नियुक्तियों में धांधली के आरोप, वाइस चांसलर डॉ. देवस्वरूप को तत्काल हटाया गया
Jageshwar prasad | May 28, 2026, 18:02 IST
Photograph: (the sootr)
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. देवस्वरूप को पद से हटा दिया है। उन पर राजस्थान विश्वविद्यालय में कुलपति रहते हुए नियुक्तियों में गंभीर अनियमितताओं और धांधली का आरोप है।
News In Short
- डॉ. देवस्वरूप को बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर पद से हटाया।
- उन पर राजस्थान विश्वविद्यालय में कुलपति रहते हुए नियुक्तियों में धांधली का आरोप है।
- जांच समिति ने पाया कि चहेते अभ्यर्थियों को ज्यादा, योग्य उम्मीदवारों को काम अंक दिए।
- डॉ. प्रेमलता सिंगारिया की शिकायत पर गठित समिति ने जांच की और इसकी पुष्टि की।
- डॉ. देवस्वरूप विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलगुरु भी थे।
News In Detail
नियुक्तियों में की थी बड़ी धांधली
डॉ. प्रेमलता की शिकायत पर हुई थी उच्च स्तरीय जांच
जयपुर की रहने वाली डॉ. प्रेमलता सिंगारिया नामक एक योग्य महिला अभ्यर्थी ने राज्यपाल और कुलाधिपति के समक्ष एक विस्तृत और साक्ष्य आधारित शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने अपनी शिकायत में सीधे तौर पर अनुसूचित जाति की महिला के साथ घोर अन्याय किए जाने का मुद्दा उठाया था।
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. भगवती प्रसाद सारस्वत की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था। जांच समिति द्वारा राज्यपाल को सौंपी गई आधिकारिक रिपोर्ट में यह साफ तौर पर प्रमाणित पाया गया कि डॉ. देवस्वरूप ने पूरी चयन प्रक्रिया को अपने हिसाब से संचालित करने के लिए यूजीसी के अनिवार्य प्रावधानों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया था।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि सिंडिकेट की बैठकों के मिनट्स को इस तरह से तोड़-मरोड़ कर लिखा गया ताकि चहेतों की नियुक्तियों को वैध ठहराया जा सके। रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि नियमों को दबाने के लिए बकायदा कूटरचित, जाली और झूठे दस्तावेज तैयार किए गए।
योग्य को मिले 10, चहेतों को 49 नंबर
मौखिक साक्षात्कार के स्तर पर तो मनमानी की सारी हदें ही पार कर दी गईं। विषय ज्ञान और साक्षात्कार के लिए निर्धारित कुल अधिकतम 50 अंकों में से डॉ. देवस्वरूप के पसंदीदा अभ्यर्थियों को 49 अंक दे दिए गए। वहीं योग्य होने के बावजूद डॉ. प्रेमलता सिंगारिया को मात्र 10 अंक देकर रेस से बाहर कर दिया गया।
आरक्षित वर्ग के हितों पर कुठाराघात
प्रो. शर्मा और प्रो. पाण्डेय को अतिरिक्त कार्यभार
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