फलोदी में बोरवेल में गिरने से 9 साल के बच्चे भोमाराम की मौत, 39 घंटे से चल रहा था रेस्क्यू ऑपरेशन
Ashish Bhardwaj | Oct 17, 2026, 15:02 IST
भोमाराम की मौत
राजस्थान के फलोदी जिले से एक दिल दहलाने वाली खबर आई है। 9 साल के बच्चे भोमाराम की बोरवेल में गिरनें से मौत हो गई है। उसे बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन में 39 घंटे से लगातार चल रहा था। लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। बच्चे की मौत ने पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ा गई है।
राजस्थान के फलोदी जिले में खुले बोरवेल में गिरे 9 साल के बच्चे भोमाराम को बचाया नहीं जा सका। करीब 39 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शनिवार तड़के करीब 3:30 बजे बच्चे को बाहर निकाला गया। उसे तुरंत लोहावट के राजकीय हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
यह हादसा लोहावट क्षेत्र के नौसर ग्राम पंचायत के अंतर्गत पूनिया की ढाणी में हुआ। भोमाराम अपने पिता पचाराम भील के खेत में था। वहां बोरवेल की मोटर खराब हो गई थी और मरम्मत के लिए पंप को बाहर निकाला जा रहा था। इसी दौरान पास में मौजूद भोमाराम खुले बोरवेल में गिर गया। हादसे के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते ग्रामीण मौके पर जमा हो गए।
बोरवेल की कुल गहराई करीब 1050 फीट बताई गई। रेस्क्यू टीमों को जानकारी मिली कि भोमाराम करीब 640 फीट नीचे फंसा हुआ है। शुरुआत से ही उसे सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनौती बना रहा। बचाव दल ने कैमरा नीचे उतारकर बच्चे की स्थिति और हलचल पर नजर रखने की कोशिश की।
लेकिन बोरवेल के भीतर बच्चे के ऊपर फंसा भारी पत्थर रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी रूकावट बन गया। इसके कारण उपकरणों को नीचे तक पहुंचाने और कैमरे से स्थिति देखने में दिक्कत हुई। बोरवेल में पानी और मिट्टी धंसने के खतरे ने भी बचाव अभियान को मुश्किल बनाया।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। बाद में NDRF और SDRF की टीमें भी रेस्क्यू में जुट गईं। शुक्रवार रात अजमेर से NDRF की टीम के पहुंचने की जानकारी सामने आई। रात-दिन चल रहे अभियान में बचाव दल लगातार बच्चे तक पहुंचने की कोशिश करता रहा।
जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक आदित्य काकड़े समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर अभियान की निगरानी कर रहे थे। फलोदी विधायक पब्बाराम विश्नोई भी घटनास्थल पहुंचे और अधिकारियों से बचाव कार्य की जानकारी ली। मौके पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था।
रेस्क्यू के दौरान मशीनों और सामान्य उपकरणों से सफलता नहीं मिली, तो बोरवेल से बच्चों को निकालने में अनुभव रखने वाले जालौर के मादाराम सुथार को बुलाया गया। उन्होंने अपनी टीम के साथ लोहे की सरियों से चिमटे जैसा उपकरण तैयार किया। कैमरे से मिली जानकारी के आधार पर उपकरण को बोरवेल में उतारा गया।
काफी मशक्कत के बाद इस उपकरण की मदद से बच्चे के ऊपर फंसे पत्थर को बाहर निकाला गया। इसके बाद भोमाराम को बाहर निकालने की कोशिशें तेज की गईं। करीब 39 घंटे के संघर्ष के बाद उसे बाहर तो निकाल लिया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
भोमाराम की मौत की खबर से परिवार और गांव में शोक छा गया। करीब दो दिन तक ग्रामीण उसकी सलामती की दुआ करते रहे। हर बार रेस्क्यू में थोड़ी प्रगति होने पर उम्मीद बंधती थी कि बच्चा सुरक्षित बाहर आ जाएगा। लेकिन अंतिम नतीजा परिवार के लिए गहरा सदमा बनकर आया।
यह हादसा एक बार फिर खुले बोरवेल से होने वाले खतरों की याद दिलाता है। खेतों या खाली जगहों पर बोरवेल की मरम्मत के दौरान उसका मुंह खुला रह जाना गंभीर हादसे की वजह बन सकता है। ऐसे स्थानों को सुरक्षित ढकना और काम के दौरान बच्चों को दूर रखना बेहद जरूरी है। भोमाराम को बचाने के लिए की गई लंबी कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी।
यह हादसा लोहावट क्षेत्र के नौसर ग्राम पंचायत के अंतर्गत पूनिया की ढाणी में हुआ। भोमाराम अपने पिता पचाराम भील के खेत में था। वहां बोरवेल की मोटर खराब हो गई थी और मरम्मत के लिए पंप को बाहर निकाला जा रहा था। इसी दौरान पास में मौजूद भोमाराम खुले बोरवेल में गिर गया। हादसे के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते ग्रामीण मौके पर जमा हो गए।
1050 फीट गहरा बोरवेल, 640 फीट पर फंसा था बच्चा
लेकिन बोरवेल के भीतर बच्चे के ऊपर फंसा भारी पत्थर रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी रूकावट बन गया। इसके कारण उपकरणों को नीचे तक पहुंचाने और कैमरे से स्थिति देखने में दिक्कत हुई। बोरवेल में पानी और मिट्टी धंसने के खतरे ने भी बचाव अभियान को मुश्किल बनाया।
NDRF-SDRF ने संभाला मोर्चा
जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक आदित्य काकड़े समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर अभियान की निगरानी कर रहे थे। फलोदी विधायक पब्बाराम विश्नोई भी घटनास्थल पहुंचे और अधिकारियों से बचाव कार्य की जानकारी ली। मौके पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था।
देसी जुगाड़ से निकाला गया पत्थर
काफी मशक्कत के बाद इस उपकरण की मदद से बच्चे के ऊपर फंसे पत्थर को बाहर निकाला गया। इसके बाद भोमाराम को बाहर निकालने की कोशिशें तेज की गईं। करीब 39 घंटे के संघर्ष के बाद उसे बाहर तो निकाल लिया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिवार और गांव में मातम
यह हादसा एक बार फिर खुले बोरवेल से होने वाले खतरों की याद दिलाता है। खेतों या खाली जगहों पर बोरवेल की मरम्मत के दौरान उसका मुंह खुला रह जाना गंभीर हादसे की वजह बन सकता है। ऐसे स्थानों को सुरक्षित ढकना और काम के दौरान बच्चों को दूर रखना बेहद जरूरी है। भोमाराम को बचाने के लिए की गई लंबी कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी।
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