तनोट से जयपुर पहुंची ओरण बचाओ पदयात्रा, पुलिस ने सीएम हाउस जाने से रोका
News In Short
- ओरण बचाओ पदयात्रा गुरुवार को राजधानी जयपुर पहुंचे।
- ओरण भूमि और पर्यावरण संरक्षण की मांग कर रहे हैं आंदोलनकारी।
- विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने की ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग।
- पुलिस ने पदयात्रियों को सीकर रोड पर रोक लिया, जहां हल्की झड़प भी हुई।
- प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और बढ़ेगा।
- पदयात्रा 21 जनवरी को जैसलमेर के तनोट माता मंदिर से शुरू होकर जयपुर तक पहुंची।
News In Detail
राजस्थान में ओरण भूमि संरक्षण को लेकर निकाली जा रही पदयात्रा गुरुवार को जयपुर पहुंच गई। यह पदयात्रा को मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचना था, लेकिन पुलिस ने जयपुर सीमा से पहले ही पदयात्रियों को सीकर रोड पर भवानी निकेतन के पास ही रोक लिया। इस दौरान आंदोलनकारियों की पुलिस से हल्की झड़प भी हुई। इस पदयात्रा का नेतृत्व निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी कर रहे हैं।
भाटी ने साधा मुख्य मंत्री पर निशाना
शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बाड़मेर और जैसलमेर से बड़ी संख्या में बुजुर्ग लोग जयपुर पहुंचे हैं। इन लोगो ने 1965 और 1971 के युद्ध में देश के लिए बड़ा योगदान दिया। भाटी ने आरोप लगाया कि आज इन्हें ओरण भूमि संरक्षण की अपनी जायज मांगों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह सरकार के लिए चिंतन का विषय है और ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाना चाहिए।
ओरण भूमि नहीं राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज
विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि ओरण भूमि का बड़ा हिस्सा राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। इससे अतिक्रमण की घटनाएं बढ़ रही हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों को भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन सरकार की ओर से कोई स्पष्ट नीति या गाइडलाइन सामने नहीं आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा अतिक्रमण के मामलों में भी सरकार गंभीर नहीं दिख रही है।
धरातल पर नहीं उतरी घोषणाएं
भाटी ने खेजड़ी संरक्षण को लेकर प्रस्तावित बिल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने सदन में बिल लाने का वादा किया था। लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया। विश्नोई समाज समेत कई अन्य वर्गों ने इस मुद्दे पर आंदोलन किया था। लेकिन सरकार की घोषणाएं अभी तक धरातल पर नहीं उतरी हैं।
तनोट माता मंदिर से जयपुर पहुंची पदयात्रा
पदयात्रा के प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वे 21 जनवरी 2026 को जैसलमेर के तनोट माता मंदिर से पदयात्रा शुरू कर जयपुर पहुंचे हैं। यह यात्रा कड़ाके की ठंड से लेकर भीषण गर्मी तक नंगे पैर चलकर की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे ओरण, गोचर भूमि, खेजड़ी पेड़, नदियों, नालों और तालाबों के संरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सरकार को चेतावनी
पदयात्रा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जय जय जैसाण के नारों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो इस आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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