मदन दिलावर ने गाय और भैंस के दूध का समझाया अंतर, छिड़ गया सियासी बवाल

राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने गाय और भैंस के दूध के बीच अंतर बताते हुए कुछ अजीबोगरीब उदाहरण दिए, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं। मंत्री के बयान पर विपक्ष के नेताओं ने भी चुटकी ली है।

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Purshottam Kumar Joshi
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Photograph: (the sootr)

News in Short

  • मंत्री मदन दिलावर का गाय और भैंस के दूध पर दिया बयान अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

  • मंत्री दिलावर ने ‘गाय का बछड़ा’ और ‘भैंस का बछड़ा’ के उदाहरणों से दिया अपना अनूठा ज्ञान।

  • मंत्री दिलावर के अनुसार, गाय का दूध पीने से बच्चे सक्रिय और प्रगतिशील बनते हैं।

  • मंत्री ने गाय और भैंस के बच्चों के नामकरण से जुड़ा तर्क पेश किया।

  • मंत्री के बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तरह तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही है। 

News in Detail

राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने रामगंजमंडी में एक कार्यक्रम में गाय और भैंस के दूध के बीच अंतर बताते हुए कुछ दिलचस्प उदाहरण दिए। मंत्री ने वैज्ञानिक तर्कों से बचते हुए 'व्यवहारिक परीक्षण' का हवाला देते हुए दावा किया कि गाय का दूध पीने वाले बच्चे ज्यादा चंचल और बुद्धिमान होते हैं, जबकि भैंस के दूध पीने वाले बच्चे सुस्त और नींद में रहते हैं।

गाय के बछड़े का उदाहरण

मदन दिलावर ने एक काल्पनिक प्रयोग का उदाहरण दिया जिसमें उन्होंने कहा कि गाय और भैंस के बछड़ों को एक साथ छोड़ दिया जाए, तो गाय का बछड़ा अपनी मां को पहचानकर सीधे दूध पीने चला जाएगा। जबकि भैंस का बछड़ा अपनी मां को पहचानने में भ्रमित रहेगा। इस उदाहरण को उन्होंने इस प्रकार प्रस्तुत किया कि गाय का दूध पीने वाला बच्चा जन्म से ही अधिक बुद्धिमान होता है।

दूध के असर पर मंत्री का तर्क

उन्होंने आगे कहा कि गाय का दूध पीने वाला बच्चा चंचल और ऊर्जावान होता है, जबकि भैंस का दूध पीने वाला बच्चा सुस्त और ऊंघने वाला होता है। मंत्री ने इस आधार पर अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को प्रगतिशील और चंचल बनाने के लिए गाय का दूध पिलाएं।

भाषाई तर्क और ‘पाड़ा’ बनाम ‘बैल’

मंत्री ने गाय और भैंस के बच्चों के नामकरण पर भी बात की। उन्होंने कहा कि गाय का बच्चा क्रमिक विकास से गुजरता है और बछड़े से बैल बनता है, जबकि भैंस का बच्चा हमेशा ‘पाड़ा’ ही रहता है, चाहे वह छोटा हो या बड़ा। इस तर्क का उन्होंने इशारा यह दिया कि प्रोग्रेस वही करता है, जो गाय का दूध पीता है।

सोशल मीडिया पर बवाल

मंत्री के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। लोग इसे भारतीय संस्कृति और आयुर्वेद के नजरिए से सही बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे अवैज्ञानिक और हास्यास्पद करार दे रहे हैं। विशेष रूप से भैंस पालने वालों और डेयरी व्यवसाय से जुड़े लोगों ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

नेताओं और विपक्ष की प्रतिक्रियाएं

दिलावर के इस बयान पर विपक्षी दलों और अन्य नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस नेताओं ने इस बयान को "अजीब" और "तर्कहीन" बताया है। सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्षी दल इसे शिक्षा मंत्री की गरिमा के विपरीत और जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने वाला मान रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पहले भी दिलावर के गौशालाओं से जुड़े बयानों पर पलटवार करते हुए कहा था कि भाजपा के लिए गौ सेवा केवल एक चुनावी हथियार है, न कि आस्था का विषय। उन्होंने भाजपा पर "दोहरे मापदंड" अपनाने का आरोप लगाया।

गोविंद सिंह डोटासरा ने पूर्व में भी दिलावर की बयानबाजी पर कड़ा रुख अपनाया है, उन्हें "अपरिपक्व" और "विवादास्पद" मानसिकता वाला नेता करार दिया है।

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