स्कॉर्पियो की खराबी बन गई मुसीबत, कोर्ट ने महिंद्रा से कहा-नई गाड़ी दो या रुपए लौटाओ
News In Short
- खराब स्कॉर्पियो बेचना महिंद्रा को पड़ा भारी, कोर्ट ने कंपनी को माना दोषी।
- महिंद्रा स्कॉर्पियो के इंजन में खराबी को कोर्ट ने माना मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट।
- राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC) ने कहा, नई गाड़ी दो या रुपए वापस करो।
- निचली अदालत द्वारा लगाए गए 4 लाख के जुर्माने को घटाकर 50 हजार रुपए किया।
- बैंक लोन का ब्याज भरने के आदेश से ऑटो कंपनी को मिली बड़ी राहत
News In Detail
राजस्थान में अजमेर के कानाराम जाट ने नागौर ऑटोमोबाइल्स से मई 2013 में करीब 12.27 लाख रुपए में नई महिंद्रा स्कॉर्पियो खरीदी थी। गाड़ी लेने के दो-तीन महीने के भीतर ही इंजन में भारी परेशानी होने लगी।
कानाराम के एडवोकेट सुनील शर्मा के अनुसार अगले डेढ़ साल में गाड़ी को बार-बार वर्कशॉप भेजना पड़ा। सितंबर 2014 में गाड़ी का इंजन पूरी तरह सीज हो गया। कंपनी ने वारंटी के तहत नया इंजन डाला।
लेकिन इसके बाद भी समस्या सही नहीं हुई तो परिवादी ने उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर कर नई गाड़ी देने अन्यथा पूरी कीमत वापिस दिलवाने की गुहार की थी।
राज्य आयोग ने मानी गुहार
दिसंबर 2016 में राजस्थान राज्य उपभोक्ता आयोग ने कंपनी के दावों को खारिज कर दिया था। उसने कंपनी को परिवादी को नई स्कॉर्पियो देने या पूरे पैसे लौटाने का आदेश दिया था।
इसके साथ ही आयोग ने कंपनी को परिवादी ग्राहक के बैंक लोन का 10.5% ब्याज भरने और 4 लाख रुपए का मानसिक संताप का मुआवजा देने को कहा था। महिंद्रा कंपनी ने इसी फैसले के खिलाफ राष्ट्रीय आयोग (NCDRC) में अपील की थी।
राज्य आयोग के फैसले को सही माना
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने महिंद्रा स्कॉर्पियो एसयूवी (Scorpio SUV) में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट (निर्माण दोष) होने के राज्य आयोग के फैसले को सही ठहराया है।
आयोग ने कहा है कि यदि किसी गाड़ी का इंजन बार-बार खराब हो रहा है, उसे बदलना पड़ रहा है तो यह साबित है कि वाहन में गड़बड़ी है।
इसके लिए किसी मैकेनिक या एक्सपर्ट की अलग से रिपोर्ट लाने की कोई जरूरत नहीं है। पीठासीन सदस्य डॉ. इंदर जीत सिंह और सदस्य जस्टिस डॉ. सुधीर कुमार जैन की बैंच ने यह आदेश दिया है।
सर्विस सेंटर को मिली राहत
राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC) ने राज्य आयोग के मुख्य निर्णय को तो सही माना है, लेकिन कहा है कि सर्विस सेंटर की कोई गलती नहीं है। इसलिए गाड़ी बदलने या पैसे वापस करने की जिम्मेदारी सिर्फ महिंद्रा कंपनी और डीलर की होगी।
कोर्ट ने कंपनी को राहत देते हुए कहा है कि परिवादी ग्राहक ने अपनी मूल शिकायत में बैंक लोन का ब्याज चुकाने की मांग नहीं की थी। इसलिए राज्य आयोग का यह आदेश कानूनी रूप से सही नहीं है।
इसके अलावा आयोग ने मानसिक प्रताड़ना के लिए तय चार लाख रुपये को बहुत ज्यादा बताते हुए घटाकर 50,000 रुपये कर दिया है। आयोग ने कंपनी को दो महीने में आदेश की पालना करने को कहा है अन्यथा उसे 9 फीसदी सालाना की दर से ब्याज देना होगा।
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