महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों पर बड़ा फैसला, हिंदी की ओर वापसी की तैयारी
समझें क्या है पूरा मामला
- महात्मा गांधी स्कूलों का अंग्रेजी एक्सपेरिमेंट फेल, अब वापसी की तैयारी।
- अंग्रेजी माध्यम के 300 महात्मा गांधी स्कूल में वापस होगा हिंदी माध्यम।
- कम नामांकन बना कारण, जिन स्कूलों में बच्चे नहीं आए वहां बदलेगा माध्यम।
- ग्रामीण इलाकों से उठी थी हिंदी माध्यम की मांग, अब सरकार ने सुनी।
- शिक्षा निदेशक से जिलों की मांगी गई है रिपोर्ट, नए सत्र में होगा बदलाव।
राजस्थान सरकार ने नए शैक्षणिक सत्र से पहले एक बड़ा नीतिगत फैसला लेने की तैयारी की है। प्रदेश के करीब 300 महात्मा गांधी राजकीय विद्यालयों को दोबारा हिंदी माध्यम में बदला जा सकता है।
शिक्षा मंत्री के निर्देश के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर ऐसे विद्यालयों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है जहां अंग्रेजी माध्यम की अपेक्षा हिंदी माध्यम की जरूरत अधिक महसूस की जा रही है।
कम नामांकन बना मुख्य कारण
सरकार का मानना है कि कई महात्मा गांधी विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम शुरू होने के बावजूद अपेक्षित संख्या में बच्चों का नामांकन नहीं हो पाया है।
ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों से लगातार यह मांग उठ रही थी कि विद्यार्थियों को हिंदी माध्यम में पढ़ाई उपलब्ध कराई जाए। ताकि वे पाठ्यक्रम को बेहतर ढंग से समझ सकें। इसी मांग और जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने समीक्षा शुरू की है।
जिलों से यह मांगी गई है रिपोर्ट
शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारी(DEO) को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में संचालित महात्मा गांधी विद्यालयों का सर्वे करें।
रिपोर्ट में विद्यार्थियों के नामांकन की वास्तविक स्थिति, अंग्रेजी माध्यम की जरूरत, स्थानीय अभिभावकों की मांग, जनप्रतिनिधियों के सुझाव, शिक्षकों की उपलब्धता और क्षेत्रीय आवश्यकताओं का उल्लेख किया जाएगा।
किन स्कूलों में बदलाव होगा, किनमें नहीं?
सूत्रों के अनुसार जिन विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम में पर्याप्त नामांकन नहीं है और जहां हिंदी माध्यम की स्थानीय मांग अधिक है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हिंदी माध्यम में बदला जाएगा।
वहीं जिन विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम की मांग अच्छी है, पर्याप्त विद्यार्थी पढ़ रहे हैं और व्यवस्था सुचारू है, वहां फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा।
चरणबद्ध तरीके से होगा बदलाव
शिक्षा विभाग इस पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। जिलों से रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग अंतिम सूची तैयार करेगा। नए शैक्षणिक सत्र से माध्यम परिवर्तन की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
क्यों बने थे महात्मा गांधी स्कूल?
महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय पूर्ववर्ती सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना थी। इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में निजी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों जैसी शिक्षा उपलब्ध कराना था।
लेकिन कई स्कूलों में बच्चों की संख्या और शिक्षकों की उपलब्धता अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही, जिससे यह बदलाव जरूरी लगने लगा।
FAQ
- राजस्थान में महात्मा गांधी स्कूलों का माध्यम क्यों बदला जाएगा?
कई महात्मा गांधी विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम के बावजूद पर्याप्त नामांकन नहीं हुआ। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों से हिंदी माध्यम की मांग उठ रही थी। इसी के आधार पर शिक्षा विभाग लगभग 300 स्कूलों को वापस हिंदी माध्यम में बदलने की तैयारी कर रहा है। - राजस्थान में किन महात्मा गांधी स्कूलों का माध्यम नहीं बदलेगा?
जिन विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम की अच्छी मांग है, पर्याप्त विद्यार्थी पढ़ रहे हैं और व्यवस्था सुचारू है, वहां फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। यह निर्णय जिलों से आने वाली रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।
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