अमायरा सुसाइड केस - टीचर व मैनेजमेंट समेत 4 पर कोर्ट का संज्ञान, मिली जमानत

Ashish Bhardwaj | Jul 28, 2026, 21:50 IST
नीरजा मोदी स्कूल
राजस्थान में जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल की 9 वर्षीय छात्रा अमायरा सुसाइड केस में कोर्ट ने स्कूल संचालक, प्रिंसिपल, शिक्षिका और सफाईकर्मी के खिलाफ प्रसंज्ञान ले लिया है। चारों को जमानत मिल गई है और मामला आगे की सुनवाई के लिए बाल न्यायालय भेज दिया गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • अमायरा सुसाइड केस,टीचर व मैनेजमेंट समेत 4 पर कोर्ट का संज्ञान, मिली जमानत
  • एसीजेएम-10 कोर्ट ने चारों आरोपियों के खिलाफ प्रसंज्ञान लेकर मामला बाल न्यायालय भेजा।
  • आरोपियों पर जेजे एक्ट की धारा 75 तथा BNS की धारा 106(1) और 238(C) तय।
  • परिवार ने पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए आत्महत्या को उकसाने की धाराएं लगाने की मांग की।
  • स्कूल प्रबंधन ने घटना को हादसा बताते हुए जानबूझकर की गई गलती से इंकार किया।

अमायरा सुसाइड केस में कोर्ट ने स्कूल संचालक सौरभ मोदी, प्रिंसिपल इंदु दुबे, शिक्षिका पुनीता शर्मा और सफाईकर्मी रामू के विरुद्ध प्रसंज्ञान ले लिया है। एसीजेएम-10 जयपुर महानगर प्रथम ने यह आदेश दिए हैं।



कोर्ट ने मामले में प्रसंज्ञान लेकर आगे की सुनवाई के लिए डीजे कोर्ट (बाल न्यायालय) भेज दिया है। कोर्ट ने स्कूल संचालक सौरभ मोदी, प्रिंसिपल इंदु दुबे, शिक्षिका पुनीता शर्मा और सफाईकर्मी रामू के विरुद्ध जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75,भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) और 238(C) के तहत अपराध माना है। कोर्ट ने चारों आरोपियों को जमानत दे दी है। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को संबंधित कोर्ट में होगी।



1 नवंबर 2025 को जयपुर स्थित नीरजा मोदी स्कूल में छात्रा अमायरा ने चौथी मंजिल छलांग लगा दी थी। नीचे गिरने से गंभीर चोटें आने के कारण उसकी मौत हो गई थी।



पुलिस ने लापरवाही,सबूत मिटाने और बच्चे के साथ क्रूरता के मामले में आरोप प्रमाणित मानते हुए चालान पेश किया था। अमायरा के परिजनों ने कोर्ट में प्रार्थना-पत्र पेश कर पुलिस की ओर से पेश चालान (चार्जशीट) पर सवाल खड़े किए थे।



परिजनों का कहना था कि स्कूल प्रबंधन और प्रिंसिपल पर भी बच्ची के प्रति क्रूरता (Cruelty to Child) और सभी आरोपियों पर बच्ची को आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा लगाते हुए प्रसंज्ञान लिया जाए।



इससे पहले सोमवार को सुनवाई के दौरान परिजनों की ओर कहा था कि मामले में पुलिस ने केवल क्लास टीचर के खिलाफ जेजे एक्ट की धारा 47 के तहत आरोप प्रमाणित माना है। जबकि स्कूल प्रिंसिपल और प्रबंधन बराबर के दोषी हैं। पुलिस ने किसी भी आरोपी पर बच्ची को सुसाइड के लिए उकसाने का आरोप प्रमाणित नहीं माना है।



स्कूल प्रबंधन बोला,जानबूझकर कुछ नहीं किया

प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए स्कूल प्रबंधन की ओर से सीनियर एडवोकेट विवेक राज बाजवा ने कहा कि पुलिस ने चार्जशीट में जेजे एक्ट की धारा लगाई है। ऐसे में इस कोर्ट को सुनवाई का अधिकार नहीं है। यह घटना एक हादसा थी। स्कूल प्रबंधन ने जानबूझकर कुछ भी नहीं किया जिससे यह साबित हो कि अमायरा को सुसाइड के लिए उकसाया गया था।



चौथी मंजिल से कूदकर किया था सुसाइड

गौरतलब है कि नीरजा मोदी स्कूल में 9 साल की छात्रा अमायरा ने एक नवंबर, 2025 को चौथी मंजिल से कूदकर सुसाइड कर लिया था। मामले की जांच के बाद पुलिस ने स्कूल मालिक सौरभ मोदी, प्रिंसिपल इन्दु दुबे,टीचर पुनिता शर्मा और सफाईकर्मी रामू के खिलाफ चालान पेश किया था।



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