गोडावण को बचाने की नई उम्मीद, टनल में उतारे गए 3 नन्हे पक्षी
Jageshwar prasad | Jul 26, 2026, 16:42 IST
गोडावण के नन्हे चूजों ने रिवाइल्डिंग टनल में रखा कदम, प्राकृतिक माहौल में सीखेंगे जंगल का जीवन
जैसलमेर के रामदेवरा स्थित गोडावण संरक्षण व प्रजनन केंद्र में 3 नन्हे गोडावण चूजों को पहली बार रीवाइल्डिंग टनल में छोड़ा गया। वे यहां प्राकृतिक माहौल में उड़ना, भोजन खोजना और जंगली वातावरण में सर्वाइव करना सीखेंगे।
समझें क्या है पूरा मामला
- गोडावण के तीन नन्हे चूजों ने रिवाइल्डिंग टनल में रखा कदम।
- 9.25 करोड़ की अत्याधुनिक टनल, 24 घंटे CCTV निगरानी।
- बिना इंसानी संपर्क के होगी तैयारी, सीखेंगे जंगल का जीवन।
- चार महीने बाद डेजर्ट नेशनल पार्क में छोड़े जाएंगे गोडावण।
- विलुप्तप्राय गोडावण को जंगल में लौटाने की अनूठी मुहिम।
जैसलमेर स्थित गोडावण ब्रीडिंग सेंटर में कृत्रिम रूप से सेए गए (Artificial Hatching) अंडों से जन्मे 3 नन्हे गोडावण चूजों को पहली बार विशेष रूप से तैयार की गई रीवाइल्डिंग टनल (Rewilding Tunnel) में उतारा गया है।
यह कदम इन दुर्लभ पक्षियों को अंततः खुले जंगल में सुरक्षित रूप से रिलीज करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
क्या है रीवाइल्डिंग टनल और क्यों है खास?
इसमें इंसानी हस्तक्षेप शून्य के बराबर होता है ताकि चूजे इंसानों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी प्राकृतिक प्रवृत्ति का विकास कर सकें।
यहां इन 3 चूजों को प्राकृतिक चारा, कीड़े-मकोड़े खुद ढूंढकर खाना, उड़ने का अभ्यास करना, बदलते मौसम का सामना करना और शिकारियों से बचाव की तरकीबें सीखने का मौका मिलेगा।
9.25 करोड़ की अत्याधुनिक टनल
विलुप्ति की कगार पर है राज्य पक्षी गोडावण
हाई-टेंशन बिजली की तारों से टकराने, अवैध शिकार और आवास नष्ट होने के कारण इनकी संख्या पर संकट मंडरा रहा है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII – Wildlife Institute of India) और राजस्थान वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चलाए जा रहे प्रोजेक्ट के तहत चूजों को सुरक्षित वातावरण में बड़ा कर पुन: प्राकृतिक आवास में स्थापित करने का काम जारी है।
गोडावण (Great Indian Bustard)
विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी जारी
यदि यह रीवाइल्डिंग प्रक्रिया सफल रहती है, तो आने वाले समय में अन्य चूजों को भी इसी तरह चरणबद्ध तरीके से प्राकृतिक वातावरण में ढालकर खुले जंगल में रिलीज किया जाएगा, जो कि गोडावण संरक्षण के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।
FAQ
- रीवाइल्डिंग टनल क्या होती है?
रीवाइल्डिंग टनल एक प्राकृतिक वातावरण से निर्मित बाड़ा होता है जहां आर्टिफिशियल ब्रीडिंग से जन्मे पक्षियों को बिना इंसानी हस्तक्षेप के आत्मनिर्भर बनना और जंगल में रहने के गुर सिखाए जाते हैं। - भारत में गोडावण (Great Indian Bustard) मुख्य रूप से कहां पाए जाते हैं?
भारत में गोडावण मुख्य रूप से राजस्थान के जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) और आसपास के मरुस्थलीय इलाकों में पाए जाते हैं। - गोडावण संरक्षण परियोजना का संचालन कौन सी संस्थाएं कर रही हैं?
इस परियोजना का संचालन भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII – Wildlife Institute of India) और राजस्थान वन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें:-
आबरा का डाबरा गिली-गिली छू, 50 गार्डों के पहरे से नन्हा गोडावण चंपत
पहली बार नैचुरल ब्रीडिंग से जन्मे 3 चूजे, डेजर्ट नेशनल पार्क में गोडावण का कुनबा बढ़कर हुआ 79
राजस्थान में विलुप्त हो रहे गोडावण को बचाने की पहल, जानिए क्या अपनाएंगे तरीके
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
By VINAY VERMA