बेटे को छोड़ने के एवज में 50 हजार मांगे, मां ने गहने गिरवी रख दिए, पुलिस पर FIR
समझें क्या है पूरा मामला
- थानेदार बोला, यहां कैमरे लगे हैं, चुप बैठो, फिर रिश्वत ली।
- विधवा मां ने गहने गिरवी रखकर किया रिश्वत का इंतजाम।
- प्रेम संबंध के मामले में समझौते के बाद भी युवक को बंद रखा।
- 50 हजार मांगे, मिले 20, थानेदार को शक हो गया फिर नहीं मांगे।
- ACB ने वॉयस रिकॉर्डर में सब रिकॉर्ड किया, अब FIR दर्ज।
बारां जिले के मोठपुर थाने का एक मामला सामने आया है। जो वर्दी के दुरुपयोग की गंभीर तस्वीर पेश करता है। एक प्रेम प्रसंग मामले में दोनों पक्षों के बीच राजीनामा होने के बावजूद थाने में बंद एक युवक को छोड़ने के बदले थाना इंचार्ज देवकरण ने उसकी विधवा मां से 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी।
मां ने गहने गिरवी रखकर 20 हजार रुपए जुटाए। पूरी बातचीत वॉयस रिकॉर्डर में कैद हो गई। 5 महीने की जांच के बाद 14 जुलाई को ACB (Anti Corruption Bureau) ने थानेदार देवकरण और कॉन्स्टेबल कुलदीप के खिलाफ FIR दर्ज की है।
गहने गिरवी रखकर जुटाए 20 हजार
पीड़ित का बेटा और एक युवती एक-दूसरे को पसंद करते थे। युवती चौथी बार अपना घर छोड़कर उसके बेटे के पास आ गई थी। युवती के परिजनों ने पीड़ित के बेटे के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने उसके बेटे को पकड़ लिया। बाद में दोनों पक्षों में राजीनामा हो गया।
22 फरवरी को पीड़ित मां 4 दिन से बंद अपने बेटे को छुड़ाने के लिए मोठपुर थाने पहुंची। थानेदार देवकरण ने बेटे को छोड़ने के लिए 50 हजार रुपए मांगे। गरीब विधवा मां के पास इतने पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने अपने गहने गिरवी रखकर 20 हजार रुपए जुटाए।
वॉयस रिकॉर्डर में कैद हुई बातचीत
पीड़ित ने एक परिचित को घटना के बारे में बताया। परिचित के कहने पर 23 फरवरी को ACB में शिकायत की गई। ACB ने ट्रैप करने की योजना बनाई। 24 फरवरी को पीड़ित और उसका परिचित वॉयस रिकॉर्डर लेकर थाने पहुंचे।
रिकॉर्डर में थानेदार की बातचीत कैद हो गई। पीड़ित ने कहा कि उसके पास 20 हजार रुपए ही हैं। थानेदार ने मुंह पर अंगुली रखकर चुप रहने का इशारा किया और बोला- श…श…श…यहां कैमरे लगे हैं। उसने कहा, मैं मदद कर रहा हूं। कल तुम्हारे लड़के को पेश कर देंगे। जमानत हो जाएगी।
थानेदार को ट्रैप की भनक लग गई
ACB टीम ने रिकॉर्डर देकर रिश्वत की बात करने के लिए कहा था, लेकिन पीड़ित ने थानेदार और कॉन्स्टेबल से बातचीत के बाद रिश्वत के पैसे दे दिए। इस कारण ACB को ट्रैप का मौका नहीं मिला। पीड़ित ने ACB को बताया कि थानेदार ने बाकी पैसे बाद में लेने को कहा है।
अगले दिन बेटे को कोर्ट ले जाते समय थानेदार और कॉन्स्टेबल ने बाकी पैसे को लेकर कोई बात नहीं की। ACB एएसपी विजय स्वर्णकार ने बताया कि थानेदार को ट्रैप को लेकर शक हो गया था। पीड़ित ने 13 मार्च को फिर ACB को संपर्क किया और दूसरा शिकायती पत्र सौंपा।
ACB ने दर्ज की FIR
ACB ने रिकॉर्डर की बातचीत को विश्वास के दो व्यक्तियों को सुनाया। उन्होंने थानेदार और कॉन्स्टेबल की ही आवाज होने की पुष्टि की। इसके बाद 14 जुलाई को ACB ने थानेदार देवकरण और कॉन्स्टेबल कुलदीप के खिलाफ FIR दर्ज कर ली।
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