पचपदरा रिफाइनरी का लोकार्पण, निर्माण में लगा एफिल टॉवर से 40 गुना ज्यादा स्टील

Jageshwar prasad | Jul 04, 2026, 16:43 IST
पचपदरा रिफाइनरी का लोकार्पण
पीएम नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान की पचपदरा रिफाइनरी का लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री पहले इसका उद्घाटन 21 अप्रैल को करने वाले थे, लेकिन आग की घटना के कारण इसे स्थगित कर दिया गया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • प्रधानमंत्री मोदी ने पचपदरा रिफाइनरी का किया लोकार्पण।
  • 79,450 करोड़ की लागत से तैयार, 9 MMTPA की है क्षमता।
  • निर्माण में लगा एफिल टॉवर से 40 गुना ज्यादा स्टील।
  • नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17.0, दुनिया की आधुनिक रिफाइनरी।
  • राजस्थान को हर साल 5,000 करोड़ रुपए का राजस्व मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पचपदरा में ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का लोकार्पण किया।



इस मौके पर मोदी ने कहा कि देश में ऊर्जा संकट दूर करने का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। हमने संकट शुरू होते ही रिफाइनरी के काम पर फोकस किया। पचपदरा रिफाइनरी इसका उदाहरण है।



करीब 79,450 करोड़ रुपए की लागत से विकसित इस परियोजना में एचपीसीएल की 74 प्रतिशत और राजस्थान सरकार की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है।



हर साल 90 लाख टन कच्चे तेल की होगी प्रोसेसिंग

एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेडकी क्षमता 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है। यानी यहां हर साल लगभग 90 लाख टन कच्चे तेल का शोधन होगा।



इसे रोजाना के हिसाब से देखें तो संयंत्र करीब 1.8 लाख बैरल कच्चे तेल की प्रोसेसिंग करेगा। यह क्षमता कई छोटे देशों की कुल रिफाइनिंग क्षमता के बराबर मानी जा रही है।



रिफाइनरी में करीब 1.5 मिलियन टन कच्चा तेल बाड़मेर के मंगला फील्ड से आएगा, जबकि शेष 7.5 मिलियन टन आयातित क्रूड ऑयल होगा, जिसे 487 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए सीधे मुंद्रा बंदरगाह से लाया जाएगा।



यह प्रोजेक्ट केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहेगा। यहां बीएस-6 मानक का ईंधन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीथिलीन, बेंजीन, ब्यूटाडीन, नैफ्था और बिटुमेन सहित कई पेट्रोकेमिकल उत्पाद तैयार किए जाएंगे।



दुनिया की आधुनिक रिफाइनरियों में होगी शामिल

पचपदरा रिफाइनरी का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17.0 है, जबकि दुनिया की अधिकांश रिफाइनरियों का यह आंकड़ा 8 से 10 के बीच होता है।



इसका मतलब है कि यह संयंत्र हल्के और भारी दोनों प्रकार के कच्चे तेल को अधिक दक्षता के साथ प्रोसेस करने में सक्षम होगा।



इसकी 26 प्रतिशत पेट्रोकेमिकल इंटेंसिटी इसे वैश्विक स्तर की आधुनिक रिफाइनरियों की श्रेणी में खड़ा करती है।



निर्माण में इतना लगा स्टील

पचपदरा रिफाइनरी के निर्माण में करीब 3 लाख मीट्रिक टन स्टील का उपयोग हुआ। यह एफिल टॉवर के निर्माण में लगे स्टील से लगभग 40 गुना अधिक है।



वहीं, इसमें इस्तेमाल हुआ कंक्रीट बुर्ज खलीफा के निर्माण में लगे कंक्रीट से करीब पांच गुना ज्यादा बताया जा रहा है। परियोजना में 28 हजार किलोमीटर लंबी केबल बिछाई गई है।



राज्य को मिलेगा बड़ा आर्थिक लाभ

अधिकारियों के अनुसार रिफाइनरी के संचालन से राजस्थान सरकार को हर वर्ष लगभग 5 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की संभावना है।



इस रिफाइनरी की शुरुआत ऐसे समय हो रही है, जब यूरोप और चीन समेत दुनिया के कई हिस्सों में पुरानी रिफाइनरियां बंद होने की कगार पर हैं।



अधिकारियों का दावा है कि पचपदरा की यह अत्याधुनिक परियोजना भारत को वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।



एक नजर में पचपदरा रिफाइनरी

PM मोदी ने 79,450 करोड़ की पचपदरा रिफाइनरी का किया लोकार्पण, 9 MMTPA क्षमता


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