उम्मेद अस्पताल को मिली शाबाशी, डॉक्टरों की कमी दूर करने पर बनी रणनीति
समझें क्या है पूरा मामला
- मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर बड़े फैसले, उम्मेद अस्पताल की सेवाओं की सराहना
- 4 ANC जांच अनिवार्य, हाई रिस्क प्रेगनेंसी पर खास नजर
- 2026-27 में सभी OT होंगे मॉड्यूलर, डॉक्टरों की कमी पर चर्चा
- 'प्रसव सखी' की जिम्मेदारी तय होगी, 21 सितंबर को अगली समीक्षा
नरेश @ जोधपुर
राजस्थान में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सोमवार को राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक हुई। बैठक में जोधपुर के उम्मेद अस्पताल के काम की तारीफ की गई। अस्पताल की टीम को बेहतर सेवाओं के लिए बधाई दी गई।
अधीक्षक डॉ. मोहन मकवाना, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ बीएस जोधा, एनेस्थीसिया और गायनी विभाग की पूरी टीम के काम को बैठक में सराहा गया। बैठक में गर्भवती महिलाओं और नवजातों की बेहतर देखभाल को लेकर कई फैसले लिए गए।
4 ANC जांच जरूरी
गर्भवती महिलाओं की कम से कम चार अनिवार्य एएनसी जांच पक्की की जाएंगी। इसके लिए पहले जारी निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों पर भी खास नजर रखी जाएगी। सीएमएचओ और उप-जिला आरसीएचओ को इसकी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी गई है।
2026-27 में सभी OT होंगे मॉड्यूलर
राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को अपग्रेड करने पर भी जोर दिया गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 में सभी ऑपरेशन थिएटर को मॉड्यूलर ओटी में बदलने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में ऑटोक्लेव मशीनों की उपलब्धता की समीक्षा होगी। खास तौर पर सेकेंडरी और टर्शियरी स्तर के अस्पतालों में इसकी जांच की जाएगी।
डॉक्टरों की कमी पर भी हुई चर्चा
द सूत्र में प्रकाशित खबर में जिला अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठाया था। इसमें बताया गया था कि कई अस्पतालों में चिकित्सकों के पद खाली हैं। ऐसे में 24 घंटे सीजेरियन डिलीवरी जैसी सेवाओं को चलाने में परेशानी हो सकती है। राज्य स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई।
एनेस्थीसियोलॉजी, स्त्री एवं प्रसूति रोग और बाल रोग विभागों के खाली पदों को भरने के लिए संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा की जाएगी। मेडिकल कॉलेजों में पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी और पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी यूनिट को भी पूरी क्षमता से शुरू करने का फैसला लिया गया।
नवजातों की देखभाल पर फोकस
अस्पतालों में कंगारू मदर केयर और स्तनपान को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। सीएचसी और मेडिकल कॉलेजों में चल रही एनआईसीयू सेवाओं की भी समीक्षा होगी। इन इकाइयों की व्यवस्था और कामकाज को दोबारा जांचा जाएगा।
एम्बुलेंस और प्रसव सेवाओं की भी समीक्षा
हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। रेफरल के दौरान मिलने वाली एम्बुलेंस सुविधा की भी समीक्षा होगी। सरकार सीएचसी स्तर पर होने वाले प्रसव की स्थिति भी देखेगी। इसका मकसद बड़े यानी तृतीयक अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम करना है।
'प्रसव सखी' की जिम्मेदारी तय होगी
अस्पतालों में काम करने वाली 'प्रसव सखी' की भूमिका भी स्पष्ट की जाएगी। उन्हें मरीजों की देखभाल और समन्वय से जुड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी।
वहीं, सभी मेडिकल कॉलेजों के लिए 'सेतु ऐप' का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। अब इन फैसलों की प्रगति की समीक्षा 21 सितंबर 2026 को दोपहर 3 बजे होने वाली अगली राज्य स्तरीय बैठक में की जाएगी।
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