क्या मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को मिलेगा सेवा विस्तार या नए चेहरे पर लगेगा दांव?
Jageshwar prasad | Jul 27, 2026, 14:13 IST
राजस्थान के मुख्य सचिव को लेकर सियासी हलचल, वी. श्रीनिवास या नया चेहरा?
राजस्थान में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का सेवाकाल अगले महीने पूरा हो रहा है। यह सवाल चर्चा में है कि क्या सरकार वी. श्रीनिवास को सेवा विस्तार देगी, या किसी नए अधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी?
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का सेवाकाल अगले महीने पूरा।
- आखिर राजस्थान की प्रशासनिक कमान आगे किसके हाथों में होगी।
- यह सवाल चर्चा में क्या श्रीनिवास को सरकार सेवाविस्तार देगी।
- मुख्य सचिव की दौड में अभय कुमार और अखिल अरोड़ा का नाम।
सचिवालय में यह सवाल तेजी से तैर रहा है कि राज्य की प्रशासनिक कमान आगे किसके हाथों में होगी। क्या सरकार वी. श्रीनिवास को सेवा विस्तार देगी या किसी नए अधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी?
यदि राज्य सरकार वी. श्रीनिवास के अनुभव और प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें एक्सटेंशन नहीं देती है तो नए मुख्य सचिव की दौड़ में सीनियर आईएएस अभय कुमार और अखिल अरोड़ा का नाम सबसे आगे चल रहा है।
चयन के लिए सिर्फ वरिष्ठता नहीं, कई पहलू अहम
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार अपना आधा कार्यकाल पूरा कर चुकी है। आने वाले वर्षों में सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं।
फ्लैगशिप योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, निवेश आकर्षित करना, वित्तीय अनुशासन बनाए रखना और प्रशासनिक सुधारों को गति देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
ऐसे में सरकार को एक ऐसे प्रशासनिक मुखिया की जरूरत होगी, जो केवल फाइलों के प्रबंधन तक सीमित न रहकर योजनाओं को समयबद्ध तरीके से परिणाम में बदल सके।
दिल्ली के साथ मजबूत तालमेल और सरकार की प्रशासनिक साख को मजबूत करना भी चयन का एक मुख्य आधार रहेगा।
IAS अखिल अरोड़ा
रेस में कौन आगे?
इसके पीछे उनकी शांत, संतुलित और बिना किसी प्रचार-प्रसार के परिणाम देने की कार्यशैली है। वित्तीय मामलों पर उनकी मजबूत पकड़ रही है। वर्तमान सरकार व केंद्र के साथ उनका बेहतर तालमेल उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाता है। वे अभी सीएम में हैं।
दूसरी ओर अभय कुमार भी अपनी बेदाग व ईमानदार छवि, लंबे प्रशासनिक अनुभव और संतुलित निर्णय लेने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। नौकरशाही में उन्हें एक बेहद सक्षम और भरोसेमंद अधिकारी के रूप में देखा जाता है।
आईएएस अभय कुमार
अंतिम निर्णय पर टिकीं निगाहें
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