कोर्ट ने रद्द की नरेश मीणा की जमानत, जारी हुआ गिरफ्तारी वारंट
समझें क्या है पूरा मामला
- जमानत की शर्त का उल्लंघन का आरोप
- नरेश मीणा ने कहा कोर्ट का सम्मान है,जनसंघर्ष जारी रहेगा
- बीजेपी पर राजनीतिक द्वेष का आरोप
- पुलिस प्रशासन अलर्ट,गिरफ्तारी की तैयारी,मीणा करेंगे अपील।
राजस्थान में देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान एसडीएम थप्पड़कांड, आगजनी और हिंसा के मुख्य आरोपी नरेश मीणा को अदालत से बड़ा झटका लगा है।
टोंक की एससी-एसटी मामलों की विशेष कोर्ट ने नरेश मीणा की राजस्थान हाईकोर्ट से मिली जमानत को रद्द कर दिया है। अदालत ने पुलिस को उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के लिए गिरफ्तारी वारंट भी जारी कर दिया है। जमानत रद्द होने के बाद नरेश मीणा की किसी भी वक्त दोबारा गिरफ्तारी हो सकती है।
क्यों रद्द हुई नरेश मीणा की जमानत ?
राजस्थान हाई कोर्ट ने 11 जुलाई 2025 को नरेश मीणा को सशर्त जमानत दी थी। इसके बाद 14 जुलाई 2025 को वे टोंक जेल से रिहा हुए थे।
पुलिस ने विशेष लोक अभियोजक के जरिए से कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र पेश कर दलील दी कि नरेश मीणा ने जेल से बाहर आने के बाद जमानत की शर्तों का पालन नहीं किया है।
पुलिस का कहना था कि झालावाड़ स्कूल हादसे में मारे गए 7 बच्चों के पीड़ित परिवारों से मिलने जाने के दौरान नरेश मीणा को गिरफ्तार किया था। यह हाईकोर्ट की जमानत शर्तों का सीधा उल्लंघन है। कोर्ट ने पुलिस की इस दलील को सही मानते हुए सोमवार को उनकी जमानत खारिज कर दी है।
आदेश पर नरेश मीणा की प्रतिक्रिया
जमानत रद्द होने के बाद नरेश मीणा ने कहा,मैं कोर्ट के फैसले का पूरा सम्मान करता हूं। अभी फैसले की आधिकारिक कॉपी आना बाकी है। जैसे ही फैसले की कॉपी मिलेगी, हमारे वकील इसका अध्ययन करेंगे और आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
नरेश मीणा ने सत्ताधारी भाजपा पर राजनीतिक द्वेष का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह कड़वा सच है कि बड़े-बड़े गुनाह करने वाले नेता जब बीजेपी में शामिल हो जाते हैं, तो वे वाशिंग मशीन में धुलकर अचानक पाक-साफ हो जाते हैं।
मैं जनता के हकों के लिए कानून के दायरे में रहकर संघर्ष कर रहा हूं, जो अहंकारी बीजेपी सरकार को सहन नहीं हो रहा है।
आगे क्या होगा ?
टोंक की एससी-एसटी कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है। पुलिस जल्द ही नरेश मीणा को गिरफ्तार करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।
दूसरी ओर नरेश मीणा का कानूनी दल इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने की तैयारी में जुट गया है।
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