लेकिन दोनों ही बार मंत्री जी ने फोन नहीं उठाया। उनके स्टाफ ने फोन पर बात करते हुए बताया कि मंत्री जी किसी कार्यक्रम में व्यस्त हैं।
विवादित बयान पर बैकफुट पर आए दिलावर
उधर, टोंक में शिक्षकों के संबंध में दिए गए अपने बयान के बाद शिक्षा मंत्री बैकफुट पर दिखे। उन्होंने जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान अपने बयान पर स्थिति साफ की।
उन्होंने कहा, खटीक समाज के एक कार्यक्रम में मैंने कुछ विशेष लोगों की ओर इशारा करते हुए कहा था कि यदि आप लोग अच्छे अध्यापक हैं, बेहतर शिक्षा प्रदान करते हैं तो आपको अपने बच्चों को भी सरकारी स्कूलों में ही पढ़ाना चाहिए। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो यह उचित नहीं है।
साथ ही उन्होंने डैमेज कंट्रोल की मुद्रा में आते हुए कहा कि वे उस विवादित शब्द का दोबारा उपयोग नहीं करना चाहते। उनका उद्देश्य सभी कर्मठ शिक्षकों की भावनाएं आहत करना बिल्कुल नहीं था।
शिक्षक संघ ने की बर्खास्तगी की मांग
शिक्षामंत्री की इस सफाई के बावजूद शिक्षक संगठनों का गुस्सा शांत होता नहीं दिख रहा है। अखिल राजस्थान विद्यालय शिक्षक संघ (अरस्तु) ने इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है।
संघ के प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण अग्रवाल ने कहा कि शिक्षामंत्री के इस गैर-जिम्मेदाराना बयान से प्रदेश के करीब चार लाख शिक्षक मानसिक रूप से आहत हुए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मदन दिलावर को तत्काल प्रभाव से शिक्षामंत्री के पद से बर्खास्त किया जाना चाहिए।
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